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एमटीसीआर: क्या है मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रेजीम?

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 June 2016, 19:06 IST
(पीटीआई)

भारत का मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रेजीम (एमटीसीआर) का सदस्य बनना अब तय है. बुधवार को भारत ने एमटीसीआर की सदस्यता प्राप्त करने की अंतिम बाधाएं पार कर ली हैं.

एमटीसीआर की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार इसका मकसद परमाणु हथियारों की होड़ पर लगाम लगाना है. इसका सदस्य बनने से भारत को प्रमुख उत्पादनकर्ताओं से अत्याधुनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी और निगरानी प्रणाली खरीद में मदद मिलेगी, जिसे केवल एमटीसीआर सदस्य देशों को ही खरीदने की इजाजत दी जाती है.

वर्तमान में एमटीसीआर में 34 देश शामिल हैं. सभी देश प्रमुख मिसाइल निर्माता देश हैं. इस साल सोल में इन देशों की बैठक होने वाली है, जहां भारत को नये सदस्य के तौर पर औपचारिक रूप से शामिल किया जाएगा.

भारत ने एमटीसीआर सदस्यता के लिए पिछले वर्ष आवेदन किया था और उसकी अर्जी 'मूक प्रक्रिया' के तहत विचाराधीन थी.

कब हुई स्थापना

एमटीसीआर की स्थापना 1987 में हुई. फ्रांस, जर्मनी, जापान, ब्रिटेन, अमेरिका, इटली और कनाडा इसके संस्थापक सदस्य थे. आखिरी बार बुल्गारिया 2004 में इस समूह का सदस्य बना था. भारत के पड़ोसी चीन और पाकिस्तान इस समूह के सदस्य नहीं है.

भारत को क्या होगा फायदा

एमटीसीआर का सदस्य न होने के नाते भारत की मिसाइल तकनीक तक सीमित पहुंच है. एमटीसीआर का सदस्य होने के बाद भारत पर लगा अंकुश हट जाएगा.

एमटीसीआर का सदस्य बनने के बाद भारत के लिए अमेरिका से ड्रोन तकनीकी पाना भी सुलभ हो सकेगा. साथ ही भारत मिसाइल तकनीकी का निर्यात भी कर सकेगा. एमटीसीआर व्यापक विनाश के हथियारों (डब्ल्यूएमडी) से जुड़े उपकरण और तकनीकी के निर्यात पर भी नियंत्रण लगाता है.

एमटीसीआर का सदस्य बनने के बाद भारत के लिए परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में शामिल होने में मदद मिलेगी. अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पहले ही भारत की इन समूहों में सदस्य बनने का समर्थन किया है.

भारत को मिल सकेगा अमेरिकी ड्रोन

साल 2008 से भारत उन पांच देशों में से एक है जो एमटीसीआर का एकतरफा पालन कर रहे हैं. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार एमटीसीआर का सदस्य बनने के बाद भारत जल्द ही अमेरिका से ड्रोन विमानों की खरीद कर सकता है.

भारत 'जनरल एटॉमिक्स' से प्रीडेटर ड्रोन मिसाइल खरीदना चाहता है. कंपनी के एक अधिकारी विवेक लाल ने पिछले साल कहा था, 'जनरल एटॉमिक्स एयरोनॉटिकल सिस्टम्स इंक भारत की प्रीडेटर सीरिज के रिमोटली पायलटेड एयर क्रॉफ्ट (आरपीए) में दिलचस्पी से वाकिफ है.

'जनरल एटॉमिक्स' अमेरिका में निजी स्वामित्व वाली सबसे बड़ी कंपनी है जो ड्रोन विमान तैयार करती है. अफगानिस्तान में हाल ही में तालिबान नेता का सफाया करने वाले प्रीडेटर ड्रोन सीआइए का पसंदीदा औजार है.

क्या है एमटीसीआर का मुख्य काम

एमटीसीआर का मकसद बैलिस्टिक मिसाइल और अन्य मानव रहित आपूर्ति प्रणालियों के विस्तार को सीमित करना है, जिनका रासायनिक, जैविक और परमाणु हमलों में उपयोग किया जा सकता है. यह समूह अपने सदस्यों से अनुरोध करती है कि वह अपने मिसाइल निर्यात और सामूहिक विनाश के किसी भी प्रकार के हथियार की आपूर्ति करने में सक्षम संबंधित टेक्नोलॉजी को सीमित करें.

First published: 9 June 2016, 19:06 IST
 
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