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जब तिहाड़ जेल में दस दिन बंद रहे थे नोबल विजेता अभिजीत बनर्जी, जानिए क्या था पूरा मामला

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 October 2019, 10:12 IST

अर्थशास्त्र का नोबेल पाने वाले अभिजीत विनायक बनर्जी दिल्ली स्थित जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं. वह 1980 के दशक में जेएनयू के छात्र रहे हैं. उनका नाम ही उनकी बंगाल और महाराष्ट्र की पहचान को बताता है. जेएनयू में पढ़ाई दौरान ही उनकी प्रतिभा सामने आने लगी थी. उस दौरान भी उनके साथियों और प्रफेसर्स ये मानने लगे थे कि वह कुछ बड़ा जरूर करेंगे. जो करीब चार दशक बाद सच साबित हो गया.उन्होंने अर्थशास्त्र में एमए में टॉप ही नहीं किया बल्कि सबसे ज्यादा ग्रेड हासिल कर सेंटर का भी रिकॉर्ड तोड़ा था.

अभिजीत की जिंदगी से जुड़ी तमाम बातों के बहुत कम ही लोग जानते हैं. पढ़ाई के दौरान वह जितने बेहतरीन छात्र थे, वह उतने ही अच्छे इंसान भी थे. जेएनयू कैंपस में रहने के दौरान वह किसी छात्र संगठन से नहीं जुड़े, लेकिन अहम मुद्दों पर वह अपनी राय रखते थे. इसी के चलते साल 1983 में जेएनयू में ऐडमिशन पॉलिसी में 'सुधार' के खिलाफ आंदोलन किया था. वह ऐसे 300 छात्रों के एक गुट में शामिल थे, जिन्हें आंदोलन करने के चलते 10 दिन तिहाड़ जेल में गुजारने पड़े थे. अभिजीत को अच्छा खाना और नई जगहों पर घूमना के बहुत शौक था. यही नहीं वह आज की ही तरह उन दिनों भी ड्रिंक भी एंजॉय किया करते थे.


बता दें कि अभिजीत केवल अर्थशास्त्र में ही शानदार स्टू़डेंट्स नहीं थे बल्कि व्यवहारिक भी थे. स्टूडेंट्स के बीच हमेशा से चर्चित रहे प्रभात पटनायक, कृष्णा भारद्वाज और अमित भादुरी जैसे टीचर्स बताते हैं कि वह कभी क्लासरूम में प्रोफेसर्स से चर्चा के दौरान बहस से पीछे नहीं हटते थे, हालांकि इस सबके बीच उन्होंने हमेशा टीचर्स का सम्मान बरकरार रखा. अभिजीत जेएनयू में पढ़ाई के लिए ऐसे ही नहीं पहुंच गए थे बल्कि वह दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स का विकल्प छोड़कर वहां पहुंचे थे. इसकी वजह यह थी कि जेएनयू का माहौल उन्हें आकर्षित करता था और उन्हें लगता था कि उन्हें इससे अर्थशास्त्र की पढ़ाई में मदद मिलेगी.

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First published: 15 October 2019, 10:11 IST
 
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