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गैर-बीजेपी राष्ट्रीय गठबंधनः लालू और राहुल मानेंगे नीतीश को नेता?

चारू कार्तिकेय | Updated on: 20 April 2016, 8:41 IST
QUICK PILL
  • बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गैर-बीजेपी राष्ट्रीय गठबंधन बनाने का आह्वान किया है. हाल ही में अपनी पार्टी जेडीयू के अध्यक्ष बने नीतीश की इस पहल को उनकी राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं की दिशा में बढ़ाया पहला क़दम माना जा रहा है.
  • नीतीश कुमार की मंशा जो भी हो कांग्रेस, आरजेडी समेत किसी अन्य दल ने इस मसले पर नहीं खोले हैं अपने पत्ते. अभी तक बस बीजेडी ने दिया इस पहल पर सकारात्मक संदेश.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 'संघ मुक्त भारत' का नारा देकर अगले आम चुनावों की तैयारी का बिगुल फूंक दिया है. इस नारे से जाहिर है कि नीतीश 2019 में होने वाले चुनाव में सत्ताधारी बीजेपी गठबंधन के खिलाफ राष्ट्रीय गठबंधन बनाना चाहते हैं.

नीतीश ने 17 अप्रैल को पटना में कहा, "संघ मुक्त भारत बनाने के लिए सभी गैर-बीजेपी पार्टियों को एक होना होगा."

प्रधानमंत्री ने पिछले लोक सभा चुनाव में कांग्रेस मुक्त भारत का नारा दिया था. नीतीश के नारे को उसी का जवाब माना जा रहा है.

नीतीश ने कहा, "भारत को आरएसएस से मुक्त कराने के लिए सभी गैर-बीजेपी दलों को एक साथ आना होगा."

नीतीश कुमार ने गैर-बीजेपी राष्ट्रीय गठबंधन बनाने का आह्वान को पीएम बनने की तैयारी का आगाज माना जा रहा है

नीतीश कुमार हाल ही जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए हैं. कयास लगाया जा रहा है कि जिस तरह बिहार विधान सभा चुनाव में बीजेपी के खिलाफ उन्होंने आरजेडी और कांग्रेस के साथ गठबंधन किया वैसा ही प्रयोग वो केंद्र में करेंगे. इस राष्ट्रीय भूमिका का आधार तैयार करने के लिए ही उन्हें पार्टी अध्यक्ष बनाया गया है.

नीतीश की भी जो भी मंशा हो कांग्रेस ने ऐसी किसी संभावना से तत्काल इनकार कर दिया. बिहार कांग्रेस के नेता शकील अहमद ने इशारों में नीतीश को याद दिलाया कि जेडीयू एक क्षेत्रीय पार्टी है और राष्ट्रीय नेतृत्व उसके वश की बात नहीं.

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अहमद ने यहां तक कि कहा कि 2019 में किसी गठबंधन की जरूरत ही नहीं होगी क्योंकि जनता हरहाल में मोदी सरकार को बाहर का रास्ता दिखा देगी.

अहमद के बयान से कांग्रेस की बेचैनी झलकती है. पार्टी को शायद इस बात की आशंका है कि अगले आम चुनाव में राहुल  गांधी पर नीतीश कुमार हावी हो सकते हैं. पार्टी ऐसे किसी भी संभावना को शायद ही स्वीकार करे क्योंकि इससे राहुल का राजनीतिक कद कम होगा.

अभी कांग्रेस नीतीश का खुला विरोध भी नहीं करना चाहती क्योंकि इसका असर बिहार में उसके गठबंधन पर पड़ सकता है.

नीतीश के बयान पर लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी ने भी बहुत ही सतर्क प्रतिक्रिया दी है. पार्टी के प्रवक्ता मनोज झा ने कैच से कहा, "ये नहीं भूलना चाहिए कि बीजेपी-आरएसएस के खिलाफ राष्ट्रीय गठबंधन की मांग सबसे पहले लालू यादव ने 16 मई, 2014 को की थी, जिस दिन सत्ता में आई थी."

झा आरएसएस को रोकने के बात पर नीतीश से सहमति जताते हैं लेकिन वो भी नीतीश के राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं पर छिपे तौर पर कटाक्ष भी करते हैं. झा ने कहा, "जब जयप्रकाश नारायण ने 1966-67 में कांग्रेस विरोधी महागठबंधन कराया था तो उन्होंने नेतृत्व के सवाल के बजाय गठबंधन बनाने पर जोर दिया था."

गैर-बीजेपी राष्ट्रीय गठबंधन बना भी तो नीतीश कुमार के लिए उसका सर्वमान्य नेता बनना आसान नहीं होगा

नीतीश के प्रस्ताव को अमली जामा पहनाने के लिए उन्हें लेफ्ट फ्रंट और तृणमूल कांग्रेस का भी समर्थन चाहिए होगा. ये दोनों दल अभी पश्चिम बंगाल में हो रहे विधान सभा में व्यस्त हैं. कैच ने जब सीपीएम के एक नेता से इस मसले पर उनकी राय पूछी तो उन्होंने कहा कि इस वक्त वो बंगाल चुनाव के अलावा किसी दूसरे मुद्दे पर बात नहीं करेंगे.

सीपीएम प्रमुख सीताराम येचुरी और तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी ने भी अब तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

इस गठबंधन में जयललिता की एआईएडीएमके को भी लाने की कोशिश होगी लेकिन पार्टी अभी तमिलनाडु विधान सभा चुनाव में व्यस्त है. एआईएडीएमके लोक सभा में बीजेपी और कांग्रेस के बाद तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है.

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बीजू जनता दल(बीजेडी) के पास इस समय 20 लोक सभा सांसद हैं. वो भी गठबंधन में अहम भूमिका निभा सकती है.

लोक सभा में बीजेडी के नेता भर्तृहरि महताब ने कैच से बातचीत में कहा कि नीतीश को सभी दलों से इसके लिए संपर्क करना चाहिए.

हालांकि महताब ये भी कहते हैं कि अभी से इसपर कोई ठोस राय देना जल्दबाजी होगी. वो कहते हैं कि नीतीश को पहले दो मुद्दों पर अपनी राय साफ करनी होगी. एक, क्या वो केवल समाजवादी पार्टियों का गठबंधन चाहते हैं? और दूसरा, केंद्र में कांग्रेस को लेकर उनकी क्या राय है?

महताब कहते हैं कि भले ही केंद्र में कांग्रेस दिन-प्रति-दिन सिकुड़ती जा रही है लेकिन कई क्षेत्रीय दल बीजेपी और कांग्रेस दोनों के खिलाफ संघर्ष कर रही हैं.

नीतीश के लिए अच्छी खबर ये है कि महताब ने उन्हें अनुभवी नेता और किसी भी भावी गठबंधन के नेता पद के प्रबल दावेदार मानते हैं.

First published: 20 April 2016, 8:41 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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