Home » इंडिया » What Is Line Of Control Between India And Pakistan
 

भारत-पाकिस्तान के बीच सीमा की बजाय एलओसी (नियंत्रण रेखा) क्यों है?

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 September 2016, 17:03 IST
QUICK PILL
  • भारतीय सेना की तरफ से पीओके में की गई कार्रवाई के बाद लगातार नियंत्रण रेखा का जिक्र किया जा रहा है. भारत की इस सर्जिकल स्ट्राइक की अहमियत को समझने के लिए नियंत्रण रेखा यानी लाइन ऑफ कंट्रोल को समझना जरूरी है.
  • जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के कब्जे वाली कश्मीर को अलग करने वाली सैन्य नियंत्रण की रेखा को नियंत्रण रेखा के नाम से जाना जाता है. कई लोग नियंत्रण रेखा को भारत और पाकिस्तान के बीच की सीमा रेखा समझने की भूल करते हैं जो कि गलत है.
  • नियंत्रण रेखा भारत और पाकिस्तान के बीच की अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं है बल्कि यह दोनों देशों के बीच प्रभावी सीमा रेखा है. 1947 की लड़ाई के बाद जब दोनों देशों ने युद्धविराम किया तब दोनों देशों की सेना के मौजूदा नियंत्रण को उनकी स्थिति मानते हुए उसे नियंत्रण रेखा करार दिया गया जिसकी लंबाई करीब 740 किलोमीटर है.

बुधवार की सुबह भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा के पार जाकर सैन्य अभियान चलाते हुए आतंकी शिविरों को नष्ट करते हुए करीब 30 से अधिक आतंकियों को मार गिराया. भारतीय सेना और विदेश मंत्रालय ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन कर मीडिया को सेना के ''सर्जिकल स्ट्राइक'' की जानकारी दी. 

सर्जिकल स्ट्राइक में सेना दुश्मन देश के चुनिंदा रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाते हुए कार्रवाई करती है. भारत ने ऐसी ही कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके में आतंकियों के शिविरों को खत्म कर दिया. 

भारतीय सेना की तरफ से की गई कार्रवाई के लिए लगातार नियंत्रण रेखा का जिक्र किया जा रहा है. भारत की इस सर्जिकल स्ट्राइक  की अहमियत को समझने के लिए नियंत्रण रेखा यानी लाइन ऑफ कंट्रोल को समझना जरूरी है.

क्या है नियंत्रण रेखा?

जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के कब्जे वाली कश्मीर को अलग करने वाली सैन्य नियंत्रण की रेखा को नियंत्रण रेखा के नाम से जाना जाता है. कई लोग नियंत्रण रेखा को भारत और पाकिस्तान के बीच की सीमा रेखा समझने की भूल करते हैं लेकिन ऐसा नहीं है.

दरअसल नियंत्रण रेखा भारत और पाकिस्तान के बीच की अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं है बल्कि यह दोनों देशों के बीच की सीमा भर है. इसे सीजफायर लाइन के नाम से जाना जाता था जिसे बाद में नियंत्रण रेखा के नाम से जाना जाने लगा. भारत और पाकिस्तान के बीच हुए शिमला समझौते के बाद इसे लाइन ऑफ कंट्रोल के नाम से जाना जाने लगा. दोनों देशों ने 3 जुलाई 1972 को  इस समझौते पर हस्ताक्षर किया था.

नियंत्रण रेखा भारत और पाकिस्तान के बीच की अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं है बल्कि यह दोनों देशों के बीच प्रभावी सीमा रेखा है. 1947 की लड़ाई के बाद जब दोनों देशों ने युद्धविराम किया तब दोनों देशों की सेना जिस स्थिति में थी उसे ही उनकी स्थिति मानते हुए उसे नियंत्रण रेखा करार दिया गया जिसकी लंबाई करीब 740 किलोमीटर है.

मौजूदा नियंत्रण रेखा 1947 में पाकिस्तानी आक्रमण के बाद हुई भारतीय कार्रवाई के बाद खींची गई थी. दोनों देशों के बीच युद्ध विराम के बाद भारत और पाकिस्तान के तत्कालीन नियंत्रण को लेकर यह रेखा तय की गई थी. 

1947 में जब पाकिस्तान ने भारत पर हमला किया था तब भारत ने हमले का जवाब देते हुए पाकिस्तान की सेना को श्रीनगर लेह राजमार्ग तक धकेल दिया था. लड़ाई की शुरुआत पाकिस्तान की तरफ से हुई.

भारतीय सेना की कार्रवाई के बाद 1 जनवरी 1949 को दोनों देशों के बीच युद्धविराम हुआ. इस युद्ध में भारत बढ़त की स्थिति में था क्योंकि उसने कश्मीर के दो तिहाई हिस्से को अपने कब्जे में ले लिया था जबकि पाकिस्तान के पास एक तिहाई इलाके का नियंत्रण था. 

इसके बाद दोनों देशों ने युद्ध विराम को माना. यह मसला संयुक्त राष्ट्र चला गया जहां पाकिस्तान को अपनी नियमित और अनियमित दोनों तरह की सभी सेनाओं को पूरी तरह से इस इलाके से हटाना था. हालांकि पाकिस्तान ने कभी इस शर्त को पूरा नहीं किया और फिर जनमत संग्रह भी नहीं कराया जा सकता.

मौजूदा नियंत्रण रेखा 1947 में पाकिस्तानी आक्रमण के बाद हुई भारतीय कार्रवाई के बाद खींची गई थी.

इसके बाद 1965 में एक बार फिर से पाकिस्तान और भारत के बीच युद्ध हुआ जिसमें उसे मुंह की खानी पड़ी. 

संयुक्त राष्ट्र और सोवियत संघ की पहल के बाद दोनों देशों के बीच ताशकंद में समझौता हुआ जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने भारतीय सेना को अगस्त के महीने की पहली स्थिति में लाने पर रजामंदी दे दी. इस युद्ध में भी भारत का नियंत्रण ज्यादा था. 

पाकिस्तान को अपनी हार का एहसास था इसलिए उन्होंने ताशकंद में जल्दी से युद्ध विराम समझौते को मान लिया. इसके बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 22 सितंबर को दोनों देशों के बीच बिना किसी शर्त के युद्ध विराम की घोषणा कर दी.

शिमला समझौता

बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के बाद दोनों देशों के बीच यह समझौता हुआ जिसमें बांग्लादेश को मान्यता दिए जाने का मार्ग प्रशस्त हुआ. इस समझौते में सबसे अहम बात यह थी कि दोनों देशों ने माना कि वह अपने मतभेदों को द्विपक्षीय बातचीत से सुलझाएंगे. 

भारत इसी समझौते का हवाला देते हुए कश्मीर को द्विपक्षीय मुद्दा बताता रहा है. वह इस मामले में संयुक्त राष्ट्र की अध्यक्षता को खारिज करता है लेकिन पाकिस्तान समझौते को नहीं मानते हुए कश्मीर मुद्दे का बार-बार अंतरराष्ट्रीयकरण की कोशिश करता है.

शिमला समझौता इस लिहाज से भी अहम है कि इसके तहत युद्ध विराम की रेखा को 17 दिसंबर 1971 को नियंत्रण रेखा में तब्दील कर दिया गया. इसमें यह भी कह कि दोनों पक्ष मतभेद होने के बावजूद इस रेखा में एकतरफा कोई बदलाव नहीं करेंगे. हालांकि इसके बावजूद दोनों देशों के बीच 1999 में फिर से लड़ाई हुई. 

पाकिस्तान ने युद्ध विराम और नियंत्रण रेखा को नहीं मानते हुए भारतीय इलाकों में घुसपैठी और जवाब में कारगिल का युद्ध हुआ. इस युद्ध में भी पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी थी. हालांकि इसके बाद भी पाकिस्तान नियंत्रण रेखा का बार-बार उल्लंघन करता रहा है. 

First published: 30 September 2016, 17:03 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी