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पुरानी है श्रीश्री रविशंकर और केजरीवाल की जुगलबंदी

पाणिनि आनंद | Updated on: 10 February 2017, 1:50 IST
QUICK PILL
  • दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लगभग हर बात पर विरोध करते हैं. लेकिन श्री श्री रविशंकर के कार्यक्रम को दोनों का समर्थन है.
  • अरविंद केजरीवाल और श्री श्री रविशंकर का साथ इंडिया अंगेस्ट करप्शन के जमाने से है. केजरीवाल के उनके निजी और राजनीतिक संबंध अच्छे रहे हैं.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी के रूप में पेश करना पसंद करते हैं. लेकिन एक मुद्दे पर दोनों एक पाले में खड़े नजर आ रहे हैं.

वो मुद्दा है श्री श्री रविशंकर के आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा यमुना के तट पर कराया जा रहा तीन दिवसीय (11, 12 और 13 मार्च) सांस्कृतिक कार्यक्रम.

केजरीवाल और मोदी दोनों ही इस कार्यक्रम के समर्थन में हैं. जबकि पर्यावरण एक्टिविस्ट इस कार्यक्रम का विरोध कर रहे हैं.

खबरों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कार्यक्रम का उद्घटान करने वाले हैं. केंद्र सरकार ने कार्यक्रम को 2.25 करोड़ रुपये का अनुदान भी दिया है.

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केजरीवाल ने लंबी चुप्पी के बाद शुक्रवार को ट्वीट करके कार्यक्रम का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि एनजीटी के फैसले के बाद इसपर राजनीति बंद कर देनी चाहिए.

उनका बयान हैरान करने वाला है क्योंकि वो खुद को पर्यावरण का बड़े पैरोकार के रूप में पेश करते रहे हैं. उन्होंने राजधानी के वायू प्रदूषण को बड़ा मुद्दा बनाते हुए गाड़ियों के सम-विषम फार्मूले का प्रयोग किया.

जब बात यमुना और उसके तट को होने वाले नुकसान की आई तो केजरीवाल ने उसपर आंखें मूंद लीं. 

पर्यावरण एक्टिविस्टों के अनुसार यमूना के डूब के क्षेत्र को इस कार्यक्रम को भारी नुकसान पहुंचेगा. लेकिन पर्यावरण प्रेमी केजरीवाल इसपर एक शब्द नहीं बोले.

आम आदमी पार्टी के नेता इस मुद्दे पर कोई भी बात नाम न जाहिर करने के शर्त पर करते हैं. वो इसे केंद्र और कार्यक्रम के आयोजकों के बीच का मुद्दा बताते हैं.

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बुधवार को एनजीटी ने कार्यक्रम के आयोजकों पर पांच करोड़ का जुर्माना लगाते हुए इसे आयोजित करने की अनुमति दे दी.

इसके बाद ही केजरीवाल ने शुक्रवार को ट्वीट किया. जाहिर है तीन दिन के कार्यक्रम में एक मेहमान केजरीवाल भी हैं.

ऐसे में ये सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर दिल्ली के मुख्यमंत्री श्रीश्री रविशंकर पर इतने मेहरबान क्यों हैं?

इस मेहरबानी की वजह समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना होगा. याद कीजिए जब अगस्त, 2011 में इंडिया अंगेस्ट करप्शन(आईएसी) और सरकार के बीच गतिरोध पैदा हुआ तो आईएसी के वार्ताकारों में रविशंकर भी शामिल थे.

रविशंकर की इवेंट मैनेजमेंट टीम ने केजरीवाल और उनके आंदलोन के मीडिया कवरेज समेत तमाम चीजों में मदद की थी. रविशंकर के चेलों से केजरीवाल के आंदोलन में भारी संख्या में शामिल होने की अपील की गयी थी. केजरीवाल के लिए उस समय ऐसे समर्थन की बहुत जरूरत थी.

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रविशंकर के अलावा योग गुरु बाबा रामदेव से भी केजरीवाल के करीबी रिश्ते रहे हैं. रामदेव और रविशंकर की कार्यशैली अलग-अलग है. जहां रामदेव को मंच पर सामने रहना पसंद है तो रविशंकर पर्दे के पीछ से काम करना पसंद करते हैं.

शायद यही वजह है कि आईएसी के शुरुआती दौर में केजरीवाल के संग रामदेव ज्यादा नजर आते थे. लेकिन कम दिखायी देने से केजरीवाल के लिएरविशंकर का निजी और राजनीतिक महत्व कम नहीं हो जाता.

जाहिर ऐसे में रविशंकर को दिल्ली अपने घर जैसी लग रही होगी. क्योंकि इस समय दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल हैं और देश के पीएम नरेंद्र मोदी.

First published: 11 March 2016, 4:26 IST
 
पाणिनि आनंद @paninianand

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बीबीसी हिन्दी, आउटलुक, राज्य सभा टीवी, सहारा समय इत्यादि संस्थानों में एक दशक से अधिक समय तक काम कर चुके हैं.

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