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यूपी बीजेपीः सिंह चाहते सिंह, शाह चाहें सिन्हा

पाणिनि आनंद | Updated on: 21 March 2016, 22:32 IST
QUICK PILL
  • बीजेपी सूत्रों के अनुसार यूपी बीजेपी अध्यक्ष पद के लिए रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा का नाम तय हो चुका था. लेकिन कई वरिष्ठ नेताओं के विरोध के कारण आधिकारिक घोषणा नहीं हो सकी.
  • बीजेपी नेताओं का एक खेमा लोध नेता धर्मपाल सिंह को यूपी बीजेपी का नया अध्यक्ष बनवाना चाहता है. अगले साल होने वाले विधान सभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है ये फैसला.

क़रीब छह हफ्ते पहले बीजेपी ने अगले यूपी अध्यक्ष पद के लिए मनोज सिन्हा का नाम तय कर लिया था. लेकिन इस फैसले की घोषणा में हो रही देरी से संकेत मिल रहा है कि पार्टी के अंदर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है.
 
फिलहाल सिन्हा केंद्र में रेल राज्यमंत्री हैं. बीजेपी के सूत्रों की मानें तो सिन्हा के नामपर बीजेपी के कई वरिष्ठ नेताओं को एतराज है. ये नेता यूपी में बीजेपी के चेहरे माने जाते हैं. ये नेता यूपी के ओबीसी नेता धर्मपाल सिंह को यूपी बीजेपी का अक्ष्यक्ष बनाए जाने की मांग कर हैं.

सूत्रों के अनुसार गृहमंत्री और इस समय राष्ट्रीय राजनीति में यूपी के सबसे बड़े नेता राजनाथ सिंह भी सिन्हा की जगह धर्मपाल का समर्थन कर रहे हैं. पार्टी के संगठन सचिव रामलाल और यूपी बीजेपी के प्रभारी ओपी माथुर भी धर्मपाल के पक्ष में हैं.

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यूपी बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कैच को बताया, "अमित शाह और मोदी के करीबी माथुर की यूपी बीजेपी अध्यक्ष पद को लेकर अमित शाह से अलग राय है. माथुर किसी ऐसा नेता को यूपी बीजेपी की कमान दिलाना चाहते हैं जो राज्य की जातीय समीकरण में फिट बैठे और पार्टी को राज्य में आगे ले जा सके."

यूपी बीजेपी अध्यक्ष पद के लिए मनोज सिन्हा और धर्मपाल सिंह के बीच बीजेपी विभाजित

सिन्हा भी राजनाथ सिंह की तरह पूर्वी यूपी से आते हैं. राजनाथ सिंह नहीं चाहते कि पूर्वांचल का कोई दूसरा नेता इस क्षेत्र से उभरे.

बीजेपी नेता कहते हैं, "राजनाथ सिंह इस समय प्रदेश में रैलियां कर रहे हैं. वो प्रदेश के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से हैं. केंद्र में यूपी के सबसे हाई प्रोफाइल मंत्रालय वाले नेता भी वही हैं. ऐसी स्थिति में राजनाथ सिंह की मर्जी के खिलाफ जाना मुश्किल होगा."

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अगले साल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. सभी राजनीतिक पार्टियां अभी से आगामी चुनाव को ध्यान में रखते हुए अपनी-अपनी तैयारी शुरू कर चुकी हैं.

लोक सभा चुनाव (2014) में प्रदेश की 80 में से 73 सीटें बीजेपी गठबंधन को मिली थी. जबकि राज्य विधानसभा (2012) में उसके केवल 47 विधायक हैं. प्रदेश में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं.

बीजेपी के ऊपर प्रदेश में विधानसभा चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करने का अतिरिक्त दबाव है. पार्टी लोकसभा चुनावों में अपने प्रदर्शन को 2017 के विधानसभा चुनावों में दोहराना चाहेगी.

इसके बावजूद यूपी अध्यक्ष पद को लेकर बीजेपी के अंदरखाने चल रही असमंजस खत्म होने का नाम नहीं ले रही.

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जनवरी में पार्टी ने सारा गुणा-गणित लगाकर बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बावजूद राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर अमित शाह को बरकरार रखा. तब ये माना गया कि लोकसभा में यूपी प्रभारी रहे शाह को 2017 विधानसभा चुनावों के मद्देनजर ही दोबारा पार्टी अध्यक्ष बनाया गया है.

सूत्रों के अनुसार कल्याण सिंह और उमा भारती नहीं चाहते कि धर्मपाल सिंह लोध नेता के रूप में यूपी में उभरे

उस समय ये भी कहा गया था कि अमित शाह के दोबारा राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के तत्काल बाद यूपी बीजेपी अध्यक्ष की घोषणा कर दी जाएगी. पहले ये घोषणा जनवरी के आखिरी हफ्ते में होनी थी लेकिन नहीं हुई.

पहले करीब एक दर्जन नेताओं के नाम इस पद के लिए सामने आए. बाद में लोध नेता धर्मपाल सिंह और मनोज सिन्हा अंतिम दो के तौर पर उभरे.

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माना जाता है कि धर्मपाल सिंह का नाम राजनाथ सिंह ने बढ़ाया है. जबकि मनोज सिन्हा को अमित शाह का वफादार और नजदीकी माना जाता है.

बीजेपी के सूत्रों के अनुसार बीजेपी के प्रमुख लोध नेता कल्याण सिंह (राजस्थान के गवर्नर) और उमा भारती (केंद्रीय मंत्री) भी नहीं चाहते कि यूपी से कोई दूसरा लोध नेता उभरे.

दोनों प्रत्याशियों के पक्ष-विपक्ष में कद्दावर नेताओं के अड़े या खड़े होने के कारण बीजेपी यूपी बीजेपी अध्यक्ष पद के चयन के असमंजस से निकल नहीं पा रही है.

First published: 21 March 2016, 22:32 IST
 
पाणिनि आनंद @paninianand

Senior Assistant Editor at Catch, Panini is a poet, singer, cook, painter, commentator, traveller and photographer who has worked as reporter, producer and editor for organizations including BBC, Outlook and Rajya Sabha TV. An IIMC-New Delhi alumni who comes from Rae Bareli of UP, Panini is fond of the Ghats of Varanasi, Hindustani classical music, Awadhi biryani, Bob Marley and Pink Floyd, political talks and heritage walks. He has closely observed the mainstream national political parties, the Hindi belt politics along with many mass movements and campaigns in last two decades. He has experimented with many mass mediums: theatre, street plays and slum-based tabloids, wallpapers to online, TV, radio, photography and print.

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