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अब अजित सिंह को लेकर मुलायम परिवार में मतभेद

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 May 2016, 19:16 IST
(पीटीआई)

समाजवादी पार्टी (सपा) और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के संभावित गठबंधन पर मुलायम परिवार में मतभेद के स्वर उभरने लगे हैं. सपा सांसद और मुलायम सिंह यादव के भाई रामगोपाल यादव का कहना है कि अपनी विश्वसनीयता खो चुके रालोद प्रमुख अजित सिंह से हाथ मिलाना सपा के लिए समझदारी भरा कदम नहीं होगा.

एक दिन पहले उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने सांप्रदायिक ताकतों से मुकाबले के लिए रालोद-सपा गठबंधन की आवश्यकता बताई थी.

शिवपाल ने कहा, वह चाहते हैं कि बीजेपी को हराने के लिए सभी लोहियावादी, चौधरी चरण सिंहवादी और गांधीवादी विचारधारा के लोग एक हो जाएं.

रालोद के साथ सपा के गठबंधन के बारे में पूछे जाने पर शिवपाल ने कहा, 'बातचीत अभी शुरू हुई है, अच्छी बात हुई है. हमारे तो चौधरी साहब से बहुत पहले से ही अच्छे संबंध हैं.'

दूसरी ओर, रामगोपाल यादव का कहना है कि जो लोग जनता में अपनी विश्वसनीयता खो चुके हैं, उनसे समझौता करना किसी भी राजनीतिक दल के लिए समझदारी वाली बात नहीं होगी.

एक दिन पहले खबर आई थी कि अजित सिंह सपा के सहयोग से राज्यसभा में जा सकते हैं. इस सिलसिले में अजित सिंह ने रविवार को दो बार दिल्ली में मुलायम से मुलाकात की थी.

लोकसभा चुनाव 2014 में अजित सिंह की पार्टी को करारी हार मिली थी. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अजित सिंह और उनके बेटे जयंत चौधरी को भी हार का सामना करना पड़ा था.

इससे पहले जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) में अजित सिंह की पार्टी रालोद के विलय की बातचीत चल रही थी. पश्चिमी यूपी में रालोद का जाट वोटों पर अच्छा खासा प्रभाव है.

2012 के विधानसभा चुनाव में रालोद ने कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था. पश्चिमी यूपी की जिन 46 सीटों पर रालोद ने उम्मीदवारे उतारे थे, उनमें 20 फीसदी वोटों के साथ 9 सीटों पर जीती थी.

First published: 30 May 2016, 19:16 IST
 
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