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कितना खतरनाक है पीएम 2.5

निहार गोखले | Updated on: 11 February 2017, 6:43 IST
QUICK PILL
  • दिल्ली में प्रदूषण की वजह से नॉर्वे और अमेरिकी दूतावास ने अपने कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए हैं.
  • अंतरराष्ट्रीय एजेंसी ग्रीनपीस ने हाल ही में पाया कि दिल्ली के क्लासरूम में पीएम 2.5 का स्तर सामान्य स्तर से 11 गुना अधिक था.

29 नवंबर की सुबह जब बीजिंग की नींद खुली, तब शहर घने कोहरे में लिपटा था. दरअसल यह कोहरा नहीं, प्रदूषण की चादर थी. 29 नवंबर की सुबह बीजिंग में प्रदूषण का स्तर पिछले एक साल में सबसे अधिक था. सरकार ने तत्काल चेतावनी जारी करते हुए कारखानों को बंद करने का आदेश दे दिया. 

इसी दिन दिल्ली भीषण प्रदूषण की गिरफ्त में था और प्रदूषण का स्तर बीजिंग से भी ज्यादा था. इसके बावजूद दिल्ली शहर की सामान्य दिनचर्या पर कोई असर नहीं हुआ. दिल्ली में इस दिन हाफ मैराथन का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया.

स्वास्थ्य जागरूकता के नाम पर धावकों ने शहर की खतरनाक फिजां में दौड़ लगाई. इस दौरान उन्होंने सामान्य व्यक्ति की तुलना में 10-20 गुणा ज्यादा सांस ली. वहीं दूसरी तरफ नॉर्वे और अमेरिका के दूतावास ने अपने कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तत्काल कई कदम उठाने का फैसला किया. दिल्ली में बढ़े प्रदूषण के स्तर को देखते हुए नॉर्वे के अधिकारियों को दिल्ली पोस्टिंग के दौरान 'अतिरिक्त बोनस' मिलेगा वहीं अमेरिकी दूतावास के स्कूल ने अपने छात्रों की परिसर से बाह होने वाली सभी गतिविधियां स्थगित कर दी हैं.

प्रदूषण के खतरनाक स्तर को लेकर दो शहरों के बीच अलग-अलग रुख की क्या वजह हो सकती है? दिल्ली के अधिकांश लोगों को यह पता भी नहीं कि उन्हें खतरनाक रूप से प्रदूषित हवा किस तरह धीरे-धीरे मौत के मुंह में भेज रही है. 

दिल्ली में कोई एयर वॉर्निंग सिस्टम नहीं है जिसे लोगों को प्रदूषण के खतरनाक स्तर के बारे में जानकारी दी जा सके 

सरकार लोगों को प्रदूषण के खतरनाक असर, उसके कारणों और इससे बचाव के लिए पहने जाने वाले मास्क के प्रकारों को लेकर लोगों को जागरूक करने में बुरी तरफ विफल रही है. सरकार बस प्रदूषण से जुड़े आंकड़ों को वेबसाइट और केमिस्ट्री की पुस्तकों में डालकर अपना पल्ला झाड़ लेती है. 

दिल्ली में कोई एयर वॉर्निंग सिस्टम नहीं है जिसे लोगों को प्रदूषण के खतरनाक स्तर के बारे में जानकारी दी जा सके ताकि उसके आधार पर स्कूलों को बंद किया जा सके और घर के बाहर होने वाली गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके. 

सबसे बड़ी बात लोगों को इस बारे में जानकारी होनी चाहिए कि किस वजह से दिल्ली की फिजां जहरीली हो रही है. अगर आप पीएम 2.5 के बारे में जानते भी हैं तो आपके पास इस बात को जानने का कोई जरिया नहीं है कि यह किस कदर आपके लिए घातक हो सकता है. आपके लिए यह समझना जरूरी है.

हम पीएम 2.5 के बारे में क्यों बात कर रहे हैं ?

दिल्ली की हवा जहरीली गैसों की मौजूदगी से प्रदूषित नहीं है बल्कि यह सूक्ष्म कणों से प्रभावित है जिसे पीएम 2.5 के नाम से जाना जाता है. दिल्ली की हवा में इसकी मौजूदगी निर्धारित मानक से कहीं ज्यादा है. मैराथन के वक्त यह अपनी तय मात्रा से 48 गुणा ज्यादा था.

ग्रीनपीस ने हाल ही में पाया कि दिल्ली के क्लासरूम में पीएम 2.5 का स्तर सामान्य स्तर से 11 गुना अधिक था.

क्या है पीएम 2.5?

  • पीएम कण के बारे में बताता है जबकि उसके आगे की संख्या उस कण के आकार को बताता है. इसलिए पीएम 2.5 बेहद छोटे सूक्ष्म कण है जिसका साइज 2.5 माइक्रॉन है. यह साइज हवा की मोटाई से 30 गुणा कम है.
  •  छोटे साइज की वजह से इन कणों को शरीर में घुसने से नहीं रोका जा सकता.

किस चीज से बना होता है पीएम 2.5


इसका कोई सरल जवाब नहीं है क्योंकि इस खतरनाक कण को उसकी साइज से मापा जाता है न कि यह किससे बना है. यह ठोस और द्रव्य रासायनों से बना हो सकता है. 

pollution

  • यूनाइटेड स्टेट्स एन्वायरमेंट प्रोटेक्शन एजेंसी के मुताबिक पीएम 2.5 पार्टिकल या कण को लेकर इस बात से ज्यादा फर्क पड़ता है कि इसका उत्सर्जन किस इलाके में हुआ है. इसमें निम्नलिखित चारों मैटीरियल्स के कण मौजूद हो सकते हैं. 
  • कार्बन-कार, ट्रक और कूड़ा जलाने से
  • नाइट्रेट-कार, ट्रक और थर्मल पावर जेनरेशन से
  • सल्फेट-थर्मल पावर जेनरेशन से 
  • क्रिस्टल-मिट्टी और धातु के टुकड़े
  • इन कणों को विशेष उपकरणों की मदद से ही देखा जा सकता है. बड़ी मात्रा में जमा होने की स्थिति में आप इसे स्मॉग या घने कोहरे के तौर पर देख सकते हैं.

पीएम 2.5 बुरा क्यों है ?

  • सूक्ष्म आकार का होने की वजह से यह आसानी से आपके फेंफड़े तक पहुंच सकता है. और फिर इसके बाद यह खून के जरिये आपके हार्ट तक जा सकता है.
  • पीएम 2.5 का लगातार सेवन अस्थामा और हार्ट से जुड़ी बीमारियां पैदा करने की क्षमता रखता है. इसके अलावा कफ, नाक बहना और लगातार छींकने की समस्या भी पैदा हो सकती है.
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक बच्चों में फेंफड़े के विकास में बाधा आ सकती है और फिर पूरा जीवन उन्हें कमजोर फेंफडे़ की वजह से परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. 
  • पीएम 2.5 डीजल वाहनों से निकलता है जिसमें कार्बन होता है और यह कैंसर पैदा करने की क्षमता रखता है.
  • यह हार्ट और फेंफड़े की बीमारी पैदा कर सकता है या ऐसा होने की स्थिति में उसे और खतरनाक बना सकता है. 
  • पीएम 2.5 की वजह से कमजोरी होती है और इससे दुनिया भर में हर साल 31 लाख लोगों की मौत होती है. 
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक पीएम 2.5 के लगातार असर से लोगों की औसत आयु में 8.6 महीने की कमी आती है.

कितना सुरक्षित है पीएम 2.5?

  • विश्व स्वाथ्य संगठन के मुताबिक ऐसा कोई सुरक्षित स्तर तो नहीं है क्योंकि किसी भी स्तर पर पीएम 2.5 खतरनाक है. हालांकि इसके बावजूद पीएम 2.5 को लेकर एक मानक है. 
  • डब्ल्यूएचओ के मानक के मुताबिक औसतन पीएम 2.5 का स्तर एक साल में प्रति क्यूबिक मीटर 10 मिलीग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए.
  • एक दिन में यह 25 मिलीग्राम प्रति घन मीटर के नीचे होना चाहिए. हालंकि भारतीय सुरक्षा का स्तर 60 तक जाता है.
  • डब्लयूएचओ के मुताबिक किसी भी सूरत में पीएम 2.5 का स्तर 25 मिलीग्राम प्रति घन मीट से अधिक नहीं होना चाहिए. हालांकि इसके बावजूद भारत में इसकी लिमिट 60 मिलीग्राम प्रति घन मीटर तक है.

पीएम 2.5 से क्या है बचाव?

  • पीएम 2.5 से बचाव के लिए गैस मास्क पहनने की जरूरत नहीं. कॉटन के मास्क से आप ऐसे पार्टिकल को शरीर में जाने से रोक सकते हैं.
  • बचाव के लिए एन-95 मास्क पहनने की सिफारिश की जाती है. एच1एन1 से बचने में इस मास्क का इस्तेमाल किया जाता है.
  • दुर्भाग्यवश अधिक संख्या में पेड़ लगाने से इस समस्या का समाधान नहीं हो पाया है. चूंकि पीएम 2.5 पार्टिकल गैस नहीं है इसलिए पेड़ के पत्ते भी इसकी प्रोसेसिंग नहीं कर पाते.
  • वास्तव में अधिक पेड़ों की संख्या स्थिति को बिगाड़ ही सकती है क्योंकि हवा में अधिक नमी से ये पार्टिकल वातावरण में फैलने की बजाए फंस जाएंगे.
  • ऐसे में पीएम 2.5 को रोकने का एकमात्र उपाय इसके सोर्स को रोकना है, जहां से यह निकलता है. कार, कूड़े को जलाया जाना, थर्मल पावर प्लांट्स जैसी जगहों पर इसे वातावरण में मिलने से रोका जा सकता है. जब तक यह नहीं हो जाता तब तक आपको एन-95 मास्क की मदद लेनी होगी. 

First published: 5 December 2015, 8:19 IST
 
निहार गोखले @nihargokhale

संवाददाता, कैच न्यूज़. जल, जंगल, पर्यावरण समेत नीतिगत विषयों पर लिखते हैं.

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