Home » इंडिया » where lord rama did penance after ravan death
 

रावण वध के बाद भगवान राम ने इस मंदिर में किया था तप

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 August 2020, 15:29 IST

राजनीतिक सत्ता और उसके संघर्ष के चलते भारत की सीमाओं में हमेशा बदलाव होता रहा है. भारत के राष्ट्र के रूप में विकास में आदि शंकराचार्य का बहुत बड़ा योगदार है.शंकराचार्य ने नवीं शताब्दी के प्रारंभ में देश के चार दिशाओं में चार धाम उत्तर में केदारनाथ, दक्षिण में रामेश्वर, पूर्व में जगरनाथ पुरी और पश्चिम में श्रंगेरी मठ की स्थापना कर, भौगोलिक सीमाओं को काफी हद सुनिश्चित करने के साथ ही देशवासियों से इन चारों धामों पर तीर्थ स्थल का आवाह्न किया.

इन चार धामों के अलावा 108 विश्वमूर्ति यानि ऐसे विराट मंदिरों की स्थापना की जिनके मंदिर के रूप में भगवान द्वारा स्वयं स्थापित होने की मान्यता है. इसी मान्यता को लेकर उत्तराखंड में तीन मंदिर हैं. जिसमें कहा जाता है कि रघुनाथ मंदिर देवप्रयाग, नरसिंह मंदिर जोशीमठ और भगवान श्री बद्रीनाथ इन स्थानों पर भगवान खुद प्रकट होकर अपना स्थान सिद्ध किया.


ऐसे में उत्तराखंड के देवप्रयाग जहां भागीरथी और अलकनंदा नदी मिलकर गंगा का निर्माण करती हैं. इस संगम तट पर आदि गुरु शंकराचार्य ने अपने उत्तराखंड भ्रमण के दौरान लंबा प्रवास किया और इस स्थान पर ही पूर्व से भगवान राम ने भी कठोर तप किया था.

कहा जाता है कि राम भगवान रावण की हत्या के बाद ब्राह्मण होने के कारण ब्राह्मण हत्या के अभिशाप से ग्रस्त थे. इस अभिशाप से मुक्ति पाने के लिए राम भगवान ने यहां कठोर तप किया. यहां पर सिर्फ राम भगवान की ही अकेले की मूर्ति है.

Ganesh Chaturthi 2020 : आज भी इस गुफा में रखा है भगवान गणेश का कटा हुआ सिर, जानिए इससे जुड़ा हुआ रहस्य

 

लेकिन मान्यता ये भी है कि हनुमान लला राम भगवान का साथ कभी नहीं छोड़ते थे. जब भगवान राम यहां अकेले तप कर रहे थे तब राम भगवान की इच्छा के बगैर हनुमान जी देवप्रयाग पहुंचे और जहां पर राम भगवान तपस्या में लीन थे ठीक उसी के पीछे हनुमान जी जा कर बैठ गए. इसी के चलते रघुनाथ मंदिर देवप्रयाग के ठीक पीछे हनुमान जी का भी मंदिर है.

बताते चलें कि द्रविम शैली में बना रघुनाथ मंदिर में देवप्रयाग में 11वीं शताब्दी की शुरुआत में ही यहां विशिष्टा द्वैतवाद के जनक रामानुजारचार्य जी ने भी कुछ समय यहां रुक कर तपस्या की थी. रामानुजारचार्य जी को लेकर ये कहा जाता है कि वो अपनी भक्ति परंपरा में रामानंद और कबीर दास जैसे संत हुए थे.

रामानुजारचार्य ने यहां राम भगवान, देवप्रयाग, संगम और देवभूमि उत्तराखंड के आध्यात्मिक महत्व का वर्णन करते हुए 11 पदों की रचना की. ये सभी पद तमिल भाषा में रघुनाथ मंदिर पर आज भी चस्पा हैं.

krishna janmashtami 2020 : इस जन्माष्टमी को बन रहा है वृद्धि योग, कान्हा को खुश करने के लिए करें ये विशेष उपाय

First published: 13 August 2020, 15:29 IST
 
अगली कहानी