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अब CRPF जवान का वीडियो वायरल- 'हमारे साथ भेदभाव क्यों, मिलनी चाहिए सुविधा'

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 January 2017, 17:26 IST
(वीडियो ग्रैब)

बीएसएफ जवान तेजबहादुर यादव का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि एक सीआरपीएफ जवान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. 

जीत सिंह नाम के सीआरपीएफ जवान ने इस वीडियो में पेंशन समेत कई सुविधाओं का मुद्दा उठाते हुए पीएम मोदी से सीआरपीएफ और पैरा मिलिट्री फोर्स को सुविधाएं मुहैया कराने की मांग की है. 

सीआरपीएफ जवान के आरोपों पर गृहराज्यमंत्री हंसराज अहीर ने कहा है कि सभी के साथ एक जैसा व्यवहार होना चाहिए चाहे सेना हो या अर्धसैनिक बल. अहीार ने कहा है कि अभी कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है, लेकिन सरकार इस पर गौर करेगी.

सीआरपीएफ जवान जीत सिंह का वीडियो

सीआरपीएफ जवान जीत सिंह ने वीडियो में कहा, "मेरा कहना यह है कि हम लोग सीआरपीएफ वाले इस देश में ऐसी कौन सी ड्यूटी है जो नहीं करते हैं. लोकसभा चुनाव, राज्यसभा चुनाव यहां तक कि छोटे-छोटे ग्राम पंचायत के चुनावों में भी हम ड्यूटी करते हैं. इसके अलावा वीआईपी सिक्योरिटी, वीवीआईपी सिक्योरिटी, संसद भवन, एयरपोर्ट, मंदिर, मस्जिद या गुरुद्वारे कोई भी ऐसी जगह नहीं है जहां सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स के जवान अपना योगदान न देते हों." 

सीआरपीएफ जवान ने वीडियो में आगे कहा है, "इतना सब कुछ करने के बावजूद भी भारतीय आर्मी और सीआरपीएफ समेत बाकी पैरा मिलिट्री फोर्स को मिलने वाली सुविधाओं में इतना अंतर है, इतना अंतर है कि आप लोग सुनोगे तो हैरान रह जाओगे. सबसे बड़ी बात माननीय मोदी जी से मैं कहना चाहूंगा कि हमारे देश के अंदर न जाने कितने ही सरकारी स्कूल और कॉलेज हैं. जिनके अंदर बैठे टीचरों को आप पचास-पचास साठ-साठ हजार महीने की तनख्वाह दे रहे हो. और उसमें साल में न जाने कितने दिन हर त्यौहार वे लोग घर में रहते हैं घर में मनाते हैं. और हम लोग कोई छत्तीसगढ़ कोई झारखंड के जंगलों में कोई जम्मू-कश्मीर की पहाड़ियों में पड़ा रहता है. न ही हमें कोई वेलफेयर मिलता है, न ही समय से छुट्टियां मिलती हैं. हमारे इस दुख को समझने वाला कोई नहीं है. क्या हम लोग इसके हकदार नहीं हैं." 

वीडियो में जीत सिंह ने आगे कहा, "इतनी ड्यूटियां करने के बावजूद भी दोस्तों आर्मी को पेंशन भी है. हम लोगों की पेंशन थी वो भी बंद हो गई. 20 साल बाद हम नौकरी छोड़कर जाएंगे तो क्या करेंगे. एक्स सर्विसमैन का कोटा भी हमको नहीं. कैंटीन हमको नहीं. मेडिकल की सुविधा नहीं. ड्यूटी-ड्यूटी सबसे ज्यादा हमारी. आर्मी को जो सुविधाएं मिलती हैं हमें उससे एतराज नहीं. मिलनी चाहिए लेकिन हमारे साथ भेदभाव क्यों? हमको भी तो मिलनी चाहिए."

सीआरपीएफ की प्रतिक्रिया

सीआरपीएफ के मुताबिक वीडियो 16 अक्टूबर 2016 का है.  सीआरपीएफ ने अपने प्रेस नोट में साफ किया है कि कांस्टेबल ने किसी संगठन की शिकायत नहीं की है. 

सीआरपीएफ के डीजी दुर्गा प्रसाद का कहना है कि जवान ने जो भी मुद्दे उठाएं है उनको पहले ही सरकार के सामने रखा जा चुका है. उन्होंने कहा कि हकीकत में अगर तुलना की जाए तो सीआरपीएफ को वो सब नहीं मिलता है जो सेना को मिलता है. 

सीआरपीएफ डीजी का कहना है, "सभी मुद्दों को सातवें कमीशन के सामने रखा जा चुका है. 2004 के बाद ही पेंशन मिलनी बंद हो गई थी. लेकिन हम स्किल डेवलेपमेंट की ट्रेनिंग देने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे रिटायरमेंट के बाद भी नौकरी का मौका मिले." 

डीजी दुर्गा प्रसाद का कहना है, "हमारे पास अच्छी मेडिकल व्यवस्था है, हमारे अस्पताल ऊंचे दर्जे के तो नहीं हैं पर हमें कैशलेस ट्रीटमेंट मिलता है. जवानों के लिए छत्तीसगढ़ के जंगलों में भी फील्ड ऑफिसर अस्पताल खोला गया है. सभी मुद्दों को सरकार के सामने रखकर उनका हल ढूंढा जा रहा है."

छुट्टी की कमी पर दुर्गा प्रसाद ने कहा, "जहां तक छुट्टी मिलने की बात है तो बहुत सारे त्यौहार होते हैं. हर किसी को अवकाश देना संभव नहीं है. जवान की फोर्स से कोई शिकायत नहीं है बल्कि उसने सेना से सीआरपीएफ की तुलना की है."

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरन रिजिजू का कहना है, "सरकार की तरफ से जवानों के वेलफेयर के लिए चाहे वह जवान कहीं भी पदस्थापित हो, उनके बारे में सोचना सरकार का दायित्व है, हमारी प्राथमिकता है. सभी चीज़ों की अच्छी तरह जांच होनी चाहिए, ऐसे में हम इसको गंभीरता से ले रहे हैं." रिजिजू ने कहा कि बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव के आरोपों की भी जांच चल रही है.

First published: 12 January 2017, 17:26 IST
 
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