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नेशनल हेरल्‍ड मामले में पक्ष-विपक्ष की कानूनी दलीलें क्‍या हैं?

सुहास मुंशी | Updated on: 10 February 2017, 1:48 IST

नेशनल हेरल्‍ड मामले में कई लोगों की सियासी किस्‍मत दांव पर लगी हुई है. गांधी परिवार के लिए यह मामला उसके वजूद से जुड़ा है, तो सुब्रमण्‍यम स्‍वामी इसके सहारे सत्‍ता में अपना हिस्‍सा पाने की फि़राक में हैं. इनके अलावा कई ऐसे कांग्रेसी नेता भी हैं जो अपने आलाकमान के बचाव में अचानक इस लोभ में मैदान में कूद गए हैं कि उनका सियासी भविष्‍य संवर सके.

इस मामले में जीत किसकी होगी, अभी कहना जल्‍दबाज़ी है. कांग्रेस ने अब तक अपना विस्‍तृत जवाब दाखिल नहीं किया है और हस्‍तांतरित किए गए पैसों के स्रोत व प्रकृति के बारे में कुछ भी स्‍पष्‍ट नहीं किया है. चूंकि यह मामला दिन--दिन दिलचस्‍प होता जा रहा है, इसलिए हमें फिलहाल दोनों पक्षों की कानूनी दलीलों के आधार पर ही कोई आकलन करना होगा.

मामला क्‍या है?

  • नेशनल हेरल्‍ड एक अख़बार था जिसका स्‍वामी और प्रकाशक एसोसिएटेड जर्नल्‍स लिमिटेड (एजेएल) है.
  • नेशनल हेरल्‍ड की शुरुआत जवाहरलाल नेहरू की अध्‍यक्षता में 1938 में हुई और यह 2008 में बंद कर दिया गया.
  • एजेएल के पास 2000 करोड़ से ज्‍यादा मूल्‍य की परिसंपत्तियां हैं.
  • एजेएल के 1057 शेयरधारक हैं जिन्‍होंने अखबार की नींव रखे जाने के वक्‍त 89 लाख रुपये का योगदान दिया था.
  • एजेएल ने 2008 में नेशनल हेरल्‍ड को बंद करते हुए बताया था कि अख़बार 90.25 करोड़ रुपये के घाटे में है.
  • कांग्रेस ने यह कर्ज चुकाने की पेशकश की. इस दौरान सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने 5 लाख रुपये की आरंभिक पूंजी से यंग इंडियन नाम की एक अलाभकारी कंपनी की नींव रखी.
  • एजेएल ने घोषणा की कि वह कांग्रेस को लोन का भुगतान नहीं कर सकता है. इसके बाद यंग इंडियन ने लोन की जिम्‍मेदारी अपने ऊपर लेते हुए एजेएल को 50 लाख की रकम अदा की और कंपनी का नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया.
  • कांग्रेस ने लोन को माफ करने का फैसला लिया जिससे महज 5 लाख की पूंजी वाली यंग इंडियन कंपनी का 2000 करोड़ से ज्‍यादा की परिसंपत्ति वाली एजेएल पर व्‍यावहारिक कब्‍ज़ा हो गया.
  • ध्‍यान देने की बात यह है कि उस वक्‍त मोतीलाल वोरा कांग्रेस के कोषाध्‍यक्ष थे, एजेएल के निदेशक बोर्ड के सदस्‍य थे और यंग इंडियन के शेयरधारक भी थे.

कांग्रेस के खिलाफ़ दलीलें

  • एजेएल अपनी 2000 करोड़ की परिसंपत्तियों का कुछ अंश बेचकर 90.25 करोड़ का कर्ज चुका सकती थी.
  • उसे किसी राजनीतिक दल से कर्ज लेने की ज़रूरत नहीं थी जिसके चलते उसे अपने अधिकांश शेयर यंग इंडियन को सौंपने पड़े. अपने 99 फीसदी शेयर यंग इंडियन को देकर एजेएल ने यंग इंडियन के शेयरधारकों को 2000 करोड़ के 99 फीसदी यानी 1980 करोड़ का नुकसान पहुंचाया.
  • कांग्रेस ने एजेएल को जो 90.25 करोड़ का कर्ज दिया था उसे वह आसानी से वसूल सकती थी लेकिन उसने ऐसा नहीं किया. इसके बजाय 90.25 करोड़ की कर्ज माफी देकर उसने इतने का ही नुकसान सहना चुना.
  • आखिर क्‍यों कांग्रेस पर गुपचुप तरीके से पैसे बनाने का आरोप लगाया जा सकता है चूंकि उसने यंग इंडियन के बहाने अपनी ही मदद कर के पीछे के दरवाज़े से 2000 करोड़ की परिसंपत्तियों पर कब्‍ज़ा जमा लिया.
  • कांग्रेस की यह दलील कि सुब्रमण्‍यम स्‍वामी न तो एजेएल और न ही यंग इंडियन के शेयरधारक हैं इसलिए उनके प्रतिवाद की कोई कानूनी अधिस्थिति (लोकस स्‍टैंडाइ) नहीं है, अपने आप में कानूनी रूप से अमान्‍य है, जैसा कि उच्‍च न्‍यायालय द्वारा स्‍थापित फर्जीवाड़े के प्रथम दृष्‍टया साक्ष्‍यों से सिद्ध होता है.
  • सुप्रीम कोर्ट पहले ही यह कह चुका है कि फौजदारी कानून के संदर्भ में 'लोकस' यानी अधिस्थिति की अवधारणा अप्रासंगिक है और कोई भी व्‍यक्ति किसी अपराध के बारे में शिकायत कर सकता है.
  • सुब्रमण्‍यम स्‍वामी ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और 5 अन्‍य के खिलाफ बुनियादी रूप से तीन आरोप लगाए हैं- आपराधिक हेरफेर (धारा 403), आपराधिक विश्‍वासघात (धारा 406) और धोखाधड़ी (धारा 420) के आरोप.
  • धारा 403 के प्रावधानों के तहत तीन साल की कैद या अर्थदण्‍ड या दोनों की सज़ा संभव है. यह सज़ा सातों आरोपियों को इस दलील के आधार पर दी जा सकती है कि कांग्रेस ने एक पब्लिक कंपनी को कर्ज देकर जन प्रतिनिधित्‍व कानून और कांग्रेस पार्टी के संविधान का उल्‍लंघन किया है, चूं‍कि पार्टी को मिलने वाले अनुदानों के पीछे मूल मंशा लोकतंत्र के प्रसार की होती है.
  • इसके अलावा, कांग्रेस की ओर से कर्ज की वसूली के भी कोई प्रयास नहीं किए गए.
  • सातों आरोपियों के खिलाफ बाकी की दो धाराएं भी इस दलील पर लगाई जा सकती हैं कि कांग्रेस ने एजेएल की परिसंपत्तियों पर कब्‍जा करने के लिए ही यंग इंडियन नाम से एक फर्जी कंपनी बनाई जिसका और कोई उद्देश्‍य नहीं था.
  • कंपनी कानून की कुछ धाराएं भी इस मामले में लग सकती हैं, लेकिन ऐसा केवल एजेएल के शेयरधारक ही इस शिकायत के आधार पर कर सकते हैं कि उन्‍हें इस पक्षपातपूर्ण लेनदेन से नुकसान हुआ है चूंकि एजेएल, यंग इंडियन और कांग्रेस तीनों में ही प्रभारी व्‍यक्ति एक ही था.
  • अंतिम बात यह है कि कांग्रेस या यंग इंडियन कभी भी कंपनी को मिले लाइसेंस की शर्तों को अलाभकारी से लाभकारी में बदल सकती थी जिससे वह 2000 करोड़ की परिसं‍पत्तियों का सीधा लाभ उठाने की स्थिति में आ जाती.

कांग्रेस के पक्ष में दलीलें

  • कांग्रेस की बुनियादी दलील यह है कि परिसंपत्तियों के हस्‍तांतरण से चूंकि किसी को भी कोई लाभ नहीं हुआ है, इसलिए आपराधिक हेरफेर या धोखाधड़ी का कोई मामला ही नहीं बनता है.
  • एक दलील यह है कि चूंकि यंग इंडियन एक अलाभकारी कंपनी है, इसलिए सोनिया या राहुल गांधी उसके द्वारा अधिग्रहित एजेएल की 2000 करोड़ की परिसंपत्तियों से कोई लाभ नहीं ले सकते हैं.
  • अगली दलील यह है कि इस मामले में हितों का कोई टकराव ही नहीं है चूंकि यंग इंडियन में भी कांग्रेस के लोग थे, एजेएल के अधिकतर शेयरधारक कांग्रेसी थे और पैसे का सारा हस्‍तांतरण कांग्रेस के भीतर ही हुआ है, इसलिए किसे क्‍या नुकसान हुआ, इसका सवाल ही नहीं खड़ा होता.
  • कोई भी ऐसा कानून नहीं है जो किसी राजनीतिक दल को पब्लिक कंपनी में निवेश करने से सीधे रोकता हो. इसलिए कांग्रेस का एजेएल को लोन देना अवैध नहीं है.
  • कांग्रेस या यंग इंडियन ने एजेएल का अधिग्रहण नेशनल हेरल्‍ड को बहाल करने के लिए किया है. एजेएल में अंदरूनी व्‍यवस्‍था को दुरुस्‍त करने में थोड़ा वक्‍त लग रहा है ताकि एक प्रकाशन संस्‍थान अपने पैरों पर दोबारा खड़ा हो सके. इस प्रक्रिया में कांग्रेस या यंग इंडियन को कोई लाभ नहीं हो रहा.
  • एजेएल के निदेशक बोर्ड ने जब यंग इंडियन को शेयर हस्‍तांतरित करने का निर्णय किया, तो उसके किसी भी शेयरधारक ने कोई आपत्ति नहीं की.
  • परिसंपत्तियों के हस्‍तांतरण से यंग इंडियन, सोनिया या राहुल गांधी को कोई आय हुई हो, इसका कोई साक्ष्‍य नहीं है. एजेएल को अपनी संपत्तियों के किराये से जो आमदनी होती है, वह उसी को प्राप्‍त होती है, यंग इंडियन को नहीं.
First published: 13 December 2015, 7:34 IST
 
सुहास मुंशी @suhasmunshi

प्रिंसिपल कॉरेसपॉडेंट, कैच न्यूज़. पत्रकारिता में आने से पहले इंजीनियर के रूप में कम्प्यूटर कोड लिखा करते थे. शुरुआत साल 2010 में मिंट में इंटर्न के रूप में की. उसके बाद मिंट, हिंदुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ़ इंडिया और मेल टुडे में बाइलाइन मिली.

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