Home » इंडिया » We don't hit even animals the way they beat up my father: Alwar victim's son
 

हम जानवरों को भी इस तरह नहीं पीटते, जैसे उन्होंने मेरे पिता को मारा

आकाश बिष्ट | Updated on: 7 April 2017, 8:57 IST

 

हरियाणा में नूह जिले के जयसिंहपुर गांव के यूनूस खान अब तक नहीं समझ पाए हैं कि वे गौरक्षकों के कोप से कैसे बच गए. इन गौरक्षकों ने उनके गांव के पांच लोगों को बेरहमी से पीटा. तब वे भी उनके साथ थे. ये पांच लोग जयपुर के पशु मेले से गाय खरीद कर लौट रहे थे. उनके पास इसके वैध दस्तावेज भी थे. उन पीड़ितों में 61 साल के एक बुजुर्ग भी थे. उन्होंने एक गाय और एक भैंस खरीदी थी. वे उन दो सवारियों के पीछे चल रहे थे, जिन्हें विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के गौरक्षकों ने जबरन रोका और हमला किया.



‘आपने देखा, वे किस तरह इन युवाओं को पीट रहे थे? जब वे पहलू को दफनाने घर लौटे, उनके परिवारवालों ने पहचाना तक नहीं. क्या आपका धर्म यही सिखाता है? शुक्रिया अल्लाह का कि खैरियत से घर लौट आया. मैं उस दर्द की कल्पना तक नहीं कर सकता, जिससे पहलू का परिवार गुजर रहा है. क्या गाय खरीदने का यह दंड है? मैं शायद अब कभी गाय नहीं खरीद सकूंगा,’ कहते हुए यूनूस की आंखें भर आई थीं, जिस पर वह काबू पाने की कोशिश कर रहे थे.

 

यूनूस अब तक उस घटना से उबर नहीं पाए हैं, जो शनिवार को घटी थी. गौरक्षकों ने दो सवारियों पर हमला किया और बेरहमी से गायों के मालिकों को मारा, जबकि वे उन्हें वैध तरीके से ले जा रहे थे. उन्होंने वैध दस्तावेज भी दिखाए, पर उन्होंने एक नहीं सुनी. दस्तावेजों को फाड़ फेंका और लाठियों से पीटने लगे. पांचों बेहोश हो गए थे. उन्हें तब तक नहीं छोड़ा जब तक पुलिस नहीं आ गई. तीन दिन बाद 55 साल के पहलू खान की मौत हो गई.


पहलू के दो बेटों को भी पीटा गया. उन्होंने बताया कि उनके पिता की तीन पसलियां टूट गई थीं और सिर में फ्रेक्चर हो गया था. दुख इसका था कि मरने से पहले वे उनसे मिल भी नहीं सके. ‘जब वे इमर्जेंसी में थे, हमें दूसरे कमरों में रखा गया, हम मरने से पहले अपने अब्बा से मिल भी नहीं सके,’ 22 साल के इरशाद ने कहा, जिसकी बाईं आंख में अब भी गहरा लाल थक्का था.


इरशाद ने बताया कि वे अपने पिता और दो भाइयों के साथ भैंसे खरीदने मेले में गए थे. भैंसें बहुत महंगी थीं इसलिए बछड़ों के साथ दो गाएं खरीदना तय किया. बछड़े सिर्फ तीन दिन के थे. इरशाद ने आगे कहा, ‘भला कौन इतने छोटे बछड़ों के साथ महंगी गाएं मारने के मकसद से खरीदता है. इसके लिए लोग बूढ़ी, सस्ती गाएं खरीदते हैं ना कि हमारी जैसी महंगी.’


एक दिन पहले ही उनके पिता को दफनाया गया था. इरशाद इस दुख से उबर नहीं पा रहे थे. कहते हैं, ‘इस तरह तो हम जानवरों को भी नहीं पीटते, जिस तरह उन्होंने मेरे 55 साल के पिता को मारा. जब वे हमें मारते-मारते थक गए, तो जिंदा जलाना चाहते थे. उनमें से एक ने वाहन से डीजल निकालने और हमें और हमारे वाहनों को जलाने को कहा. हमारा क्या कसूर था? हम सरकारी पशु मेले में गाएं खरीदने गए थे. सरकार हमारी रक्षा नहीं कर सकती, तो ऐसे मेलों पर रोक क्यों नहीं लगा देती?’

 

दुधारू किसान


इरशाद ने आगे कहा कि वे गौरक्षक नहीं थे, समाज के दुश्मन थे, जो गायों की रक्षा के नाम पर हमें लूटना चाहते थे. इन कथित गौरक्षकों ने सबसे पहले हमारी जेबें तलाशीं और 75 हजार रुपए निकाल लिए. पूरा गांव मानता है कि जब से भाजपा की एनडीए सरकार सत्ता में आई है, ये गुंडे गौ रक्षा के नाम पर लोगों पर हमला करने से नहीं थकते, खासकर मुसलमानों पर. ‘उन्हें बस भगवा कपड़े पहन कर लोगों को पीटना है और कभी जानें लेनी है. फिर उनका पैसा और पशु छीन लेना है,’ इरशाद जयसिंहपुर में अपने मामूली मकान में बैठे थे.


जिला मुख्यालय से महज 15 किलोमीटर दूर जयसिंहपुर मुस्लिम बहुल गांव है. यहां के ज्यादातर लोग दूध बेचकर अपना निर्वाह करते हैं. संपन्न लोग भैंसे खरीदते हैं, जबकि गरीब अपनी आजीविका के लिए गाय के दूध पर निर्भर हैं. दरअसल यहां लोग दिल्ली तक से अपनी डेयरी के लिए गाएं खरीदने आते हैं, क्योंकि ये ग्रामीण अपने पशुओं की अच्छी देखभाल करते हैं. उनकी गायों को कोई तकलीफ नहीं हो, इसके लिए यूनूस ने पंखे लगा रखे हैं और अच्छा चारा खिलाते हैं. उन्होंने गर्व से कहा कि उनकी गाएं रोजना 14 से 15 लीटर दूध देती हैं.

 

बुधवार के दिन यूनूस ने दिल्ली में डेयरी चलाने वाले एक हिंदू को गाय और बछड़ा 45 हजार में बेचा. वे चिंतित थे कि कहीं उसकी गाय को कोई तकलीफ नहीं हो. जब उसी गांव में रहने वाले एक शख्स ने दिलासा दी कि गाय के साथ कुछ बुरा नहीं होगा, तब यूनूस ने कहा, ‘उम्मीद करता हूं, उसके साथ कुछ बुरा नहीं होगा.’

 

 

दोयम दर्जे के नागरिक


यूनूस ने कहा, ‘हम दोयम दर्जे के नागरिक हैं. इन गौरक्षकों के हाथों दस पहलू और मर जाएं, तो भी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी. बेहतर तो यही है कि हम गाएं खरीदना बंद कर दें क्योंकि इंसान के जीवन की कद्र नहीं है.’ यूनूस की इस बात से पहलू के घर इकट्ठा हुए सभी ग्रामीण सहमत थे.


पूरा गांव प्रशासन और सरकार के खिलाफ कुछ नहीं कहना चाहता क्योंकि डर है कि इससे उनका केस कमजोर नहीं हो जाए. फिर भी वे मानते हैं कि उन्हें न्याय मिलेगा और यदि कहीं और से मदद नहीं मिली, तो कोर्ट से जरूर मिलेगी. पहलू का बड़ा बेटा आरिफ भी अपने पिता के साथ था. उसने कहा, ‘हम भारतीय संविधान और कोर्ट में यकीन करते हैं. यदि कोर्ट यह मानता है कि जो हुआ सही था, तो हम भी उसे मान लेंगे. आखिर हम और क्या कर सकते हैं?’


दिलचस्प यह है कि जिस वाहन में पहलू थे, उसका ड्राइवर हिंदू था, और उन्हें गौरक्षकों ने छोड़ दिया. आरिफ ने बताया कि उन्होंने कहा कि हिंदू को जाने दो, पर इन मुसलमानों को मत छोड़ना, उन्हें सबक सिखाना चाहिए. पहलू के घर पर मौजूद बुजुर्गों के मुताबिक देश में अस्थिरता के हालात हैं और सरकार को सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि ऐसे तत्वों को प्रोत्साहन नहीं मिले.


उनमें से एक बुजुर्ग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘सबका साथ सबका विश्वास’ की बात करते हैं, पर उनकी सरकार ऐसा नहीं कर पाई. ‘क्या यही साथ है’, जिसके बारे में प्रधानमंत्री बात करते हैं? यदि मासूमों को इस तरह मारा जाएगा, तो क्या हमारा विकास होगा? ऐसे तत्वों को प्रोत्साहित करके सरकार एक विशेष समुदाय को पराया कर रही है, जो राष्ट्र के हित में नहीं है.

 

 

नहीं पालेंगे गाय  

 

पहलू के घर से मुश्किल से 500 मीटर की दूरी पर अजमत खान अपने परिवार के साथ रहते हैं. जब हमला हुआ, अजमत उसी सवारी में थे, जिसमें पहलू थे. उन्हें भी बेरहमी से पीटा गया था. वे अपने बहुत ही मामूली घर के बरामदे में खाट पर लेटे हुए थे. उनकी दाईं आंख में गहरा लाल थक्का था, गाल की हड्डियां सूज रही थीं, पीठ में नीचे की तरफ तेज दर्द के कारण वे हिल नहीं पा रहे थे. उनकी बीवी ने बताया कि जब से ये अस्पताल से लौटे हैं, उनकी दो साल की बेटी उन्हें देख-देख कर रो रही है.


‘शुरू में तो वह उन्हें पहचान भी नहीं सकी. उनके भाई भी नहीं पहचान सके क्योंकि उनका चेहरा बुरी तरह सूजा हुआ था. जब से बेटी को पता चला है कि ये उसके अब्बा हैं, वह उनके पास जाने से डर रही है, इससे उन्हें और भी दुख हो रहा है,’ कहते हुए अजमत की बीवी के आंसू गालों पर ढुलक आए. अजमत उन्हें ढाढ़स देते हैं और कहते हैं, ‘मैंने कुछ गलत किया है, तो मुझे फांसी दे दी जाए. उन्होंने पहलू की हत्या की है, उन्हें फांसी पर चढ़ा देना चाहिए. वे मेरे लिए पिता समान थे. कुछ भी हो, उन्हें अल्लाह को जवाब देना होगा और वही न्याय दिलाएगा.’


उन्होंने अपनी बात यहीं खत्म नहीं की. गांव के सभी मुसलमानों को गाएं पालने के लिए मना किया. यहां तक कि उनका दूध पीने और बेचने के लिए भी मना किया. ‘देखते हैं फिर क्या होता है.’ किस तरह ये कथित गौरक्षक जयपुर की गौशालाओं में गायों की देखभाल करते हैं. वे आगे कहते हैं, ‘मैंने देखा है, किस तरह मरी हुई गायों को ट्रक में भरकर गौशाला से ले जाया जा रहा था. और ये ही गायों के बारे में उपदेश देते हैं. उन्हें हमारे गांव आकर देखना चाहिए कि हम अपने पशु्ओं की किस तरह देखभाल करते हैं.’

 

अजमत ने संकल्प लिया है कि वे कभी गाय नहीं खरीदेंगे और पशु मेले में भी नहीं जाएंगे. उन्होंने कहा कि हमारे इन मेलों में जो विदेशी आते हैं, उन्हें बताया जाना चाहिए कि भारत में दरअसल क्या हो रहा है. उन्होंने यह कहते हुए अपनी बात खत्म की कि, ‘आयोजकों से लेकर पुलिस और प्रशासन तक, सबको गाय खरीदने के बाद पैसा देना पड़ता है, फिर भी ऐसा अत्याचार. एक और पहलू इन फर्जी गौरक्षकों के हाथों मारा जाए, उससे पहले हमें इन सब मेलों पर रोक लगा देनी चाहिए.’


इस बीच पुलिस ने दावा किया कि उसने 10 लोगों को गिरफ्तार किया है और आईपीसी सेक्शन 143 (गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने), 323 (जानबूझकर नुकसान पहुंचाने, 341 (गलत रोकने), 147(संपत्ति का नुकसान), 308 (गैर इरादतन हत्या)और 379 (चोरी) के तहत गौरक्षकों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की है. पहलू खान की मौत के बाद सेक्शन 302 (हत्या) भी जोड़ा गया.

First published: 7 April 2017, 8:57 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी