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रोजगार बैंक: आमजन को लाभ या महज दिखावा?

सुलग्ना सेनगुप्ता | Updated on: 10 August 2016, 7:33 IST

पश्चिम बंगाल में ममता सरकार के सामने एक ओर बेरोजगारी की चुनौती है, तो दूसरी ओर उसे व्यापार संघों की मनमानी पर नियंत्रण करना है. इसके लिए सरकार ने रोजगार बैंक के माध्यम से इस साल के अंत तक लगभग 12 लाख लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य तय किया है.

राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, ममता बनर्जी के सत्ता में आने के बाद 31 जुलाई तक लगभग 68,00,912 लोगों को रोजगार बैंक के माध्यम से नौकरियां दी जा चुकी हैं. सरकारी स्कूलों में प्राइमरी और सेकेंडरी स्तर पर लगभग 3,96,143 लोगों को शिक्षक की नौकरी दी गई है.

सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम, जिस पर ममता का सबसे ज्यादा ध्यान है, में लगभग 35,83,769 लोगों को होम गार्ड और चपरासी की ठेके पर नौकरियां दी गई हैं; जबकि हाउसकीपिंग, सरकारी श्रम विभाग, मत्स्य पालन विभाग और खादी उद्यम जैसे असंगठित क्षेत्रों में 2,82,100 लोगों को नौकरियां मिली हैं.

वेतन का मुद्दा

नौकरियां देने के बाद राज्य सरकार पर वेतन का भार प्रति माह 10,555 करोड़ रुपए बढ़ गया है. वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के अनुसार चपरासियों और जो हाउसकीपिंग में जो लोग नामांकित हैं, उन्हें सरकार प्रतिदिन 100 रुपए देती है, पर उन्हें भविष्य निधि और ग्रेच्युटी की सुविधा नहीं है. जो शिक्षक प्राइमरी और सेकेंडरी स्तर पर ठेके पर नामांकित हैं, उन्हें 5,000 रुपए प्रति माह वेतन दिया जा रहा है, पर उन्हें भी पेंशन और ग्रेच्युटी का लाभ नहीं मिल रहा.

ऑनलाइन रोजगार

रोजगार बैंक ने अपनी एक वेबसाइट बनाई है, जहां नौकरी के इच्छुक अपने नाम का पंजीकरण ऑनलाइन करवा सकते हैं. इसके लिए उन्हें वेबसाइट पर लॉग इन करना आवश्यक है. राज्य के श्रम मंत्री मलय घटक ने बताया कि उन्हें वर्ष के अंत तक 12 लाख नौकरियां देने की उम्मीद है.

इस व्यवस्था से खुश ईस्ट मिदनापुर के वासी कनाईलाल मैती ने बताया कि वह अब राज्य के श्रम विभाग में चपरासी के तौर पर काम कर रहा है और 2,000 रुपए प्रतिमाह वेतन कमा रहा है. पहले वह अपने परिवार के साथ सड़कों पर रहता था, पर अब उसके पास पक्का घर है.

प्रोत्साहन राशि

पश्चिम बंगाल के श्रम विभाग ने 'युवाश्री' (जिसका नाम पहले 'युवा उत्साह प्रकल्प' था) आवेदन-पत्र के बारे में कुछ महीनों पहले एक सूचना प्रकाशित की थी कि रोजगार बैंक में ऑनलाइन पंजीकरण करवाने वाले अभ्यर्थियों को प्रति माह 1,500 रुपए का वजीफा दिया जाएगा.

पंजीयन के लिए उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए और 46 वर्ष तक के लोग आवेदन कर सकते हैं. वे अपने निजी विवरण और शैक्षिक योग्यताओं के साथ पंजीयन करवा सकते हैं. अभ्यर्थी आठवीं पास होना चाहिए. रोजगार बैंक की ओर से उसे नई नौकरी पेश की जाएगी.

पंजीयन के बाद उन्हें अपने दस्तावेज सत्यापन के लिए रोजगार कार्यालय केंद्र जाना आवश्यक है. इसके बाद कार्यलय से उन्हें यूजर आइडी और पासवर्ड दिया जाएगा, जिससे पंजीकृत अभ्यर्थी प्रस्तावित नौकरी को चेक कर सकता है या अपने व्यक्तिगत ब्यौरे में सुधार कर सकता है.

यहां भी समर्थकों को फायदा?

आमजन इस व्यवस्था से खुश नहीं है. पश्चिम बंगाल के 19 साल के शब्बीर मियां ने बताया कि वे रोजगार बैंक में आवेदन कर चुके हैं, पर उन्हें अभी तक बुलाया नहीं गया. उनकी शिकायत है कि केवल तृणमूल के समर्थकों को नौकरियां मिल रही हैं और आम नागरिक लाभ से वंचित रह रहे हैं.

विपक्षी पार्टियां यह कहते हुए ममता सरकार के रोजगार बैंक की आलोचना कर रही हैं कि सरकार अपने अभ्यर्थियों को भरती करना चाहती है. नौकरी देने का दावा कोरा दिखावा है. कांग्रेसी नेता अब्दुल मनन के मुताबिक आंकड़ों को बहुत ही खूबसूरती से पेश किया जा रहा है पर वास्तविकता यह है कि केवल उन्हीं को नौकरियां मिल रही हैं, जो तृणमूल कांग्रेस के करीब हैं.

सीपीएम नेता सुजॉन चक्रवर्ती कहते हैं, 'सिंडीकेट राज की मनमानी इस स्तर पर बढ़ गई है कि मुख्यमंत्री ने राजनीतिक स्तर पर हस्तक्षेप करने का फैसला किया है. और जिन्हें रोजगार बैंक के तहत नौकरियां मिल रही हैं, वे सभी तृणमूल के समर्थक हैं. सरकार आमजन के हित में कुछ सार्थक करने में विफल रही है.'

First published: 10 August 2016, 7:33 IST
 
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