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पश्चिम बंगाल उपचुनाव: भाजपा और मुख्य चुनाव आयोग में ठनी

सुलग्ना सेनगुप्ता | Updated on: 11 February 2017, 5:47 IST
QUICK PILL
  • पश्चिम बंगाल के तमलुक लोकसभा क्षेत्र, कूच बिहार लोकसभा क्षेत्र और मोंटेश्वर विधानसभा सीट पर 19 नवम्बर को उपचुनाव होने हैं.
  • मगर पोलिंग बूथों की सुरक्षा को लेकर भाजपा मुख्य चुनाव आयोग की तैयारियों से ख़ुश नहीं है. उसने सभी बूथों पर केंद्रीय बल तैनात करने की मांग की है.

पश्चिम बंगाल बीजेपी और सूबे के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के बीच खींचतान बढ़ती जा रही है. यह लड़ाई खुलकर उस वक्त सामने आ गई, जब सीईओ ने आगामी उपचुनावों में केवल संवेदनशील बूथों पर केंद्रीय बल तैनात करने का फैसला सुनाया. तमलुक लोकसभा क्षेत्र, कूच बिहार लोकसभा क्षेत्र और मोंटेश्वर विधानसभा सीट पर 19 नवम्बर को उपचुनाव होने हैं.

वहीं भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई ने 43,000 पोलिंग बूथों पर केंद्रीय बल की तैनाती की मांग की है. दूसरी तरफ़ सीईओ ऑफिस का कहना था कि चुनाव आयोग उपचुनाव के लिए केंद्रीय बलों की 29 कम्पनियां भेज रहा है और उन्हें कम से कम 2000 संवेदनशील पोलिंग बूथों पर तैनात किया जाएगा. 

प्रदेश बीजेपी के अनुसार, सभी बूथों पर केंद्रीय बल तैनात करने की जरूरत है, क्योंकि ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार द्वारा नोटबंदी के बाद सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस वोट पाने के लिए पूरी जोर आजमाइश करेगी. बीजेपी प्रवक्ता जयप्रकाश मजूमदार ने कहा, पार्टी नेताओं ने मंगलवार को सीईओ सुनील गुप्ता से मुलाकात की और उनसे सारे पोलिंग बूथों पर केंद्रीय बल तैनात करने की मांग की. साथ ही पार्टी ने इस संबंध में एक ज्ञापन भी दिया, क्योंकि उसे लगता है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था के हालात अच्छे नहीं हैं. 

सीईओ गुप्ता ने कहा, हमें केंद्रीय बल की तैनाती को लेकर बीजेपी का पत्र मिल चुका है और हमने चुनाव आयोग को इस बात से अवगत करवा दिया है. सीईओ और चुनाव आयोग के बीच हाल ही हुई वीडियो कॉन्फ्रेंस में तय किया गया कि संवेदनशील पोलिंग बूथों पर केंद्रीय बल की तैनाती के अलावा सीसीटीवी से भी निगरानी रखी जाएगी और मतदान के दौरान कैमरा लगे वाहन गश्त करेंगे.

उपचुनावों की अहमियत

इन चुनावों की अहमियत इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले के बाद देश में होने वाले ये पहले चुनाव हैं. टीएमसी ने प्रदेश भर में नोटबंदी की मुख़ालिफत वाले होर्डिंग्स व बैनर लगा दिए हैं. जाहिर है इन उपचुनावों में बीजेपी ही इसकी मुख्य प्रतिद्वंदी है. 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह उपचुनाव असल में बीजेपी के नोटबंदी के कदम के निर्णायक साबित होंगे और तय करेंगे कि बीजेपी को इससे कितना फायदा हुआ और आम जनता पर इस 'जरूरी दंड' का कितना दुष्प्रभाव पड़ा. अगर पार्टी को मिला मत प्रतिशत बढ़ता है तो जाहिर है नोटबंदी का कदम बीजेपी के पक्ष में माना जाएगा.

राजनीतिक विश्लेषक प्रोफेसर अमोल मुखर्जी ने कहा, 'बीजेपी को पहले ही गड़बड़ियों की आशंका है और इसीलिए वह सारे पोलिंग बूथों पर केंद्रीय बल तैनात करने की मांग कर रही है और अब देखना यह है कि टीएमसी अपना वोट बैंक बचा पाती है कि नहीं.'

First published: 19 November 2016, 7:40 IST
 
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