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उत्तर प्रदेश: जिताऊ जातीय समीकरण की टोह में सपा

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 April 2016, 17:36 IST
QUICK PILL
  • यूपी में अगले साल होने वाले हैं विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी राजनीतिक दल कमर कस चुके हैं. विभिन्न दलों द्वारा प्रत्याशियों की घोषणा भी शुरू हो गयी है.
  • सत्ताधारी समाजवादी पार्टी ने 142 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है. पहली सूची से सपा के जातीय समीकरण के संकेत मिलने लगे हैं.

यूपी की राजनीतिक फिजां पर विधानसभा चुनाव 2017 का रंग चढ़ता ही जा रहा है. सभी राजनीतिक पार्टियों ने चुनाव जिताऊ प्रत्याशियों की तलाश शुरू कर दी है.

जाति और सामाजिक समीकरण का ध्यान सभी पार्टियां रख रही हैं. सभी दल प्रचार के तौर-तरीके और फंड को लेकर कमर कस चुके हैं.

आगामी चुनाव को देखते हुए समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, कांग्रेस, बीजेपी और राष्ट्रीय लोकदल ने अपना-अपना दावा ठोंकना शुरू कर दिया है.

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इनके अलावा अपना दल, पीस पार्टी और एआईएमआईएम भी अपनी-अपनी दावेदारी पेश करने की कोशिश कर रही हैं.

राज्य के सत्ताधारी दल सपा ने 142 प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं. सपा पिछले विधान सभा चुनाव में जिन सीटों पर हारी थी उनमें से एक तिहाई के लिए प्रत्याशी घोषित किए जा चुके हैं.

सपा ने अभी तक सबसे ज्यादा मुसलमानों को टिकट दिया है यानी वो अपने परंपरागत वोट बैंक पर भरोसा कर रही है

सपा ने 142 प्रत्याशियों की पहली सूची में नौ महिलाओं को टिकट दिया है. इससे ये अनुमान लगाया जा रहा है कि सपा की 402 प्रत्याशियों की सूची में महिलाओं की अच्छी संख्या रहेगी.

दूसरे कई राज्यों की तरह यूपी में भी पिछले चुनाव में महिला वोटरों की संख्या में बढ़ोतरी हुई थी. इसकी वजह से सभी दलों पर महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने का दबाव है.

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सपा के अब तक के टिकट बंटवारे से दूसरा संकेत ये मिल रहा है कि पार्टी अपने कई पुराने प्रत्याशियों को टिकट देकर एंटी-इनकमबेंसी के दबाव से मुक्त होना चाहती है. पहली लिस्ट में सपा ने 75 नए प्रत्याशियों को भी टिकट दिया है. यानी पार्टी नए और पुराने के बीच सामंजस्य बैठाने की कोशिश कर रही है.

पार्टी ने जिन 142 लोगों को अब तक टिकट दिया है उनमें 28 मुस्लिम, 22 दलित, 19 यादव, 15 क्षत्रिय, 11 ब्राह्मण, 7 जाट, 6 कुर्मी,  3 त्यागी/भूमिहार, 2 वैश्य, 1 कायस्थ और 9 सिख हैं.

अब तक दिए गए टिकटों से ये लगता है कि सपा को अभी भी अपने परंपरागत मुस्लिम वोट बैंक पर पूरा भरोसा है. इसलिए उन्हें सबसे ज्यादा टिकट दिया गया है. मुसलमानों के बाद सबसे अधिक टिकट दलितों को दिया गया है.

यूपी में 21.6 प्रतिशत दलित हैं लेकिन सपा ने गैर-चमार/जाटव की तुलना में चमार/जाटव को कम टिकट दिया है. इसकी एक बड़ी वजह ये हो सकती है कि ये जातियां बसपा की परंपरागत वोटर मानी जाती हैं.

सपा आगामी चुनाव के लिए मुस्लिम-यादव-क्षत्रिय-गैर-जाटव वोटों पर भरोसा करती दिख रही है

पार्टी ने यादवों को अच्छी खासी संख्या में टिकट दिया ताकि उनका परंपरागत यादव वोट बैंक बरकरार रहे. सवर्ण जातियों में उसने सबसे ज्यादा टिकट क्षत्रियों को दिया है.

यूपी में ब्राह्मणों की संख्या क्षत्रियों से ज्यादा है लेकिन सपा ने क्षत्रिय प्रत्याशियों को टिकट बंटवारे में महत्व दिया है. यानी सपा को क्षत्रिय वोटरों से ज्यादा उम्मीद है. इससेे आगामी चुनाव में अमर सिंह की भी भूमिका बनती दिख रही है.

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क्षत्रिय एक दबंग जाति है जो वोटरों को प्रभावित करने में काफी मददगार साबित होती है. ऐसे में यादव-क्षत्रिय गठबंधन से पार्टी विभिन्न मतदान केंद्रों पर अपना दबदबा जताने में कामयाब हो सकती है.

कुल मिलाकर सपा मुस्लिम-यादव-क्षत्रिय-गैर-जाटव दलित जातियों का समीकरम बनाती दिख रही है. इस समीकरण में बढ़ते वोट प्रतिशत के कारण महिलाएं भी प्रमुख भूमिका में होंगी.

हालांकि ये देखना रुचिकर होगा कि इनमें से कितनी महिलाओं सपा नेताओं के परिवार से आती हैं और कितनी आम कार्यकर्ताओं के बीच से.

First published: 5 April 2016, 17:36 IST
 
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