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ममता बनाम CBI : SC का आदेश- CBI के सामने पेश हो राजीव कुमार, नहीं होगी गिरफ्तारी

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 February 2019, 11:36 IST

ममता सरकार और सीबीआई के बीच चल रहे विवाद को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आदेश दिया कि कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार सीबीआई की जांच में सहयोग करें. सुनवाई के दौरान सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार ने सारदा जांच से जुड़े सबूतों के साथ छेड़छाड़ की थी. सीबीआई ने कहा कि मामले की जांच से सम्बंधित कॉल डाटा के साथ छेड़छाड़ की गई और सारदा समूह के मालिक सुदीप्तो सेन फोन और कंप्यूटर से डेटा मिटाया गया.

ममता की ओर से कोर्ट में पेश वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि बंगाल में मोदी की रैली के दो दिन बाद सीबीआई ने यह कार्रवाई की. उन्होंने बताया कि सीबीआई अफसरों न तो गिरफ्तार किया गया न ही उन्हें हिरासत में लिया गया. सिंघवी में इस दौरान वीडियो एविडेन्स भी पेश किये. सिंघवी ने कहा कि राजीव कुमार के खिलाफ कोई एफआईआर नहीं है. 

इसके बाद सीजेआई रंजन गोगोई ने राजीव कुमार को जांच में सहयोग करने को कहा. सीजीआई ने कहा कि राजीव कुमार सीबीआई के सामने पेश और उनकी कोई गिरफ़्तारी नहीं होगी. अब 20 फरवरी को इस मामले की अगली सवाई होगी और राजीव कुमार को पेश होने को कहा गया है. 

सारदा समूह की स्थापना 2000 के शुरुआती दिनों में व्यापारी सुदीप्तो सेन ने की थी. इसने छोटे निवेशकों का दोहन करने के लिए कंपनियों के एक संघ का इस्तेमाल किया, जिससे उन्हें बहुत अधिक लाभ मिला. क्लासिक पोंजी योजना की तरह, एजेंटों के एक विस्तृत नेटवर्क के माध्यम से धन एकत्र किया गया था, जिन्हें 25% से अधिक कमीशन दिया गया था.

कुछ वर्षों में सारदा ने लगभग 2,500 करोड़ रुपये जुटाए. 2013 में योजना के बंद होने के बाद, ममता ने मामले की जांच के लिए एक एसआईटी का गठन किया - जिसका नेतृत्व राजीव कुमार कर रहे थे - जबकि सीबीआई और ईडी ने अपनी जांच की. मई 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने कथित घोटाले को CBI को स्थानांतरित कर दिया.

First published: 5 February 2019, 11:12 IST
 
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