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मोदी के हालिया विदेश दौरे से क्या हासिल हुआ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 June 2016, 9:01 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार कोे मात्र छह दिनों में पांच देशों की यात्रा से वापस स्वदेश लौटते ही ट्विटर पर मौजूद उनके प्रशंसकों में उनकी यात्रा की सफलता प्रचारित करने को लेकर होड़ मच गई, विशेषकर अमेरिका की यात्रा को.

मोदी को मिसाइल टेक्नोलाॅजी कंट्रोल रेजीम (एमटीसीआर) में भारत के शामिल होने का श्रेय देते हुए उन्हें ‘वैश्विक नेता’ और ‘सच्चा राजनेता’ जैसे तमगों से भी नवाजा गया.

स्विटजरलैंड और मेक्सिको द्वारा परमाणु आपूर्तिकता समूह (एनएसजी) मेें भारत की उम्मदवारी का समर्थन करने की घोषणा के लिये भी मोदी के कूटनीतिक कौशल को ही एकमात्र कारण माना गया.

एक ट्वीट कहता है, ‘‘आखिरकार दुनिया को एक नेता मिल ही गया. वह एक भारतीय हैं. याद रखिये वह एक राजनेता नहीं बल्कि एक सच्चे राजनेता हैं...’’

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अमेरिकी कांग्रेसियों के बीच उनके हस्ताक्षर लेने के लिये मची होड़ की तस्वीरों को भी मोदी की लोकप्रियता साबित करने के लिये प्रयोग किया गया. इससे भी एक कदम आगे जाते हुए सोशल मीडिया पर उनके कुछ समर्थकों ने तो अमेरिकी कांग्रेस में उनके संबोधन के दौरान 9 बार खड़े होकर किये गए अभिवादन और 64 बार बजी तालियों की तुलना 1893 में स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक संबोधन तक से कर डाली.

नरेंद्र मोदी अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करने वाले छठे भारतीय प्रधानमंत्री हैं

जिस तरीके से मोदी भारत को इतिहास में अमेरिका के सबसे नजदीक लाए हैं वह उनके लिये जश्न मनाने का अवसर है. अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करने वाले छठे भारतीय प्रधानमंत्री बने मोदी ने भारत-अमेरिका के परवान चढ़ रहे संबंधों, आतंकवाद और योग पर खुलकर बात की. संभवतः यह जल्द ही निवर्तमान हो रहे अमेरिकी राष्ट्रपति और ‘‘उनके मित्र’’ बराक ओबामा के बीच अंतिम मुलाकात थी.

एक तरफ जहां समूचा मीडिया और उनके प्रशंसक प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा को लेकर बेहद उत्साहित हो रहे हैं आईये हम आपको इस यात्रा की कुछ प्रमुख उपलब्धियों से रूबरू करवाते हैं:

  • भारत और अमेरिका के बीच 20 मिलियन अमेरिकी डाॅलर की क्लीन एनर्जी फाइनेंस पर पहल हुई.
  • 40 मिलियन अमेरिकी डाॅलर का यूएस-इंडिया कैटालिटिक सोलर फाइनेंस कार्यक्रम.
  • भारत को अमेरिका के एक ‘प्रमुख रक्षा साझीदार’ के रूप में मान्यता.
  • एयरक्राफ्ट कैरियर टैक्नोलाॅजी को आॅपरेशन पर संयुक्त कार्य समूह के अंतर्गत एक इन्फाॅर्मेशन एक्सजेंच एनेक्स के मसौदे को अंतिम रूप देना.

इतने हो-हल्ले के बावजूद आलोचक प्रधानमंत्री की इस यात्रा को निराशाजनक ही मानते हुए कहते हैं कि इस यात्रा में कुछ ठोस नहीं हुआ है और सिर्फ एक गणेश प्रतिमा सहित 13 प्राचीन कलाकृतियों का वापस भारत आना एकमात्र उपलब्धि है.

आलोचकों का पलटवार

हालांकि आलाचकों के बीच विवाद का मुख्य बिंदु ‘प्रमुख रक्षा साझीदार’ के तमगे को लेकर चहुंओर फैला शोर है. उनका कहना है कि इसका मतलब न तो ‘‘अनुकूल मूल्य निर्धारण’’ है और न ही ‘‘प्रौद्योगिकी का मुक्त प्रवाह’’ है.

आलोचकों का मानना है कि शायद यह सब अमेरिका की आंखों में धूल झोंकने की साजिश हो जैसा कि अमेरिका पर पूर्व में भी ऐसे साझीदारों के साथ करने के आरोप लगते आए हैं.

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इसके अलावा आलोचक तर्क देते हैं कि राष्ट्रपति ओबामा द्वारा यूएनएससी, एनएसजी और एपेक में भारत की उम्मीदवारी का समर्थन करना किसी अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा पहली बार नहीं है.

यहां तक कि एमटीसीआर में भारत के प्रवेश को भी भारतीय और इतालवी सरकारों के बीच हुए एक सौदे के रूप में देखा जा रहा है, जहां इतालवी सरकार ने भारत सरकार द्वारा अपने मछुआरों की हत्या के आरोप में गिरफ्तार दो मरीन को रिहा करने के बाद अपनी आपत्ति को वापस ले लिया.

अमेरिका के अलावा प्रधानमंत्री की अफगानिस्तान, कतर, स्विट्जरलैंड और मेक्सिको की यात्राओं से भी कुछ सकारात्मक नतीजे निकलकर आए हैं.

फायदेमंद यात्राएं

मोदी ने अफगान राष्ट्रपति डाॅ. अशरफ गनी के साथ मिलकर 290 मिलियम डाॅलर के ‘‘अफगान-भारत मैत्री बांध’’ का शुभारंभ किया. हेरात प्रांत के चिश्ती शरीफ जिले में हरि नदी के किनारे बने इस बांध को पहले सलमा बांध के नाम से जाना जाता था. उनकी इस पहल को युद्ध की विभीषिका झेल रहे पड़ोसी के साथ संबंधों को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

अमेजन के संस्थापक और सीईओ जेफ बेजोस ने भारत में 3 बिलियन डाॅलर के निवेश की घोषणा की है

इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अफगानिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान- आमिर अमानुल्लाह खान अवार्ड से भी नवाजा गया.

लगातार सफर में रहने वाले प्रधानमंत्री का अगला पड़ाव था कतर, जहां उन्होंने व्यापार जगत के शीर्ष लोगों से मिलकर उन्हें आश्वासन दिया कि भारत में व्यापार करना अब पूर्व के वर्षों के मुकाबले बेहद सुगम हो गया है.

उनके इन आश्वासनों की परिणति कतर के आमिर के साथ सात समझौतों पर हस्ताक्षर के रूप में हुई जिसकेे इस अरब देश के साथ भविष्य में और मजबूत रिश्तों में बदलने की संभावना है.

कतर के बाद उन्होंने स्विटजरलैंड सरकार को एनएसजी में भारत के प्रवेश का समर्थन करने के लिये समझाने को जिनेवा की उड़ान भरी और सफल रहे.

मोदी ने कहा, ‘‘मैं द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग को और अधिक गहरा करने के लिये राष्ट्रपति श्नाइडर उम्मान्न के साथ वार्ता करूंगा.’’

इस मुलाकात के दौरान मोदी ने स्विस बैंकों में भारतीयों द्वारा जमा किये गए काले धन के मुद्दे को भी उठाया.

अमेरिका में भी प्रधानमंत्री मोदी उद्योग जगत के शीर्ष नेतृत्व से मिले और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को बढ़ाने पर जोर दिया. इसके बदले में अमेजन के संस्थापक और सीईओ जेफ बेजोस ने भारत में 3 बिलियन डाॅलर के निवेश की घोषणा की. अमेजन ने वर्ष 2014 में भी 2 बिलियन डाॅलर के निवेश का वायदा किया था.

भारत के एनएसजी के दावे के लिये मेक्सिको को अपने पक्ष में करने हेतु मोदी ने मेक्सिकन राष्ट्रपति एनरिक पेना नीटो के साथ मुलाकात और रात्रिभोज किया जिन्होंने इस विशिष्ट क्लब में भारत की दावेदारी का समर्थन किया.इस सबके बीच वापस काम पर लौटते हुए मोदी ने अपनी विदेश यात्राओं को लेकर फैले शोरगुल के बीच साउथ ब्लाॅक में तीन ‘‘महत्वपूर्ण बैठकों’’ की अध्यक्षता भी की.

First published: 12 June 2016, 9:01 IST
 
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