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व्यापम व्हिसिल ब्लोअर ने लगाया पुलिस पर अपनी सामाजिक हत्या करने का आरोप

चारू कार्तिकेय | Updated on: 21 January 2016, 23:06 IST
QUICK PILL
  • व्यापम घोटाले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सीधी भागीदारी का दावा करने वाले व्हिसिल ब्लोअर आशीष चतुर्वेदी ने आरोप लगाया है कि राज्य पुलिस ने उसे लगभग नजरबंद कर रखा है.
  • आशीष के मुताबिक व्यापम का पूरा मामला सीबीआई के हवाले कर दिया गया है इके बावजूद उन्हें यह नहीं समझ में आ रहा कि अब भी एसआईटी बार-बार उनसे पूछताछ क्योंं करती है.

यूं तो व्यापम घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपने का कितना ठोस प्रभाव पड़ा इसकी उत्सुकता से प्रतीक्षा की जा रही है. लेकिन इस बहुचर्चित घोटाले को सामने लाने वाले लोगों को रोजाना नई परेशानियों को सामना करना पड़ रहा है.

घोटाले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सीधी भागीदारी का दावा करने वाले व्हिसिल ब्लोअर आशीष चतुर्वेदी ने अब आरोप लगाया है कि राज्य पुलिस ने लगभग उसे नजरबंद कर दिया है. 

चतुर्वेदी ने मध्य प्रदेश पुलिस के महानिदेशक को पत्र लिखकर सुरक्षा प्रदान करने के नाम पर उनकी गोपनीयता और मानवाधिकारों के उल्लंघन की शिकायत की है.

ग्वालियर निवासी चतुर्वेदी व्यापम घोटाले के उन शुरुआती व्हिसिल ब्लोअर्स में थे जिन्होंने कई उच्च और शक्तिशाली पदों पर बैठे राजनीतिज्ञों, नौकरशाहों और पुलिसकर्मियों सहित घोटाले में शामिल लोगों के खिलाफ सबूत प्रदान किए थे. वो कई मामलों में या तो गवाह हैं या फिर शिकायतकर्ता इसलिए राज्य पुलिस द्वारा उन्हें सुरक्षा प्रदान की गई है. 

सुरक्षा देने के नाम पर पुलिसकर्मियों ने कब से सुरक्षा मांगने वाले के घर के अंदर ही रहना शुरू कर दिया

अतीत में चतुर्वेदी की सुरक्षा एक मजाक भी बन गई थी क्योंकि वो शहर में साइकिल से चलते थे और उन्हें सुरक्षा के लिए मिले कांस्टेबल को अपने साथ साइकिल में बैठाने के लिए मजबूर किया गया. कई ऐसे मौके भी आए जब दूसरी साइकिल चला रहे कांस्टेबल ने कहा कि उसकी साइकिल पंचर हो गई और वह उसके साथ आगे नहीं जा सकता.

MP Vyapam letter to dgp 1
MP Vyapam letter to dgp

पुलिस ने अंदर से दरवाजे बंद कर लिए

उन्होंने कैच को एक घटना के बारे में बताया कि जब 13 जनवरी की रात को दो पुलिसवाले उसके घर आए और अंदर से दरवाजा बंद कर दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों पुलिसवाले उसे रात 10 बजे से अगली सुबह 10 बजे तक घर में नजरबंद रखने के लिए ही आए थे.

उन्होंने यह भी कहा कि घर पर उसकी बहन और सौतेली मां भी थी और घर में उन पुलिसवालों की मौजूदगी और ताकाझांकी सभी के लिए परेशानी बन गई थी. उन्होंने पूछा कि सुरक्षा देने के नाम पर पुलिसकर्मियों ने कब से सुरक्षा मांगने वाले के घर के अंदर ही रहना शुरू कर दिया है?

इस घटना से पूर्व राज्य के पुलिस महानिदेशक को लिखे अपने पत्र में चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि 11 और 12 जनवरी को पुलिसबलों को उन्हें ढूंढ़ने के लिए लगाया गया और इस बारे में मीडिया को भ्रामक जानकारी दी गई. इसकी वजह से उसके मित्रों और परिचितों में डर पैदा हो गया और वे चतुर्वेदी से खुद को दूर करने लगे. उन्होंने पुलिस पर उनकी 'सामाजिक हत्या' का आरोप लगाया.

पुलिस ने मुझे एक आतंकवादी के रूप में दिखाया

उन्होंने कैच को बताया कि जब से उन्होंने व्यापम घोटाले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कई सदस्यों की भूमिका से अवगत कराया है, तब से उन्हें आरएसएस कार्यकर्ताओं से धमकी मिलनी शुरू हो गई. खुद को बचाने के लिए वह कुछ दिनों के लिए 'भूमिगत' भी हो गए. उन्हें 12 जनवरी को ग्वालियर की एक अदालत में सुनवाई के लिए पेश होना था जिसके लिए 11 जनवरी को घोटाले की जांच कर रही ग्वालियर की एसआईटी के प्रमुख ने उन्हें फोन किया.

चतुर्वेदी ने कहा कि उन्होंने विधिवत कॉल रिसीव की और अदालत में सुनवाई के दिन पहुंचने तक एसआईटी अधिकारियों के नियमित संपंर्क में थे. उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद पुलिस ने एक मीडिया को एक बयान जारी कर बताया कि वो लापता हो गए हैं और यहां तक ​​कि पुलिस की कॉल रिसीव नहीं कर रहे. 

दोस्तों-परिचितों को उसके साथ रहने में डर लगने की बात बताते हुए चतुर्वेदी ने कहा, "उन्होंने मुझे एक भगोड़ा आतंकवादी बना दिया था." 

उन्होंने मुझे एक भगोड़ा आतंकवादी बना दिया था

उन्होंने यह भी दावा किया कि सही तरीके से जांच नहीं कर पाने के लिए ग्वालियर एसआईटी खुद ही दोषी है. जबकि उन्होंने घोटाले में शामिल तमाम हाई प्रोफाइल लोगों के नाम और उनके खिलाफ सबूत भी दे दिए थे. उन्होंने कहा कि जबकि व्यापम का पूरा मामला सीबीआई के हवाले कर दिया गया है, उन्हें यह नहीं समझ में आ रहा कि अब भी एसआईटी उनके पीछे क्यों पड़ी है, एसआईटी की यह पूछताछ गैरकानूनी है.

चतुर्वेदी ने कहा कि 18 जनवरी को स्पीड पोस्ट से उन्होंने डीजीपी को पत्र भेजा था और यह 19 जनवरी को उनके पास पहुंच गया, जिसकी जानकारी उन्हें इंडिया पोस्ट से मिल गई थी. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अभी किसी जवाब का इंतजार है.

First published: 21 January 2016, 23:06 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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