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जानिए क्या है धारा 377 और इसे तोड़ने पर होने वाली सजा?

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 January 2018, 17:16 IST

समलैंगिक अधिकारों के पक्षधरों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक राहत भरी खबर दी है. सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि वह आईपीसी की धारा 377 पर पुनर्विचार करने के लिए तैयार है. भारत में लम्बे समय से इस धारा को लेकर विवाद होते रहे हैं. हालाँकि विश्व के कई देशों में समलैंगिकों को अब शादी का अधिकार भी मिल चुका है. हाल ही में ऑस्ट्रेलिया ने समलैंगिकों को विवाह का अधिकार दिया है.

 

नाज फाउंडेशन ने हाईकोर्ट में यह कहते हुए इसकी संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाया था कि अगर दो व्यस्क अगर सहमति से संबंध बनाते है तो उसे धारा 377 के प्रावधान से बाहर किया जाना चाहिए।

क्या है धारा 377

आईपीसी की धारा 377 के तहत अप्राकृतिक (अननैचुरल) यौन संबंध को गैरकानूनी ठहराया गया है. इस धारा के तहत स्त्री या पुरुष के साथ अननैचुरल संबध बनाने पर दस साल की सजा व जुर्माने का प्रावधान है. धारा 377 के तहत अपराध को गैर जमानती माना गया है.

इस धारा के अंतर्गत अपराध को संज्ञेय बनाया गया है. इसमें गिरफ्तारी के लिए किसी प्रकार के वारंट की जरूरत नहीं होती है.शक के आधार पर या गुप्त सूचना का हवाला देकर पुलिस इस मामले में किसी को भी गिरफ्तार कर सकती है.

इससे पहले 2009 में दिल्ली हाई कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का फैसला सुनाया था. लेकिन 2013 में सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जीएस सिंघवी और जस्टिस एसजे मुखोपाध्याय की बेंच ने हाई कोर्ट के इस फैसले को पलट दिया था. हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को ज्यादा बड़ी बेंच को सौंपने की बात कही है.

First published: 8 January 2018, 17:16 IST
 
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