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अजित सिंह: मैंने दाना मांझी को रोका, तब तक वह 12 किलोमीटर चल चुका था

पत्रिका ब्यूरो | Updated on: 29 August 2016, 7:54 IST
(अजीत सिंह की तस्वीर)
QUICK PILL
  • ओडिशा के कालाहांडी जिले में अपनी पत्नी के शव को कंधे पर लादकर ले जाने की घटना की लाइव कवरेज करने वाले पत्रकार अजित सिंह ने उस लगभग अमर हो चुकी घटना के बारे में पत्रिका से बातचीत की. गौरतलब है कि अजित सिंह को सोशल मीडिया से लेकर व्यक्तिगत बातचीत में इस बात के लिए निशाना बनाया जा रहा है कि उन्होंने मांझी की सहायता करने की बजाय उसका वीडियो बनाया. लेकिन यह पूरा सच नहीं हैं. अजित के मुताबिक जब उनकी नजर दाना मांझी पर पड़ी तब वे दस किलोमीटर अधिक की दूरी तय कर चुके थे. ओडिसा टीवी के पत्रकार अजित सिंह से इस मसले पर हुई बातचीत के अंश:

रायपुर में कालाहांडी जिले भवानीपटना के मेडिकल अस्पताल में पत्नी के निधन के बाद उसके शव को कंधे पर ढोते हुए 12 किलोमीटर चलने वाले आदिवासी दाना मांझी की झकझोर देने वाली घटना को दुनिया के सामने लाने वाले ओडिशा के रीजनल चैनल के स्ट्रिंगर अजित सिंह ने पत्रिका से बातचीत में पूरे वाकये को बताया.

अजित ने बताया, 'मेरे पास सुबह पांच बजे कॉल आया कि एक आदमी कंधे पर अपनी पत्नी के शव को लेकर पैदल जा रहा है. यह जानकारी मिलने पर मैं अपनी बाइक से उसे ढूंढ़ने निकला. करीब 12 किमी दूर वह सुबह साढ़े छह बजे मुझे सगड़ा गांव के पास मिला. उसके साथ उसकी 14 साल की बेटी सना भी थी, जो रोते हुए जा रही थी.'

अजित आगे बताते हैं, 'मैंने उन्हें रोककर पूछा, क्या हो गया? उसने बताया, रात में अस्पताल वालों ने कहा, उसकी पत्नी की मौत हो गई और वह जल्दी से इसे ले जाए. मांझी ने वहां आसपास लोगों से पूछा कि वह क्या करे? किसी ने उसको बताया कि अटेंडेंट के पास जाओ. वह वहां गया तो उसे ताला लटका मिला.'

ओडिशा सरकार ने मृत पत्नी के शव को कंधे पर ढोने वाली घटना की जांच के दिए आदेश

वह कुछ समझ नहीं पा रहा था. उसने चादर और लुंगी में शव को लपेटा और सुबह तीन-चार बजे बेटी के साथ निकल गया. अजित बताते हैं, 'मैंने कहा इस पेड़ के नीचे रुक जाओ, मैं तुम्हारे लिए कुछ करता हूं. मैंने करीब 7 बजे डीएम को फोन लगाया तो उन्होंने कहा, मैं सीडीएमओ को बोल देती हूं. मैंने सीडीएमओ को फोन लगाया तो उन्होंने कहा, मैं कुछ करता हूं.'

वो आगे कहते हैं, 'एक घंटे तक कोई नहीं आया तो मैंने स्थानीय बालाजी मंदिर सुरक्षा समिति के प्रमोद खमारी को एंबुलेंस के लिए फोन लगाया और बताया कि आदिवासी पैसे नहीं दे सकता. तो उन्होंने कहा, कोई बात नहीं. मैं 15-20 मिनट में गाड़ी भिजवाता हूं. इसके बाद मैंने स्थानीय विधायक लालजी को फोन लगाया तो उन्होंने उनके प्रतिनिधि गोविंद को भेजा. एंबुलेंस के पहुंचने पर गोविंद ने मांझी को 3,000 रुपए दिए और उसके 60 किमी दूर गांव के लिए रवाना किया. इसके बाद मैंने अपने ऑफिस में इसकी सूचना और खबर भेजी.'

मेडिकल स्टाफ को बताया जिम्मेदार

पत्रकार अजित सिंह ने कहा, घटना के बाद जिला प्रशासन की किरकिरी होने के बाद जांच की गई, जिसमें ऑन ड्यूटी मेडिकल स्टाफ और सिक्यूरिटी स्टाफ को जिम्मेदार बताया जा रहा है.

डीएम ने उलटा दाना मांझी पर पत्नी को मारने लगाया आरोप

घटना के बाद दाना मांझी को पूछताछ के लिए वापस कालाहांडी बुलाया गया. डीएम ने मांझी से कहा, तुमने पहले अपनी पत्नी को मार दिया और उसके बाद चुपचाप उसे लेकर चले गए. मांझी ने जवाब दिया, यदि मैं पत्नी को मारता तो फिर उसे कंधे पर रखकर ही लेकर क्यों ले जाता. 

पत्नी के अंतिम संस्कार में नहीं हो पाया शामिल

अजित सिंह ने बताया, मांझी के गांव में आदिवासी परंपरा के मुताबिक पत्नी का अंतिम संस्कार किया जाना था, लेकिन सरकारी अफसरों ने उसके गांव पूछताछ करने की जाने की बजाय उसे मुख्यालय बुलवाया, जिससे वह पत्नी के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो सका.

First published: 29 August 2016, 7:54 IST
 
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