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मीडिया रिव्यूः 'आप की गुगली, पिच पर जेटली'

जितेंद्र कुमार | Updated on: 10 February 2017, 1:47 IST
QUICK PILL
  • बीते सप्ताह के दरम्यान प्रमुख हिंदी अखबारों में छाई रही खबरों और गतिविधियों की साप्ताहिक समीक्षा का कॉलम.
  • बीते हफ़्ते दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सचिवालय में सीबीआई का छापा, वित्त मंत्री अरुण जेटली पर भ्रष्टाचार का आरोप, जापानी प्रधानमंत्री शिंजो अबे की भारत यात्रा और शकूर बस्ती की झुग्गियों को गिराने के मुद्दे छाये रहे.

इस हफ्ते सभी अखबारों में अरविंद केजरीवाल के दफ्तर पर सीबीआई के छापे और सुप्रीम कोर्ट द्वारा दो हजार या उससे अधिक सीसी वाली डीजल इंजन पर रोक लगाने का फैसला सभी अखबारों में प्रमुखता से छपा.

लेकिन दैनिक जागरण पांच दिन तक इन खबरों पर सरकार के साथ दिखा. अखबार ने कांग्रेस सहित सभी विपक्षी खेमों की जमकर आलोचना की. दिल्ली के मुख्यमंत्री के लिए अखबार केजरी शब्द का इस्तेमाल करता है.

रविवार को लगभग सभी अखबारों ने प्रधानमंत्री मोदी और अबे के बीच हुए समझौते को प्रमुखता से छापा है. वैसे ज्यादातर अखबारों ने बुलेट ट्रेन परियोजना को प्राथमिकता दी तो कुछ ने परमाणु समझौते को भी अहमियत दी.

पढ़ेंः कांग्रेस, राहुल गांधी और सलमान खान के नाम रहा हफ़्ता

अमर उजाला ने ‘हाईस्पीड ट्रैक पर भारत-जापान’ शीर्षक से लीड के साथ बगल में ‘ऐतिहासिक असैन्य परमाणु करार’ शीर्षक से सबहेडिंग भी लगाई. नवभारत टाइम्स ने ‘एटमी रिश्तों से बुलेट सी तेजी’ से दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच हुए समझौते को पहली खबर बनाया.

हिन्दुस्तान ‘जापान की मदद से दौड़ेगी बुलेट ट्रेन’ शीर्षक से वही खबर छापी है. अखबार ने ‘पेरिस में जलवायु करार पर 195 देशों की मुहर’ शीर्षक से जलवायु परिवर्तन पर हुए समझौते को प्रमुखता दी है.

जनसत्ता अखबार का शीर्षक है “मोदी अबे ने चलाई दोस्ती की बुलेट ट्रेन” इसके साथ ही उसी खबर के साथ ‘अब रास्ता साफ हुआ जापानी हथियारों की खरीद का’. एक दूसरी खबर भी छापी है.

पीटीआई भाषा के हवाले से इस खबर में बताया गया है कि अब दोनों देश मिलकर सुरक्षा सहयोग में निर्णायक भूमिका निभाएगें. जागरण ने भी उससे मिलती जुलती खबर लगाई है जिसमें कहा गया है कि बुलेट ट्रेन चलाने के लिए जापान से 80 हजार करोड़ रुपए का कर्ज मिलेगा.

लेकिन सबसे मजेदार जागरण के “सवालों में शेष विपक्ष” के नाम से लिखा संपादकीय है. संपादकीय की शुरुआत इन शब्दों से हुई है-‘संसद ठप्प करने पर आमदा कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की इस सफाई का कहीं कोई मूल्य महत्व नहीं है कि नेशनल हेरल्ड मसले और जीएसटी के बीच कहीं कोई संबध नहीं है.’

एनबीटी ने ‘बुलेट की रफ्तार’ से दोनों प्रधानमंत्री के बीच हुए बुलेट ट्रेन समझौते के औचित्य पर सवाल खड़ा किया है

अखबार ने आगे लिखा है कांग्रेस इस विधेयक को लेकर ऐसा जाहिर कर रही है जैसे शासन चलाने और विधेयक तैयार करने का अधिकार केवल उसके पास ही है.

कहने का लब्बोलुआब यह है कि कांग्रेस के विरोध पर चुप्पी साधकर शेष विपक्ष इस लायक नहीं रहा कि उस पर राष्ट्रहित के परवाह का भरोसा किया जा सके. संपादकीय के बगल में अखबार के मालिक संजय गुप्ता ‘असहयोग पर आमदा कांग्रेस’ शीर्षक से एक लेख भी लिखा है.

सोमवार को दैनिक हिन्दुस्तान को छोड़कर लगभग सभी अखबारों ने शकूर बस्ती में रेलवे द्वारा अतिक्रमण हटाए जाने की घटना को पहली खबर बनाया है, जबकि हिन्दुस्तान ने दस हजार नए ऑटो को लाइसेंस दिए जाने को पहली खबर बनाया है. नवभारत टाइम्स (नभाटा) ने ‘टूटी झुग्गी पर तैयार टकराव की नई दीवार’ से शीर्षक लगाया है.

नवभारत टाइम्स ने ‘बुलेट की रफ्तार’ से दोनों प्रधानमंत्री के बीच हुए बुलेट ट्रेन समझौते के औचित्य पर सवाल खड़ा किया है. संपादकीय में यह सवाल पूछा गया है कि अहमदाबाद मुंबई के बीच आज चलनेवाली गाड़ियों की सात घंटे की तुलना में यह ट्रेन अब दो घंटे में पंहुचेगी.

लेकिन हवाई यात्रा में सिर्फ 70 मिनट और 1700 रुपए का खर्च होगा और बुलेट ट्रेन में इसी सफर के लिए 2800 रुपए खर्च करने होंगे. अखबार का वाजिब सा सवाल है कि जब पैसे और समय दोनों ज्यादा लगने हैं तो इस ट्रेन पर 98 हजार करोड़ खर्च करने का औचित्य क्या है?

जोसेफ बर्नाड ने बताया है कि कैसे यूपीए सरकार के सात साल पुराने बिल को बीजेपी की राज्य सरकारों ने लटकाकर रखा

जनसत्ता ने ‘जापान के साथ’ शीर्षक से लिखे अपने संपादकीय में कुछ इस तरह का तर्क दिया है कि यह समझौता जापान ने भारत के हित को ध्यान में रखकर उसे खुश करने के लिए किया है. जिस तरह भारत का चीन के साथ संबध विकसित हो रहा है उससे जापान का हित कमजोर पड़ रहा था.

जबकि हकीकत यह है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री कार्यालय में ज्वाइंट सेक्रेटरी जावेद उस्मानी ने विस्तार से लिखकर बताया है कि 2005 से जापान यह परियोजना शुरू करना चाह रहा है लेकिन यह देशहित में नहीं है.

उस दिन दैनिक भास्कर ने आंकड़े जुटाकर एक छापी है जिसमें बताया गया है कि सरकार ने पिछले 18 महीने में पेट्रोल पर सौ फीसदी और डीजल पर 200 फीसदी की कमाई की है. अखबार का तो आकलन यहां तक था कि अगर सरकार अतिरिक्त मुनाफा कमाने से पीछे नहीं हटती है तो चार रूपए तक सस्ता हो सकता है पेट्रोल.

भास्कर ने पहले पेज पर एक और खबर छापी है जिसमें आकलन किया गया है कि सम-विषम नंबर होने से दिल्ली की सड़कों पर हर दिन दस लाख गाड़ियां कम हो जाएंगी और प्रदूषण कम हो सकता है.

पढ़ेंः संसद, चेन्नई बाढ़ और जलवायु परिवर्तन रहे चर्चा में

एनबीटी ने देश-विदेश पेज पर जीएसटी को लेकर एक खबर छापी है जिसमें कहा गया है कि सरकार ने कांग्रेस को विश्वास में ही नहीं लिया. जोसेफ बर्नाड अपनी खबर में बताते हैं कि कैसे यूपीए सरकार के सात साल पुराने बिल को बीजेपी की राज्य सरकारों ने लटकाकर रखा लेकिन मोदी सरकार ने सोचा कि वह प्रेशर डालकर इस बिल को पास करवा लेगी. 

जबकि दैनिक जागरण ने ‘खोखले मुद्दों पर संसद ठप’ को लीड स्टोरी बनाया है. इस खबर की सबहेडिंग है ‘कार्यवाही से पूर्व राहुल ने लगाए दो आरोप, बाद में गलत साबित हुए.’

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान दौरे से लौटकर अपने अनुभव बताते हुए कहा उर्दू मेरे मुल्क की जुबान है

इससे भी आगे बढ़कर अखबार ने ‘दयनीय दशा’ कहते हुए संपादकीय लिखा है असम के बारपेटा मंदिर में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि आरएसएस ने उन्हें मंदिर में प्रवेश करने से रोका जबकि मंदिर के पुजारी ने इसका खंडन किया.

अखबार कांग्रेस और उसके नेतृत्व को चेताते हुए सूचित करता है कि चूंकि पार्टी आम जनता से पूरी तरह कट गई है इसलिए उसे समझ में ही नहीं आ रहा है कि जनता के बीच उसकी कितनी फजीहत हो रही है.

अखबार ने बीच के पेज पर ‘दोषी पुलिसकर्मियों को उम्र कैद’ शीर्षक से 15 वर्ष पहले की स्मिता भादुड़ी मुठभेड़ की घटना की खबर को छापा है. इसमें सीबीआई की कोर्ट ने इसे फर्जी मुठभेड़ माना और तीनों दोषियों को उम्र कैद की सजा सुनाई. वैसे इस खबर को सभी अखबारों ने कहीं न कहीं छापा है लेकिन कायदे से यह पहले पेज की खबर थी.

मंगलवार को ही हिन्दुस्तान ने बीच के पेज पर एक खबर छापी है जिसमें विदेश मंत्री सुषमा स्वराज पाकिस्तान दौरे से लौटकर अपने अनुभव बांटती हैं और बताती हैं कि उर्दू मेरे मुल्क की जुबान है. विदेश मंत्री का यह बयान काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि जिस रूप में भाषा का संप्रदायीकरण हुआ है, मंत्री का यह बयान काफी सुकून देता है.

बुधवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सचिवालय में सीबीआई के छापे को सभी अखबारों ने प्रमुखता से छापा है. जबकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2000 या उससे अधिक सीसी के डीजल वाहनों पर रोक लगाने के संकेत को भी सभी अखबारों ने पहले पेज पर जगह दी है. केजरीवाल के इस बयान को कि यह छापे जेटली को बचाने के लिए डलवाये गए थे, नवभारट टाइम्स ने दूसरे पेज पर छापा है.

एनबीटी ने लिखा है महानगरों की झोपड़पट्टियां अवैध हैं लेकिन सवाल ये है कि उनमें रहनेवाले लोग जाएं कहां?

दैनिक जागरण ने ‘छापेमारी पर बेतुके बोल’ शीर्षक से संपादकीय लिखकर सरकार का बचाव किया है. इसके विपरीत नवभारत टाइम्स ने ‘फेडरलिज्म के बुरे दिन’ नाम से संपादकीय लिखकर बताया कि यह छापेमारी किस तरह संवैधानिक संस्थाओं की साख को गर्त में पंहुचा सकता है.

जबकि हिन्दुस्तान ने ‘विवाद का छापा’ शीर्षक से संपादकीय लिखा है और बताया है कि केन्द्र और दिल्ली सरकार के बीच कड़वाहट का एक नया अध्याय शुरु हो गया है, जिसका अंत फिलहाल नजर नहीं आ रहा है. अखबार ने सीबीआई के पूर्व प्रमुख अरुण भगत का एक लेख भी छापा है जिसमें कहा गया है कि सीबीआई रूपी पिंजड़े के तोते को आजाद को करना ही होगा.

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंहगी डीजल वाहनों पर लगाए गए रोक को सभी अखबारों ने पहले पेज पर और संभवतः पहली खबर बनाया है. सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले पर हिन्दुस्तान ने ‘साफ हवा के लिए’ शीर्षक से संपादकीय भी लिखा है. जबकि नवभारत टाइम्स ने ‘झुग्गी बस्तियों का आखिर क्या करें’ शीर्षक से एक लेख लिखा है. इसमें बताया गया है कि महानगरों में छाई झोपड़पट्टियां अवैध हैं लेकिन असली सवाल यह है कि उनमें रहनेवाले लोग जाएं कहां?

जनसत्ता ने ‘सीबीआई के छापे पर जांच की आंच’ नाम से संपादकीय लिखकर बताया है कि इस छापामारी का कोई औचित्य नहीं है क्योंकि इससे केन्द्र और राज्य के बीच टकराहट ही बढ़ेगी.

केजरीवाल और जेटली के आरोप-प्रत्यारोप मामले में सबसे मजेदार शीर्षक जनसत्ता ने ‘आप की गुगली, पिच पर जेटली’ लगाया

दैनिक भास्कर ने डीजल-पेट्रोल के दाम को बहुत कम घटाए जाने की खबर को लीड बनाया है और बताया है कि सरकार ड्यूटी टैक्स बढ़ाकर उपभोक्ता से छठी बार लाभ छीना है. जागरण ने ‘हर दिन नया बहाना’ शीर्षक से कांग्रेस पर निशाना साधा है और पार्टी और नेतृत्व को जबरदस्त लताड़ लगाई है.

अगले दिन सभी अखबारों ने केजरीवाल और जेटली के आरोप-प्रत्यारोप को प्रमुखता से छापा है. हिन्दुस्तान ने अरुण जेटली के हवाले से कहा है कि ‘आप’ दागी को बचा रही है जबकि केजरीवाल ने अपनी बात को दुहराते हुए कहा है कि जेटली के खिलाफ गंभीर आरोप हैं इसलिए उन्हें इस्तीफा देना चाहिए.

नवभारत टाइम्स ने भरत झुनझुवाला का एक लेख छापा है जिसमें वह तर्क देते हैं कि विकसित अर्थव्यवस्था का कमजोर होना भारत के लिए शुभ संकेत है.

सबसे मजेदार शीर्षक जनसत्ता ने ‘आप की गुगली, पिच पर जेटली’ लगाया है. अखबार ने स्वास्थ्य, समाज और सरकार नाम से संपादकीय पेज पर लेख छापा है जिसमें सरकार को स्वास्थ्य मद पर खर्च बढ़ाने की बात कही है.

First published: 20 December 2015, 7:40 IST
 
जितेंद्र कुमार @catchhindi

पेशे से पत्रकार हैं लेकिन ख्वाहिश फणीश्वरनाथ रेणु वाली है- उपन्यास लिखते हुए खेतीबाड़ी करें. वैसे शौकिया खाना और बात दोनों बनाते हैं.

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