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अविश्वास प्रस्ताव के बारे में आपको ये बातें पता होनी चाहिए !

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 July 2018, 11:31 IST

मानसून सत्र का तीसरा दिन आज बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाला है. आज लोकसभा में 27वां अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जाएगा. मोदी सरकार के खिलाफ ये अविश्वास प्रस्ताव टीडीपी लेकर आ रही है. लोकसभा अध्यक्ष ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था जिसके बाद आज लोकसभा में इस पर बहस होगी. सदन में सरकार को लगभग साढ़े तीन घंटे का समय मिला है वहीं कांग्रेस को 38 मिनट का समय मिला है. अविश्वास प्रस्ताव निचले सदन यानी केंद्र सरकार के मामले में लोकसभा और राज्य सरकारों के मामले में विधानसभा में भी लाए जा सकते हैं.

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क्या है अविश्वास प्रस्ताव 

अविश्वास प्रस्ताव सरकार का विरोध करने के लिए विपक्ष की तरफ से लाया जाता है. सरकार को सत्ता में बने रहने के लिए जरुरी है कि अविश्वास प्रस्ताव गिर जाए. मतलब कि सदन में मंजूर न हो. अगर इस प्रस्ताव को सदन में मंजूरी मिल जाती है तो सरकार गिर जाएगी. हालांकि संविधान में इसका कोई उल्लेख नहीं है. लेकिन अनुच्छेद 118 के अंतर्गत हर सदन अपनी प्रक्रिया बनाने को स्वतंत्र है. जबकि नियम 198 के तहत ऐसी व्यवस्था है कि कोई भी सदस्य लोकसभा अध्यक्ष को सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे सकता है.

कैसे पारित होता है अविश्वास प्रस्ताव

अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष को लिखित में सूचना देनी होती है. ये सूचना विपक्ष की ओर से देनी होती है. उसके बाद स्पीकर उसी पार्टी के किसी सांसद को इसे पेश करने के लिए कहता है. अविश्वास प्रस्ताव तब लाया जाता है जब किसी पार्टी को ऐसा लगता है कि सरकार सदन का विश्वास या बहुमत खो चुकी है. फिलहाल सरकार को घेरने के लिए विपक्षी पार्टियां इकट्ठा होती दिख रहीं है.

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कैसे स्वीकार होता है अविश्वास प्रस्ताव

अविश्वास प्रस्ताव को पारित कराने के लिए जरुरी है कि कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन प्राप्त हो. लोकसभा अध्यक्ष या स्पीकर जब इसपर मंजूरी देता है तो स्वीकृति मिलने के 10 दिनों के अंदर इस पर चर्चा कराई जाती है. चर्चा के बाद स्पीकर अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में वोटिंग कराता है. इस दौरान सरकार अपने सांसदों का व्हिप जारी करती. या फिर और कोई अन्य फैसला ले सकता है.

मोदी सरकार के खिलाफ कितने अविश्वास प्रस्ताव

ये पहली बार होगा जबकि मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा रहा है. इससे पहले मार्च में भी लाए जाने की बात हुई थी लेकिन विपक्ष एकजुट नहीं हो पाया था.

First published: 20 July 2018, 11:31 IST
 
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