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क्या है घर से गायब हुए आईएएस आनंद जोशी का मामला?

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 May 2016, 8:53 IST

भारत के गृह मंत्रालय में अंडर-सेक्रेटरी आनंद जोशी बुधवार को घर से लापता हो गए. विभिन्न एनजीओ को मिलने वाले विदेशी चंदे से जुड़े कानून एफसीआरए में कथित धांधली के मामले में सीबीआई ने उनसे मंगलवार को पूछताछ की थी. बुधवार को भी एजेंसी उनसे पूछताछ करने वाली थी.

ये मामला तब का है जब जोशी गृह मंत्रालय के फॉरेनर्स डिविजन में नियुक्त थे. सोमवार को सीबीआई ने दावा किया कि जोशी के पास से करीब सात लाख रुपये और गृह मंत्रालय तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए. सीबीआई ने उनके घर और दफ्तर समेत चार जगहों पर छापे मारे थे.

सीबीआई ने जोशी के इंदिरापुरम स्थित आईसीआईसीआई बैंक स्थित लॉकर की भी जांच की. हालांकि एजेंसी ने उनके बैंक से मिली जानकारी को साझा करने से इनकार कर दिया.

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जोशी ने दावा किया है कि वो बेगुनाह हैं और उन्हें फंसाया जा रहा है. उनका दावा है कि उनके ऊपर के अधिकारियों ने कुछ एनजीओ को छूट देने के लिए उनपर दबाव डाला था.

खबरों के अनुसार जोशी ने दावा किया है कि गृह मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी बीके प्रसाद ने उन्हें धमकी दी और दबाव डाला. प्रसाद ने उन्हें फोर्ड फाउंडेशन पर सकारात्मक टिप्पणी करने के लिए कहा था, जिससे उन्होंने इनकार कर दिया था.

आनंद जोशी पर तीस्ता सीतलवाड़ के दो एनजीओ से जुड़े मामलों में धांधली का आरोप है

प्रसाद ने खुद पर लगे आरोपों को निराधार बताया. प्रसाद ने एक न्यूज एजेसी से कहा, "मामला सीबीआई के पास है, जो देश की सबसे विश्वसनीय जांच सस्था है. मुझे पूरा भरोसा है कि सच सामने आ जाएगा. जोशी जो कह रहे हैं वो सब बकवास है."  तमिलनाडु कैडर के आईएएस 30 मई को रिटायर होने वाले हैं.

पिछले महीने सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह और एडवोकेट आनंद ग्रोवर ने आरोप लगाया था कि गृह मंत्रालय चुनिंदा तौर पर कुछ दस्तावेज लीक कर रहा है. ये दोनों वकीलों लॉयर्स कलेक्टिव नामक संस्था से जुड़े हुए हैं.

मीडिया में खबरें आईं कि गृह मंत्रालय ने लॉयर्स कलेक्टिव नामक एनजीओ को 'कारण बताओ' नोटिस जारी किया है. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए जयसिंह ने एक बयान में कहा, "एफसीआरए कानून के तहत संबंधित जानकारी को गोपनीय रखा जाता है. लेकिन गृह मंत्रालय के कुछ अधिकारी इन जानकारियों को लीक कर रहे हैं जिससे लॉयर्स कलेक्टिव के खिलाफ माहौल बनाया जा सके."

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मार्च में गृह मंत्रालय ने फोर्ड फाउंडेशन को 'पूर्व अनुमति' सूची से हटा दिया था. संस्था को गुजरात सरकार की एक रिपोर्ट के बाद 'पूर्व अनुमति' सूची में रखा गया था. गुजरात सरकार ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि संस्थान भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले एनजीओ जस्टिस एंड पीस और सबरंग ट्रस्ट को फंड देता है.

ये दोनों एनजीओ सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ चलाती हैं. फोर्ड फाउंडेशन को जब सरकार ने 'पूर्व अनुमति' सूची में डाला था तो उसपर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी प्रतिक्रिया हुई थी.

मुकदमा


जोशी पर पांच मई को भारतीय दंड संहिता(आईपीसी) की धारा 120-बी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है.

सीबीआई की तरफ जारी एक बयान में कहा गया है, "इस सरकारी अधिकारी पर आरोप है कि जब वो गृह मंत्रालय में अंडर सेक्रेटरी थे तब वो भ्रष्टाचार में लिप्त थे. उन्होंने एफसीआरए के तहत पंजीकृत कई एनजीओ/सोसाइटियों को मनमाने ढंग से नोटिस भेजे थे. इन एनजीओ को काफी विदेशी चंदा मिल रहा था."

आनंद जोशी का कहना है कि उन्हें तीस्ता सीतलवाड़ के एनजीओ मामले में फंसाया जा रहा है

सीबीआई के बयान में कहा गया है, "इस अधिकारी ने इनमें से कुछ संस्थाओं से अनुचित लाभ लिया."

खबरों के अनुसार जोशी तब संदेह के घेरे में आए जब गृह मंत्रालय के अधिकारियों को पता चला कि तीस्ता सीतलवाड़ के एनजीओ सबरंग से जुड़ी फाइलें मंत्रालय से गायब हैं.

सितंबर 2015 में सबरंग का एफसीआरए लाइसेंस निलंबति कर दिया गया था और एनजीओ से 180 दिन के अंदर स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया था. संस्था ने अक्टूबर में मंत्रालय को जवाब भेजा.

मंत्रालय ने संबंधित अधिकार से गायब फाइलों को बारे में पूछताछ भी की. हालांकि खबरों के अनुसार बाद में ये फाइलें मिल गईं.

जोशी ने एक समाचार एजेंसी से कहा, "सारी फाइलें गृह मंत्रालय में ही मिल गईं. वहां लगे सीसीटीवी कैमरों से इसकी पुष्टि की जा सकती. मेरे खिलाफ साजिश की जा रही है. मैंने ग्रीनपीस, फोर्ड फाउंडेशन और तीस्ता सीतलवाड़ के दो एनजीओ पर प्रतिकूल टिप्पणियां की थीं."

First published: 12 May 2016, 8:53 IST
 
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