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155 देश बढ़ाएंगे पोलियो उन्मूलन की तरफ एक और कदम

विशाख उन्नीकृष्णन | Updated on: 23 April 2016, 21:11 IST

दुनिया इस समय बदलाव के ऐसे दौर से गुजर रही है जिसकी पहले कभी कल्पना या कोशिश तक नहीं की गई होगी. आगामी 1 मई तक दुनिया के 155 देश पोलियो की उस वैक्सीन का प्रयोग पूरी तरह बंद करने वाले हैं जिसके दम पर वो बीती आधी सदी से भी अधिक समय से बच्चों को पोलियो वायरस से बचा रहे थे.

पोलियो मिटाने के लिए प्रयोग की जाने वाली इस टीओपी वैक्सीन का विश्व के सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में विशेष स्थान  है. इसी वैक्सीन की मदद से भारत में पोलियो को खत्म किया जा चुका है. और पाकिस्तान और अफगानिस्तान में इस साल पोलियो के सिर्फ 10 मामले सामने आए हैं.

टीओपी वैक्सीन की जगह अब ये सभी देश पोलियो मिटाने के लिए बीओपी वैक्सीन का प्रयोग करेंगे.

1 मई से दुनिया के 155 देश पोलियो की परंपरागत दवा का इस्तेमाल बंद कर देंगे

पोलिये की बीमारी आंत में पाए जाने वाले एन्ट्रोववायरस से होती है. इसे पोलियो वायरस भी कहा जाता है. आंत में 3 तरह के वायरस पाए जाते हैं, टाइप-1, टाइप-2 और टाइप-3.

टीओपी वैक्सीन इन तीनों वायरसों से बचाव करने में सक्षम है. जबकि बीओपी वैक्सीन केवल टाइप-1 और टाइप-3 से बचाव करता है.

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आंत के टाइप-2 वायरस पर पूरी तरह से काबू पाया जा चुका है. भारत में 1999 के बाद इसके संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है. टाइप-1 और टाइप-3 दोनों ही अत्याधिक संक्रामक होते हैं और इनके संक्रमण से लकवे वाला पोलियो हो सकता है. टाइप-1 वायरस सबसे अधिक पाया जाता है और जबकि टाइप-3 वायरस सबसे कम पाया जाता है.

टीओपी वैक्सीन ने दुनिया से पोलियो को लगभग खत्म कर दिया. 1980 के दशक में दुनियाभर में पोलियो के करीब साढ़े तीन लाख मामले सामने आए थे. जबकि इस साल दुनिया में केवल 10 मामले  तक आ गए है. यह मामले भी पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे उन दो देशों में सामने आए है जहां यह वायरस अभी भी कुछ हद तक सक्रिय है.

आखिर इस बदलाव की आवश्यकता क्यों आन पड़ी?


इस बदलाव के पीछे मुख्यतः दो कारण हैं. पहला कारण है, चूंकि टाइप-2 वायरस को लगभग नष्ट किया जा चुका है इसलिए चलते विश्व स्वास्थ्य संगठन वैक्सीन से भी टाइप-2 को हटाना चाहता है. बीओपी वैक्सीन टाइप-2 वायरस से बचाव नहीं करेगी.

दूसरा कारण ये है कि बीओपी वैक्सीन से वैक्सीन डिप्राइव्ड पोलियो वायरस(वीडीपीवी) के टाइप-2 स्ट्रैन को खत्म करने में मदद मिलेगी.

पिछले एक दिसंबर को दिल्ली में एक 2 वर्षीय बच्चे में वीडीपीवी के टाइप-2 वायरस के स्टेरन पाए गए. इससे पहले, दिसंबर 2013 में महाराष्ट्र के बीड में ऐसा मामला सामने आया था.

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इस विलक्षण बीमारी में टीओपी वैक्सीन से ही कमजोर हो चुका वायरस शरीर में पहुंच जाता है. बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण ये कमजोर वायरस सक्रिय हो गया. डॉक्टरों के अनुसार दुर्लभ स्थितियों में ही ऐसा होता है. अगर किसी स्थिति में ये वायरस आसपास के लोगों में भी फैलने लगे तो स्थिति और खराब हो सकती है.

बीओपी वैक्सीन के प्रयोग से टीओपी वैक्सीन से होने शरीर में इस वायरस के पहुंचने की संभावना खत्म हो जाएगी. साथ ही टाइप-1 और टाइप-3 वायरस को खत्म किया जा सकेगा.

पोलियो वैक्सीन की खोज अमेरिका के एलबर्ट साबिन ने की थी. इस वैक्सीन में पोलियो कमजोर लेकिन जीवित वायरस को ओरल लिक्विड के रूप में मुंह से पिलाया जाता है. कमजोर वायरस बच्चों की आंत में जाकर एंडीबॉडी बनाना शुरू कर देता है जिससे उनकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.

क्या भारत भी नए टीके को अपनाएगा?


पर्याप्त सावधानियों के साथ यह बदलाव एक साथ 155 देशों में लागू होना है जिनमें भारत भी शामिल है. भारत प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिये अपने नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में बीओपी वैक्सीन शामिल करने के अलावा निष्क्रिय पोलियो वैक्सीन (आईपीवी) की खुराक को भी शामिल करेगा.

इस साल अबतक पूरी दुनिया में पोलियो के केवल 10 मामले सामने आए हैं

निष्क्रिय पोलियो वैक्सीन सफल होने वाली पहली पोलियो वैक्सीन है और सस्ती ओरल पोलियो वैक्सीन से पहले इसी का प्रयोग किया जाता था. इस वैक्सीन का निर्माण पोलियो वायरस को मारकर किया जाता था और इसके प्रयोग से वैक्सीन से होने वाले पोलियो का भी कोई खतरा नहीं रहता था.

दिल्ली के पल्स पोलिये सेल के विशेष कार्याधिकारी डाॅ. सीएम खनीजो के अनुसार भारत 1 मई की समय सीमा से पहले ही टीओपी वैक्सीन स्थान पर बीओपी वैक्सीन का प्रयोग करना प्रारंभ कर देगा.

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वैक्सीन से होने वाले टाइप-2 पोलियो के प्रकोप का काबू पाने के लिये, टाइप-2 वायरस से लड़ने में सक्षम मोनोवोलेंट ओपीवी (एमओपीवी) टाइप-2 का एक वैश्विक भंडार जमा कर लिया गया है.

भारत में बीते 3 वर्षो के दौरान वाइल्ड पोलियोवायरस (डब्लूपीवी) का एक भी मामला सामने नहीं आया है. डब्लूएचओ ने 2014 में दक्षिण पूर्वी एशिया को पोलियो मुक्त क्षेत्र घोषित कर दिया था.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम के निदेशक मिशेल जाफरान ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा, ‘‘हम दुनियाभर से पोलियो का खात्मा करने के बेहद करीब हैं और इसी वजह से हम वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ी और सबसे तेजी से सिंक्रोनाइन हुई वैक्सीन को अपनाने में सफल होने जा रहे हैं.’’ लक्ष्य वर्ष 2020 तक दुनियाभर से कैसे भी पोलियो को जड़ से खत्म करने का है.

First published: 23 April 2016, 21:11 IST
 
विशाख उन्नीकृष्णन @sparksofvishdom

A graduate of the Asian College of Journalism, Vishakh tracks stories on public policy, environment and culture. Previously at Mint, he enjoys bringing in a touch of humour to the darkest of times and hardest of stories. One word self-description: Quipster

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