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'अटल' किस्से: जब इंटरव्यू लेने गए रिपोर्टर के डर को अटल बिहारी ने ऐसे भगाया

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 August 2018, 16:19 IST
(file photo )

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी चिरनिद्रा में सो गये हैं. वाजपेयी देश के सबसे लोकप्रिय नेता थे. पूरा देश उनके शोक में डूबा हुआ है. अटल बिहारी वाजपेयी को अत्यंत करीब से देखने समझने वाले प्रद्युम्न तिवारी ने उनको याद करते हुए कहा है कि इस समय कुछ कहने में गला भर जा रहा है. तिवारी अटल की कर्मभूमि रहे उनके निर्वाचन क्षेत्र लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्होंने अटल विहारी वाजपेयी को याद करते हुए बताया कि जब से होश संभाला है अटल जी ही आखों में बसे हैं. मैंने उनको शुरुआत से ही ऐसे देखा है, जैसे वो एक सामन्य नागरिक हों.

टाइम्स ऑफ इंडिया के खबर के मुताबिक, प्रद्युम्न तिवारी ने बताया कि मुझे अटल जी से बात करने में कभी झिझक नहीं हुई. मेरे पिता शुरुआत से ही अटलजी से जुड़े रहे. आजादी से पहले कुछ दिन तक अटलजी लखनऊ में हमारे आवास पर ठहरे थे. इसके चलते उनका अटलजी के साथ जुड़ाव रहा था. उन्होंने बताया कि अटल जी के लखनऊ आने के दौरान मैंने उनसे पूछा कि आप राजनीति में क्यों आये जबकि आपकी लेखनी प्रबल है. इस पर अटल बोले कि राजनीति में आने का मकसद कोई धन कमाना नहीं होता, राजनीति देश सेवा के लिए है और इसे बखूबी निभा भी रहा हूं.


तिवारी ने बताया कि अटलजी के एक साक्षात्कार को याद करते हुए कहा कि 1984 में पत्रकारिता के क्षेत्र में नया नया था. अटल जी लखनऊ आये और मीराबाई मार्ग स्थित राज्य अतिथि गृह के कमरा संख्या—एक में ठहरे हुए थे. मैं अपने अखबार के लिए साक्षात्कार लेने पहुंच गया. मैंने उनको अपना परिचय दिया. हालांकि शुरुआत में कुछ डर भी लग रहा था कि इतने बड़े नेता का साक्षात्कार कैसे करूंगा. लेकिन परिचय देने के बाद उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि पूछो क्या पूछना चाहते हो.

मैंने अटल जी और लालकृष्ण आडवाणी के उस दौर के मतभेदों को लेकर सवाल किया कि आप में और आडवाणी में मतभेद हैं फिर पार्टी किस तरह से पटरी पर सुचारू रूप से चलेगी. इस सवाल पर अटलजी ने मुस्कुरा कर अपनी चिर परिचित शैली में उत्तर दिया कि कोई मतभेद नहीं है. हम लोगों में विचार विनिमय होता है. इसको मतभेद का नाम देना उचित नहीं है.’

इसके बाद मैंने दूसरा सवाल किया कि क्या विपक्ष में 1977 जैसी एकता हो पाएगी, तो जवाब आया कि हम आशान्वित हैं. अगर सत्ता का पहिया पटरी से उतर रहा है तो विपक्ष का कर्तव्य है कि वो मिलकर इसको संभाले. मेरा अगला सवाल था कि इसकी पहल पहले कौन करेगा. इस पर उन्होंने कहा, हम करेंगे’तिवारी ने कहा कि अटलजी की वजह से ही आज राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) अस्तित्व में है. उनमें वैचारिक मतभेदों को राजनीतिक मतैक्य में बदलने की अदभुत कला थी.

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First published: 17 August 2018, 16:19 IST
 
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