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अब आतंकी हमले के बाद भी नहीं जाएगी जवानों की जान, DRDO ने तैयार की ऐसी अनोखी दवाई

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 March 2019, 12:14 IST

युद्ध के दौरान गंभीर रूप से घायल सेनाओं में से 90 प्रतिशत कुछ घंटों के अंदर दम तोड़ देते हैं. इस बात को ध्यान में रखते हुए डिफेंस रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) की चिकित्सकीय प्रयोगशाला एक ऐसी अनोखी दवाई लेकर आई है, जिसके जरिए इन जवानों की जान बचाई जा सकेगी.

डीआरडीओ चिकित्सकीय प्रयोगशाला 'कॉम्बैट कैजुअलिटी ड्रग्स' लेकर आई है, जिससे घायल जवानों को अस्पताल में पहुंचाए जाने से पहले तक के बेहद नाजुक समय को बढ़ाया जा सके, जिसे घायल जवानों की जान बचाने के लिहाज से ‘गोल्डन’ समय कहा जाता है.

DRDO के वैज्ञानिकों ने बताया कि इन दवाओं में खून निलकने वाली घाव को भरने वाली दवा, अवशोषक ड्रेसिंग और ग्लिसरेटेड सैलाइन शामिल हैं. ये सभी चीजें जंगल, अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में युद्ध और आतंकवादी हमलों की स्थिति में जीवन बचा सकती हैं. वैज्ञानिकों ने 14 फरवरी को पुलवामा में आतंकवादी हमले का जिक्र किया, जिसमें सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे.

उन्होंने कहा इन दवाइयों के इस्तेमाल से मृतक संख्या में कमी लाई जा सकती है. DRDO की प्रयोगशाला इंस्टिट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन ऐंड अलाइड साइंसेस में दवाओं को तैयार करने वाले वैज्ञानिकों के अनुसार घायल होने के बाद और अस्पताल पहुंचाए जाने से पहले यदि घायल को प्रभावी प्राथमिक उपचार दिया जाए तो उसके जीवित बचने की संभावना अधिक होती है.

संगठन में लाइफ साइंसेस के महानिदेशक एके सिंह ने कहा कि DRDO की स्वदेशी निर्मित दवाएं अर्द्धसैनिक बलों और रक्षाकर्मियों के लिए युद्ध के समय में वरदान हैं. उन्होंने कहा, 'ये दवाएं यह सुनिश्चित करेंगी कि घायल जवानों को युद्धक्षेत्र से बेहतर स्वास्थ्य देखभाल के लिए ले जाए जाने के दौरान हमारे वीर जवानों का खून बेकार में न बहे.'

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First published: 12 March 2019, 10:11 IST
 
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