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'अगर कुलभूषण जाधव के पास वैध पासपोर्ट था तो जासूस कैसे हो सकते हैं'

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 April 2017, 16:12 IST
(एजेंसी)

केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह ने कुलभूषण जाधव के मुद्दे पर पाकिस्तान को कठघरे में खड़ा किया है. दस अप्रैल को पाकिस्तान की आर्मी कोर्ट ने कुलभूषण जाधव को जासूसी के आरोप में मौत की सजा सुनाई है. तभी से ये मुद्दा भारत में गरमाया हुआ है. 

केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री और भारतीय थलसेना के रिटायर्ड जनरल वीके सिंह ने दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, "अगर कुलभूषण जाधव के पास वैध भारतीय पासपोर्ट था, तो वे जासूस कैसे हो सकते हैं?"

इस बीच कुलभूषण जाधव के मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के संबंधों में तनाव देखा जा रहा है. पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त गौतम बंबावले ने पाकिस्तान के विदेश सचिव से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान से जाधव तक कांसुलेट एक्सेस पहुंचाने और चार्जशीट की कॉपी सौंपने की भी मांग की.

गौरतलब है कि भारत पहले ही कह चुका है कि अगर पाकिस्तान ने  कुलभूषण जाधव को फांसी की सज़ा दी तो उसे इसके बुरे नतीजे भुगतने होंगे. पिछले साल कुलभूषण जाधव को बलोचिस्तान से गिरफ़्तार किया गया था. भारत का दावा है कि नौसेना से रिटायर होने के बाद जाधव ईरान के चाबहार में कारोबार कर रहे थे और उन्हें पाकिस्तानी एजेंसियों ने अगवा कर लिया. 

पाकिस्तान का कहना है कि जाधव भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के एजेंट हैं और वे हुसैन मुबारक पटेल के नाम से पाकिस्तान में रह रहे थे. उन पर बलोचिस्तान और कराची में रॉ के मिशन को अंजाम देने के लिए जासूसी करने और विध्वंसक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है.

10 अप्रैल 2017 को मौत की सज़ा

पाकिस्तान के सैन्य मुख्यालय रावलपिंडी से जारी आईएसपीआर की प्रेस रिलीज में कहा गया था, "भारतीय रॉ एजेंट/नेवल ऑफिसर 41558Z कमांडर कुलभूषण सुधीर जाधव उर्फ हुसैन मुबारक पटेल को 3 मार्च, 2016 को बलोचिस्‍तान के मश्‍केल क्षेत्र से काउंटर इंटेलिजेंस ऑपरेशन के जरिए गिरफ्तार किया गया था. उसे पाकिस्तान में जासूसी करने और गड़बड़ी फैलाने वाली गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में पकड़ा गया था." 

आईएसपीआर ने कहा है, "जासूस को पाकिस्‍तान की सैन्‍य अदालत फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल (एफजीसीएम) के जरिए ट्रायल किया गया और पाकिस्तान आर्मी एक्ट के तहत मौत की सजा सुनाई गई है. आज चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (सीओएएस) जनरल कमर जावेद बाजवा ने एफजीसीएम से सजा-ए-मौत दिए जाने की पुष्टि की है."

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First published: 14 April 2017, 16:11 IST
 
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