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'राष्ट्रप्रेम' में काले धन का इस्तेमाल करते हैं ज्ञानदेव आहूजा

चारू कार्तिकेय | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST
(पत्रिका)

जब राजस्थान के बीजेपी विधायक ज्ञानदेव आहूजा को कथित 'राष्ट्रविरोधी' विश्वविद्यालयों में कंडोम की गिनती करने से फुर्सत मिली, तब वो काले धन को सफेद काम में इस्तेमाल करने में व्यस्त हो गए.

रामगढ़ के बीजेपी विधायक ने अलवर में चार जून को पत्रकारों को बताया कि राजनेताओं को काले धन का प्रस्ताव अक्सर मिलता है, लेकिन जब उनको इस तरीके का ऑफर आता है, तो वो इसे व्यक्तिगत तौर पर इस्तेमाल नहीं करते.

आहूजा ने कहा, "जब कोई मुझे काले धन का प्रस्ताव देता है, तो मैं उसे सलाह देता हूं कि इसको अच्छे उद्देश्य के लिए खर्च किया जाए. जैसे- मंदिरों और गुरुद्वारों का रख-रखाव और मरम्मत.

आहूजा ने कहा, "मैं मिले हुए काले धन का रिकॉर्ड रखने पर खास ध्यान देता हूं. उसकी बारीकी से जांच करते हुए रसीद लेता हूं, साथ ही मैं भी उन्हें रसीद देता भी हूं. कुछ लोग मुझसे पूछते हैं कि अगर ये गैर कानूनी धन है, तो फिर रसीद की क्या जरूरत है? मैं कहता हूं कि उन्होंने अच्छे काम के लिए इसे खर्च किया है, इसलिए उन्हें रसीद देने में हर्ज ही क्या है."

'जुमला' से एक कदम आगे

काले धन पर विधायक की घोषणाएं बीजेपी के लिए एक झटका है. हालांकि ज्ञानदेव आहूजा की खुले दिल से स्वीकरोक्ति के बाद उनकी पार्टी की काले धन को लेकर ईमानदारी थोड़ा और ऊंची हो गई है.

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कुछ अरसे पहले कहा था कि विदेशी बैंकों में जमा काले धन को वापस लाने का चुनावी वादा केवल एक जुमला या हथकंडा था.

अब उन्हीं की पार्टी के विधायक ने एक कदम आगे बढ़ते हुए देश की जनता को संदेश दिया है कि हकीकत में पार्टी काले धन के प्रसार में साझीदार है. वो भी रसीद के साथ.

आहूजा के बयान की खूबसूरती यहीं खत्म नहीं होती. जब भी बीजेपी उनके खुलासे पर ध्यान देगी, उसे ये जानकर खुशी नहीं होगी कि आहूजा केवल अघोषित आय के सौदे से नहीं जुड़े हैं, बल्कि उन्होंने मजबूती से लोगों को सलाह दी कि ऐसा धन पार्टी के कोष में न जमा किया जाए.

आहूजा ने कहा, "ऑफर देने वाले लोगों ने मुझसे पूछा कि ये पैसा क्या पार्टी को दान में दिया जाए, लेकिन मैंने उनसे कहा कि पार्टी के पास पर्याप्त पैसा है."

आहूजा की निजी संपत्ति पर सवाल

ज्ञानदेव आहूजा ने 2013 के विधानसभा चुनाव के दौरान शपथपत्र में अपनी संपत्ति की जो जानकारी दी थी, उस पर नजर डालें, तो पता चलता है कि काले धन का सबसे प्रचुर स्रोत माने जाने वाले रियल एस्टेट के प्रलोभन से वो खुद को दूर नहीं रख सके हैं.

आहूजा के पास जयपुर और अलवर में चार रिहाइशी संपत्ति है. जिसमें अलवर में एक फ्लैट, जयपुर में दो फ्लैट (पत्नी के साथ स्वामित्व) के अलावा राज्य की राजधानी में एक प्लॉट है.

आहूजा के दावे के मुताबिक अलवर में महंगे 5594.4 वर्गफीट के फ्लैट की कीमत 40 लाख रुपये है. वहीं जयपुर में 2400 वर्गफीट वाले दो फ्लैट की कीमत भी 40 लाख रुपये बताई गई हैै.

लेकिन इसमें सबसे आश्चर्यजनक जयपुर वाले प्लॉट की कीमत है. आहूजा का दावा है कि 2152 वर्गफीट इलाके में फैले इस प्लॉट की कीमत महज तीन लाख रुपये है.

वैसे अचल संपत्ति की कम कीमत लगाने वाले ज्ञानदेव आहूजा के साथ एक हद तक ये अन्याय होगा, क्योंकि सांसदों समेत देश के हजारों विधायक ऐसा पहले भी कर चुके हैं.

चूंकि बीजेपी नेता ने महान पारदर्शिता दिखाते हुए कबूल किया है कि वो काले धन की डील करते हैं (रसीद के साथ, ध्यान रखिए), लिहाजा ये पूरी तरीके से गलत नहीं होगा कि उनसे संपत्ति को लेकर भी पारदर्शिता की उम्मीद की जाए.

हमें अब पता है कि आहूजा एक मिशन पर हैं, जिसके तहत उन्हें दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू यूनीवर्सिटी (जेएनयू) कैंपस में रोजाना दो हजार बोतल शराब, 10 हजार सिगरेट फिल्टर, चार हजार बीड़ी, 50 हजार हड्डियों के टुकड़े, चिप्स के दो हजार पैकेट और तीन हजार इस्तेमाल किए गए कंडोम के टुकड़े मिलने के अपने दावे को साबित करना है.

ये और भी आश्चर्यजनक होगा, अगर वो ये गिनती करते हुए बता सकें कि विधायक के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान कितना काला धन लेने की रसीद उन्होंने जारी की.

First published: 6 June 2016, 2:31 IST
 
चारू कार्तिकेय @charukeya

असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़, राजनीतिक पत्रकारिता में एक दशक लंबा अनुभव. इस दौरान छह साल तक लोकसभा टीवी के लिए संसद और सांसदों को कवर किया. दूरदर्शन में तीन साल तक बतौर एंकर काम किया.

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