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पाकिस्तान से आने वाली इन खबरों का क्या मतलब है?

विवेक काटजू | Updated on: 10 February 2017, 1:51 IST
QUICK PILL
  • पठानकोट हमले के संदर्भ में पाकिस्तान में एफआईआर दर्ज की गई है. पाकिस्तानी अदालत ने मुंबई हमले में भारतीय गवाहों की पेशी की बात कही है. इससे जाहिर है कि वो इन मामलों को किसी अंजाम तक पहुंचाने से बच रहा है.
  • पाकिस्तान भारत में होने वाली पाक समर्थित आतंकी गतिविधियों में ठोस कार्रवाई करने से बचता रहा है. इस बार भी ऐसा ही हो रहा है. ऐसे में भारत को कड़ा रुख अपनाना होगा.

पिछले कुछ हफ्तों में भारत-पाकिस्तान संबंधों से जुड़ी चार खबरें आई हैं. एक, भारत के पठानकोट हमले के संदर्भ में पाकिस्तान में एफआईआर दर्ज की गई है.

दो, 26/11(मुंबई हमला) की सुनवाई कर रही पाकिस्तानी कोर्ट भारतीय गवाहों की गवाही दर्ज करने की बात कही है.

तीन, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने ये स्वीकार किया कि उन्होंने कारगिल पर हमला करके तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के पीठ में छुरा भोंका था.

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चौथा, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ अमेरिका के वाशिंगटन में होने वाले न्यूक्लियर सिक्योरिटी समिट (31 मार्च से 1 अप्रैल) में मिल सकते हैं.

इन खबरों का भारत पाकिस्तान संबंधों के संदर्भ में क्या निहितार्थ है?

पाकिस्तान ने पठानकोट हमले के छह हफ्ते बाद एफआईआर दर्ज की. ये एफआईआर भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर दर्ज की है.

क्या कोई भारतीय मुंबई हमले पर पाकिस्तानी अदालत में गवाही देने जाएगा?

भारत के विदेश सचिव एस जयशंकर ने मीडिया को बताया था कि दोनों देशों के एनएसए संपर्क में हैं. भारत ने हमले के तुरंत बाद पाकिस्तान को सुराग दे दिए थे.

भारत ने पाकिस्तान को वो तीन पाकिस्तानी टेलीफोन नंबर भी दिए थे जिनपर आतंकियों ने बात की थी. एफआईआर में ये तीनों नंबर दर्ज हैं. सवाल ये है कि पाकिस्तान को एफआईआर दर्ज करने में इतना लंबा वक्त क्यों लगा?

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पाकिस्तानी ने अपने सभी प्रमुख सुरक्षा एजेंसियों को शामिल करते हुए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) गठित कर दिया था. ये भी खबर आई थी कि पाकिस्तान जैश-ए-मोहम्मद के सदस्यों से हमले के संदर्भ में पूछताछ कर रहा है.

ये भी खबर आई कि जैश के प्रमुख मसूद अजहर को एहतियातन हिरासत में ले लिया गया है और उनसे भी पूछताछ की गई है. अब ये देखना है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद क्या उचित कानूनी कार्रवाई होती है और उन्हें गिरफ्तार किया जाता है.

पाकिस्तानी कोर्ट द्वारा मुंबई हमले की सुनवाई में भारतीय गवाहों को पेश करने की बात से साफ है कि इस मामले पर कोई फैसला शायद नहीं आने वाला. आखिर, कौन भारतीय पाकिस्तान जाकर गवाही देगा?

इसका ये भी मतलब है कि भारत आई पाकिस्तानी टीम ने जो बयान दर्ज किए थे उसे पाकिस्तानी कोर्ट ने ठुकरा दिया है. खबरों के अनुसार पाकिस्तान भारत से गवाहों को पाकिस्तान भेजने के लिए कहने वाला है.

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ये भी गौरतलब है कि खुद पाकिस्तान में इतने ठोस सुबूत मौजूद होने के बाावजूद पाकिस्तान अपनी उच्च अदालतों को इन मामूली तकनीकी चीजों से निपटने का तरीका खोजने के लिए प्रेरित करने में विफल रहा है.

ये कोई बड़ी बात नहीं है क्योंकि पाकिस्तानी अदालतों ने पहले भी वहां होने वाली आतंकी वारदातों की सुनवाई सैन्य अदालतों में किए जाने की अनुमति दे चुकी हैं.

रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर कह चुके हैं कि पाकिस्तानी अधिकारियों को पठानकोट एयरबेस का मुआयना नहीं करने दिया जाएगा

भारत को ये साफ कर देना चाहिए कि पाकिस्तान को मुंबई हमले के दोषियों को अपने कानूनी दायरों में ही सजा देनी होगी. मामूली तकनीकी कमियों का बहाना बनाना दोनों देशों के आपसी संबंधों के लिए ठीक नहीं है.

ज्यादा परेशान करने वाली बात ये है कि मुंबई हमले में जो मांग की जा रही है उसे पठानकोट हमले में भी दोहरायी जा सकती है.

पाकिस्तान चाहता है कि उसकी एसआईटी को भारत में जांच करने दिया जाए. लेकिन भारत के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर पहले ही कह चुके हैं कि पाकिस्तानी एसआईटी को पठानकोट एयरबेस का मुआयना नहीं करने दिया जाएगा. जाहिर है पर्रिकर के फैसले को गलत ठहराना मुश्किल है. ऐसे ये इस बात की भी कम संभावना है कि कोई भारतीय सैन्य अधिकारी पाकिस्तानी कोर्ट में जाकर गवाही देगा.

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इसका सीधा मतलब है कि पाकिस्तानी अधिकारी और जैश-ए-मोहम्मद के लोग जानते हैं कि पाकिस्तानी अदालतों में ये मुकदमे किसी अंजाम तक नहीं पहुंचेंगे.

भारतीय एनएसए ने पाकिस्तानी एनएसए से इस मुद्दे पर जरूर बात की होगी. क्या उन्हें इसपर कोई आश्वासन मिला होगा कि पठानकोट हमले में मुंबई हमले जैसी दिक्कत नहीं आएगी? ये बात जल्द से जल्द स्पष्ट की जानी चाहिए.

शरीफ का वाजपेयी पर दिया गया बयान किसी तरह की बदजबानी नहीं है. उन्होंने नरेंद्र मोदी को ये संकेत दिया है कि वो अपनी ही सेना को झेंपने पर मजबूर कर सकते हैं क्योंकि पाक सेना ने आजतक आधिकारिक तौर पर नहीं माना है कि उसने कारगिल पर हमला किया था.

हालांकि कुछ रिटायर्ड पाकिस्तानी जनरल ने ये कहा था कि कारगिल हमला तत्कालीन पाक सेनाध्यक्ष परवेज मुशर्रफ और उनके गुर्गों का काम था.

मुशर्रफ के अनुसार नवाज शरीफ को कारगिल हमले की पूर्व जानकारी थी. उनके दावे में थोड़ी सच्चाई भी लगती है. नवाज शरीफ के बयान पर भारत की प्रतिक्रिया कुछ ऐसी ही थी कि हमें जो पहले से पता था उसकी एक बार फिर पुष्टि हुई.

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इसका सबक ये है कि कोई भी भारतीय नेता पाकिस्तान नेताओं और सैन्य जनरलों पर पूरा भरोसा नहीं कर सकता.

ऐसा लगता है कि पठानकोट हमले पर की गई एफआईआर केवल दोनों देशों के विदेश सचिवों के बीच होने वाली बातचीत आगे बढ़ सके, ताकि मोदी और शरीफ के बीच वाशिंगटन में होने वाली मुलाकात के लिए माहौल बन सके.

हालांकि केवल एफआईआर करने से बात नहीं बनेगी. पाकिस्तान को इस दिशा में गंभीर प्रयास करने होंगे. उसे पठानकोट हमले के लिए जिम्मेदार मसूद अज़हर को गिरफ्तार करना होगा. साथ ही हमले में मदद करने वाले पाकिस्तानी अधिकारियों पर भी शिंकजा कसना होगा.

पाकिस्तानी अदालतों को इस मामलों में तेज और निर्णायक कार्रवाई करनी होगी. अगर भारत पाकिस्तान से बात करने के लिए बहुत ज्यादा झुकेगा तो इससे यही संदेश जाएगा कि उसमें दृढ़ता का अभाव है और पाकिस्तान उसके खिलाफ आतंकी कार्रवाइयां जारी रख सकता है.

First published: 21 February 2016, 12:25 IST
 
विवेक काटजू @catchhindi

पूर्व राजनयिक और स्वतंत्र टिप्पणीकार

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