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क्या है 'शत्रु संपत्ति' और इसपर आपत्तियां क्या हैं?

चारू कार्तिकेय | Updated on: 12 May 2016, 8:56 IST

शत्रु संपत्ति विधेयक पर संसदीय पैनल के करीब एक चौथाई सदस्यों ने इसका विरोध किया. जब संसदीय सेलेक्ट कमेटी ने विधेयक पर अपनी रिपोर्ट जमा की तो छह सांसदों ने उसपर अपना नोट ऑफ डिसेंट (असहमति का नोट) दिया.

इन सांसदों के अनुसार मौजूदा विधेयक प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन करता है और इससे लाखों भारतीय नागरिक प्रताड़ित होंगे.

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असहमति दर्ज कराने वाले सांसद केसी त्यागी (जदयू), डी राजा (सीपीआई), जावेद अली खान (समाजवादी पार्टी) और कांग्रेस के रहमान ख़ान, पीएल पुनिया, हुसैन दलवाई हैं. इन सांसदों ने दावा किया कि इस विधेयक से संविधान के आर्टिकल 14, 19, 300A का उल्लंघन होगा.

क्या है शत्रु संपत्ति और इससे जुड़ा विधेयक?


जो लोग 1962, 1965 और 1971 के युद्ध के दौरान या उसके बाद चीन या पाकिस्तान चले गए थे, भारत में मौजूद उनकी संपत्ति को शत्रु संपत्ति कहते हैं.

मूलतः सरकार ने इन संपत्तियों को डिफेंस इंडिया रूल्स एंड द डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट 1962 के तहत अपने नियंत्रण में लिया था. इसकी निगरानी की जिम्मेदारी कस्टोडियन ऑफ एनमी प्रापर्ट फॉर इंडिया (सीईपीआई) के सौंपी गई.

1968 में शत्रु संपत्ति अधिनियम का लागू किया गया. इसका मकसद शत्रु संपत्तियों का नियमन और इनके कस्टोडियन के अधिकारों को निर्धारित करना था.

कितनी संपत्ति है?


भारत के कई राज्यों में शत्रु संपत्तियां हैं. इनमें चल और अचल दोनों तरह की संपत्तियां हैं. माना जाता है कि अचल शत्रु संपत्त करीब एक लाख करोड़ रुपये की है. वहीं चल संपत्ति करीब तीन हजर करोड़ रुपये की है.

नए कानून का मकसद?


शुुरुआत दशकों में शत्रु संपत्ति पर कस्टोडियन का स्वाभाविक अधिकार रहा. लेकिन पिछले कुछ सालों से इससे जुड़े कई विवाद सामने आए हैं. भारतीय अदालतों में इन संपत्तियों पर दावा जताते हुए कई मुकदमें दर्ज हुए. अदालत के फैसलों से इनके मालिकाना अधिकार से जुड़े कई नई पहलू सामने आए.

युद्ध के दौरान या उसके बाद चीन या पाकिस्तान चले गए लोगों या संस्थाओं की जायदाद होती है शत्रु संपत्ति

इस वजह से पूराने कानून में बदलाव जरूरी हो गया था. तत्कालीन यूपीए सरकार ने जुलाई, 2010 में एनमी प्रॉपर्टी(अमेंडमेंट एंड वलिडेशन) बिल 2010 पेश किया. इसके जरिए एनमी प्रॉपर्टी एक्ट 1968 और पब्लिक प्रीमाइजेज(इविक्शन ऑफ अनॉथराइज्ड अक्यूपेंट्स) एक्ट, 1971 में संशोधन किया जाना था. बाद में इस विधेयक को वापस ले लिया गया और नवंबर, 2010 नया विधेयक पेश किया.

यूपीए के विधेयक का क्या हुआ?


यूपीए का 2010 का विधेयक 15वीं लोक सभा में रद्द हो गया. एनडीए सरकार ने जनवरी,2016 में नया अधिनियम पेश किया. 8 मार्च, 2016 को लोक सभा में एनमी प्रॉपर्टी (अमेंडमेट एंड वैलिडेशन) बिल 2016 पेश किया गया.

विपक्षी दलों के सांसदों ने बीजेपी सरकार के प्रस्तावित शत्रु संपत्ति विधेयक में 20 संशोधनों का सुझाव दिया है

इस विधेयक के अनुसार शत्रु संपत्ति पर कस्टोडियन को पूरा अधिकार देने का प्रस्ताव था, चाहे संपत्ति की मालिक 'शत्रु' व्यक्ति या संस्था भले ही अब मौजूद न हो.

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प्रस्तावित विधेयक के अनुसार शत्रु संपत्ति पर उत्तराधिकार का कानून लागू नहीं होगा. लोक सभा ने नौ मार्च को विधेयक पारित किया. उसके बाद इसे सेलेक्ट कमिटी के पास भेजा गया. कमिटी ने अपनी रिपोर्ट दे दी है. अब विधेयक राज्य सभा में पेश किया जाएगा.
   

असहमति दर्ज कराने वाले सासंदों की चिंता?


इन सांसदों के अनुसार प्रस्तावित विधेयक यूपीए सरकार के विधेयक के अनुरूप नहीं है. इन सांसदों का कहना है कि 1968 के अधिनियम के अनुसार शत्रु संपत्ति की कस्टडी अस्थायी थी. इन सांसदों के अनुसार 2010 का विधेयक काफी संतुलित था. इन सांसदों ने प्रस्तावित विधेयक में 20 संशोधनों का सुझाव दिया है. 

First published: 12 May 2016, 8:56 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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