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पंजाब: गांव खाली कराने का अकाली-भाजपा दांव उल्टा पड़ा

राजीव खन्ना | Updated on: 6 October 2016, 7:19 IST

पंजाब में किसानों को अंतरराष्ट्रीय सीमा के गांव खाली करने के आदेश देकर अकाली-भाजपा दोनों की गाड़ी रिवर्स गियर में आ गई लगती है. हालांकि पंजाब में अंतरराष्ट्रीय सीमा के 10 किमी भीतर तक गांवों को खाली कराने के आदेश सुरक्षा की दृष्टि से दिए गए हैं, पर यह कदम प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल और भाजपा की संयुक्त सरकार के लिए आगामी विधानसभा चुनावों में राजनीतिक दृष्टि से हित में नहीं है.

एक ओर सरकार ने इस आदेश से किसानों को नाराज किया है क्योंकि वे फसलों को लेकर ज्यादा चिंतित हैं, जो कटाई के लिए तैयार खड़ी है. और दूसरी ओर विपक्ष की पार्टियां, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने सवालों की बौछार शुरू कर दी है कि आखिर सीमा के गांवों को खाली कराने के पीछे उनकी मंशा क्या है.

लोगों का कहना है कि पहले जब भी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तनाव हुआ, राजनीतिक पार्टियां सेना के मनोबल को बढ़ाने के लिए सरकार के फैसलों को एक सुर में मानती रही हैं. यह उस दिन भी दिखाई दिया जब भारत ने एलओसी पार सर्जिकल स्ट्राइक किए और पंजाब सरकार ने गांव खाली करने के आदेश दिए.

पर जब से पार्टियों ने देखा कि ये आदेश केवल पंजाब में दिए गए हैं, उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल करने शुरू कर दिए, क्योंकि पाकिस्तान की लंबी सीमा पर और राज्य भी हैं. बादल भी पिछले तीन दिनों से किसानों को मनाने में लगे हैं. उन्होंने सीमा के गांवों का दौरा ग्रामीणों को यह आश्वासन देने के लिए शुरू किया है कि वे फसलों की कटाई कर सकते हैं और राज्य की ओर से रक्षा बलों में भी शामिल हो सकते हैं.

पंजाबी, दिलेरी, साहस और बहादुरी के लिए जाने जाते हैं और वे पलायन करने की बजाय अपनी सेना के साथ खड़े होंगे

खासतौर पर पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष का तीखा आरोप है कि बादल और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार युद्ध के उन्माद को फैलाने में लगी है. उन्होंने मुंह पर कहा कि केंद्र में भाजपा की एनडीए सरकार यूपी में चुनावों के मद्देनजर पंजाब सीमा पर युद्ध के उन्माद और तनाव को अनावश्यक रूप से खींच रही है.

उन्होंने ग्रामीणों को यह कहते हुए गांव खाली नहीं करने की अपील की कि वे उन्हें अपने-अपने घर में बनाए रखने के लिए जल्द उनके साथ रहेंगे. साथ ही यह भी कहा कि फिलहाल युद्ध के कोई संकेत नहीं हैं, जो उन्हें सुरक्षित जगह पर जाने या स्थानांतरित करने के लिए बाध्य करेंगे. 

अमरिन्दर ने कहा, 'पंजाबी, दिलेरी, साहस और बहादुरी के लिए जाने जाते हैं और वे यहां से पलायन करने की बजाय अपनी सेना के साथ खड़े होकर लड़ना बेहतर समझेंगे, जबकि भाजपा उन्हें यहां से पलायन करने को कह रही है, जिसे वे कभी नहीं करेंगे. उनमें अपने जीवन को जोखिम में डालकर दूसरों की रक्षा करने का साहस और आत्मविश्वास है.'

उन्होंने कहा, 'हमारी सेना पीसटाइम जोन में है और हमारे गांवों को उखाड़ा जा रहा है.' साथ ही यह भी कि यूपी में अब तक अपना पैर नहीं जमा सकने के कारण भाजपा पंजाबियों को उत्तर प्रदेश चुनावों के लिए बलि का बकरा बना रही है.'

गांवों को खाली कराने के अपने विरोध को जायज ठहराते हुए उन्होंने कहा कि सीमा के पार सेना की कोई गतिविधि नहीं है. उन्होंने पूछा, 'जब युद्ध के दूर-दूर तक कोई संकेत नहीं हैं, तो इन बेचारे किसानों को क्यों उजाड़ा जाए, और वो भी तब जब फसल कटने को तैयार है?'

उन्होंने इसका भी मुद्दा उठाया कि गांव खाली करने के निर्देश रक्षा मंत्रालय से नहीं, गृह मंत्रालय से आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि बादल को गांव खाली करवाने के आदेशों का विरोध करना चाहिए था, जिसकी अभी बिलकुल आवश्यकता नहीं है. उनके मुताबिक 1965 में या 2002 में ऑपरेशन पराक्रम के दौरान भी लोगों को उनके पैत्रिक आवासों से निकाला नहीं गया था.

पहलां पंजाब लोक हित अभियान का नेतृत्व कर रहे पूर्व कांग्रेस नेता जगमीत बरार ने कहा, 'लोग उलझन में हैं और डरे हुए हैं. मैंने देखा है, सामान से लदी हजारों ट्रॉलियों और छोटे ट्रकों को उन कैंपों की ओर बढ़ते हुए, जहां बहुत कम व्यवस्था और सूचनाएं उपलब्ध हैं. इससे लोगों के बीच आतंक और डर व्याप्त है.'

उनका कथन भारतीय सेना और देश, खासकर पंजाब के लोगों के बीच अविश्वास की भावना पैदा कर रहा है

आम आदमी पार्टी के पूर्व सैनिक विंग के प्रमुख कप्तान बिक्रमसिंह पाहुविंडिया ने रविवार को स्थानांतरित लोगों के बारे में चिंता व्यक्त करते हुए बादल को एक ज्ञापन दिया. अमरिन्दर की टिप्पणी पर अकालियों ने कहा कि उनका कथन भारतीय सेना और देश, खासकर पंजाब के लोगों के बीच अविश्वास की भावना पैदा कर रहा है.

शिरोमणि अकाली दल के महासचिव डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि अमरिन्दर को तुरंत माफी मांगनी चाहिए और अपने कथन को वापस लेना चाहिए, जो बिलकुल आधारहीन और झूठा है और उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा के एक बेहद संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति करने की कोशिश करार दिया.

चीमा ने कहा कि 'भारतीय सेना के पूर्व अधिकारी के तौर पर उम्मीद की जाती है कि अमरिन्दर जैसे नेता सीमा से सटे राज्यों के लोगों को भारतीय सेना और बीएसएफ को सहयोग करने और उनके निर्देश का पालन करने की सलाह देंगे. पर यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हालात की गंभीरता को समझने की बजाय वे भारत के गृह मंत्रालय के निर्देशों के संबंध में लोगों के मन में शंकाएं पैदा करने के लिए काफी नीचे स्तर पर आ गए हैं.'

कांग्रेस नेताओं ने चीमा से यह कहते हुए पलटवार किया कि दूसरों को लेक्चर देने से पहले वे रक्षा और वीरता के पाठ खुद सीखें. वरिष्ठ विधायक राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी, सुखजिंदर सिंह रंधावा, तृप्त राजिन्दर सिंह बजवा, अरुणा चौधरी, सुख सरकारिया और परमिंदर सिंह पिंकी ने चीमा को याद दिलाया कि बादल को सीमा के गांवों में जनाक्रोश का सामना करना पड़ेगा क्योंकि लोग अपने गांव से बाहर नहीं जाना चाहते.

उन्होंने चीमा को सलाह दी कि, 'बेहतर होगा कि वे अपने नेता से पूछें कि उनके साथ कई गांवों में आक्रोशित ग्रामीणों का कैसा व्यवहार रहा था.' उन्होंने आगे कहा कि बादल भाजपा के निर्देशों का खुशी से जानबूझकर पालन कर रहे हैं क्योंकि उन्हें सरकारी खरीद की समस्या से बाहर आने का बहाना चाहिए. उनके पास किसानों का भुगतान करने के लिए पैसा नहीं है.'

दूसरी ओर बादल ग्रामीणों के पास जा रहे हैं, इसके बावजूद कि वे अपने घर खाली करने से इनकार कर रहे हैं

दूसरी ओर बादल ग्रामीणों के पास जा रहे हैं, इसके बावजूद कि वे अपने घर खाली करने से इनकार कर रहे हैं. खाली करने के लिए व्यवस्थाएं भी घटिया हैं. किसानों को फसल काटने की अनुमति का आश्वासन देने के बाद वे घोषणा कर रहे हैं कि उनके क्षेत्रों से कटा अनाज उठाने और बिना परेशानी के तुरंत सरकारी खरीद के लिए खास अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी.

तारण-तारण और अमृतसर में सीमा से सटे गांवों के दौरे के दौरान उनके साथ कैबिनेट मंत्री बिक्रम मजीठिया भी थे. उन्होंने कहा कि बॉर्डर पर तनाव के बढ़ने की आशंका को देखते हुए किसान के अनाज के हर दाने को उठाने की जिम्मेदारी सरकार की है.'

उन्होंने केंद्र सरकार को सीमा के युवाओं को भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों में भर्ती करने के लिए खास व्यवस्था शुरू करने को कहा है. उन्होंने कहा कि खुशकिस्मती से इस क्षेत्र के युवाओं में अदम्य साहस और आत्मत्याग की भावना है, इसलिए इस ऊर्जा को देश हित में लगाने की जरूरत है. बादल ने कहा कि वे केंद्र सरकार के सामने जल्द ही इस मुद्दे को उठाएंगे और जल्द समाधान करवाने की कोशिश करेंगे.

उन्होंने इसका भी खुलासा किया कि वे यहां के लोगों का जीवन सहज बनाए रखने के लिए रक्षा मंत्रालय से मिलेंगे और इसका ध्यान रखने के लिए भी कहेंगे कि यहां किसी भी तरह की अप्रिय घटना नहीं हो.

First published: 6 October 2016, 7:19 IST
 
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