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विश्व हिंदू परिषद ने मोदी सरकार को दी 'डेडलाइन', 2018 के सूर्यास्त के पहले आए राम मंदिर के लिए अध्यादेश

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 October 2018, 8:35 IST

देश में कहीं भी चुनाव हो लेकिन चुनावों का वक़्त नजदीक आते ही राम मंदिर का मुद्दा गरमाने लगता है. इस बार फिर से राम मंदिर मुद्दे पर सियासत शुरू हो गई है. विश्व हिन्दू परिषद् ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को लेकर कहा है कि वो मंदिर निर्माण के लिए वह ‘अंतिम लड़ाई’ लड़ रही है. तल्ख़ तेवर में विश्व हिन्दू परिषद् ने कहा कि इस साल के अंत तक राम मंदिर निर्माण के मुद्दे पर अध्यादेश लाने के लिए भाजपा शासित केन्द्र सरकार को एक ‘समय सीमा’ दे दी गई है.

गौरतलब है कि राम जन्मभूमि न्यास के कार्यकारी प्रमुख महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में हुई विहिप की एक उच्च स्तरीय बैठक में राम मंदिर निर्माण के मामले को लेकर संसद मे एक अध्यादेश लाने की मांग की गई. इस अध्यादेश से अयोध्या में राम जन्मभूमि के विवादित स्थल पर एक भव्य राम मंदिर बनाने के लिए कोई राह निकाली जा सके.

बैठक के बाद संतों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की और उन्हें प्रस्ताव की एक प्रति सौंपी और उनसे अनुरोध किया कि सरकार उनकी मांगों को पूरा करें. विहिप के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा, ''सरकार के लिए इस वर्ष के अंत तक संसद में अध्यादेश लाये जाने की ‘‘समयसीमा’’ तय की गई है.''

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इतना ही नहीं विहिप नेता ने प्रधानमंत्री मोदी को राम भक्तों में से एक बताते हुए कहा, ''देश में करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं को स्वीकार किया जायेगा और ‘‘2018 के सूर्यास्त से पहले’’ कानून लाया जायेगा.'' आगे कुमार ने कहा,‘‘यदि ऐसा नहीं होता है तो इसके बाद हमारे पास सभी विकल्प हैं. इलाहाबाद में महाकुंभ के इतर अगले वर्ष होने वाली दो दिवसीय ‘धर्म संसद’ के दौरान भविष्य की रणनीति पर निर्णय लिया जायेगा.''

इस मुद्दे पर राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि राम मंदिर के निर्माण के लिए 'जनेऊधारी' नेताओं को भी साथ देना चाहिए.

First published: 6 October 2018, 8:36 IST
 
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