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हिमाचल प्रदेश: भजपा पशोपेश में, मुख्यमंत्री पद का दावेदार कौन? धूमल या नड्डा

आकाश बिष्ट | Updated on: 16 September 2016, 7:53 IST
QUICK PILL
  • हिमाचल प्रदेश भाजपा अभी तय नहीं कर पा रही है कि 2017 के विधानसभा चुनावों मे पार्टी का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार कौन होगा? जेपी नड्डा या दो बार राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके प्रेम कुमार धूमल?
  • प्रदेश भाजपा नेताओं का मानना है कि धूमल आज भी प्रदेश भाजपा में काफी प्रभावशाली हैं और इसीलिए आगे हैं लेकिन नड्डा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से नजदीकियां धूमल के लिए चिंता का विषय है.

हिमाचल प्रदेश भाजपा अभी तय नहीं कर पा रही है कि 2017 के विधानसभा चुनावों मे पार्टी का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार कौन होगा? जेपी नड्डा या दो बार राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके प्रेम कुमार धूमल?

प्रदेश भाजपा नेताओं का मानना है कि धूमल आज भी प्रदेश भाजपा में काफी प्रभावशाली हैं और इसीलिए आगे हैं लेकिन नड्डा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से नजदीकियां धूमल के लिए चिंता का विषय है.

यहां तक कि हाल ही में नड्डा ने ऐसा बयान भी दिया था कि अगर पार्टी चाहे तो वह 2017 के विधानसभा चुनावों में भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हो सकते हैं. इस बयान ने पार्टी को और असमंजस में डाल दिया है. अब तक धूमल के पीछे चल रही भाजपा के लिए इस बयान से उलझन बढ़ गई है.

पूर्व में जून 2016 में कुल्लू में आयोजित भाजपा प्रशिक्षण शिविर के दौरान नड्डा ने संकेत दिए थे कि वे 2017 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की राजनीति में सक्रिय होना चाहते हैं. उन्होंनेे कहा था- ‘मैं पार्टी का वफादार सदस्य हूं. मैंने दिल्ली में पार्टी की सेवा करने के लिए हिमाचल में कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. आज भी मैं पार्टी हाईकमान द्वारा दिए जाने पर कोई भी जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार हूं.'

भाजपा के सर्वाधिक शक्तिशाली लोगों के करीबी माने जाने वाले नड्डा ने अपने भविष्य का फैसला हाईकमान पर छोड़ दिया है. माना जा रहा है कि अगर पार्टी हाईकमान का समर्थन हासिल नहीं होता तो नड्डा कभी ऐसा बयान नहीं देते, खास तौर पर शाह का.

खैर, प्रदेश पार्टी नेताओं को आशंका है कि वे प्रदेश राजनीति में केंद्रीय भूमिका में आ जाएंगे और इसके परिणाम गंभीर होंगे.

गोपनीयता बनाए रखने की शर्त पर एक भाजपा नेता ने कहा, ‘अगर नड्डा मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित कर दिए जाते हैं तो भाजपा को एक और कार्यकाल के लिए विपक्ष में बैठना पड़ेगा. प्रधानमंत्री और शाह के साथ नजदीकियों के अलावा राज्य में उनका कोई जनाधार नहीं है.’

माना जाता है कि धूमल के साथ मतभेदों के चलते ही 2010 में नड्डा को राज्य के वन मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था

साथ ही उन्होंने कहा हिमाचल में एक बार कांग्रेस और एक बार भाजपा सत्ता में आती है; अगर धूमल को छोड़ नड्डा को अधिक प्राथमिकता दी गई तो यह इतिहास बदल सकता है. यहां तक कि कांग्रेस मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोप भी कांग्रेस को सत्ता में लौटने से नहीं रोक पाएंगे.

धूमल और नड्डा के बीच 36 का आंकड़ा है. माना जाता है कि धूमल के साथ मतभेदों के चलते ही 2010 में नड्डा को राज्य के वन मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था. नड्डा के प्रदेश की राजनीति से बाहर होने और राष्ट्रीय भूमिका के लिए दिल्ली भेजे जाने पर धूमल ने राहत की सांस ली थी.

वन मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष नितिन गडकरी ने उनके संगठनात्मक कौशल को देख नड्डा से कहा था कि वे पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव का पद संभालें. इस बीच,नड्डा मोदी और अमित शाह को प्रभावित करने में कामयाब रहे और उन्हें केंद्र में भाजपा सरकार में स्वास्थ्य मंत्री का पद दे दिया गया.

आरएसएस के साथ नड्डा का संबंध पुराना है. वे अखिल भारतीय विद्याार्थी परिषद के छात्र नेता रहे और बाद में 2001 से 2004 के बीच भारतीय जनता युवा मोर्चा में रहते हुए गडकरी और शाह दोनों के साथ काम किया है. 

और तो और एक बार उन्हें पूर्व भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह के विकल्प के तौर पर भी देखा जा रहा था. हालांकि बाद में शाह भाजपा अध्यक्ष बने, लेकिन नड्डा के इस नए भाजपा अध्यक्ष से काफी अच्छे संबंध रहे.

परन्तु राज्य में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनने के लिए धूमल निश्चित रूप से उनकी राह में रोड़ा हैं, क्योंकि उनके पास पार्टी की प्रदेश इकाई का समर्थन है. तीन बार पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष रह चुके सतपाल सत्ती ने धूमल की मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदारी का पुरजोर समर्थन किया है.

हमीरपुर जिले के लोकप्रिय नेता धूमल 1998 और 2007 में राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं.

हाल ही में उन्होंने कहा था, ‘अगले विधानसभा चुनाव प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व में लड़े जाएंगे, क्योंकि उन्हें राज्य की राजनीति का अच्छा अनुभव है.’

हमीरपुर जिले के लोकप्रिय नेता धूमल 1998 और 2007 में राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और अपने व्यापक जनाधार के लिए जाने जाते हैं. 

उनका दावा है कि वे केंद्रीय नेतृत्व के भी काफी करीब हैं और नड्डा को कड़ी चुनौती दे रहे हैं, जिन्हें प्रदेश राजनीति में स्वयं को साबित करना अभी बाकी है और यह भी कि वे सबको साथ लेकर चल पाएंगे या नहीं.

धूमल को इस बात के लिए चहुंओर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है कि वे अपने बेटे अनुराग ठाकुर को राज्य और देश की राजनीति में बढ़ाने में लगे हैं, जिससे कई युवा नताओं को तकलीफ है. एक और भाजपा नेता ने कहा, ‘वे भले ही नड्डा को प्रोजेक्ट कर रहे हों लेकिन धूमल को दरकिनार करना आसान नहीं है, जिनकी पार्टी पर मजबूत पकड़ है.'

इन परिस्थितियों में यह तय करना मुश्किल हो गया है कि पार्टी किसके नेतृत्व में अगला विधानसभा चुनाव लड़ेगी और प्रदेश इकाई में उथल-पुथल मची है. लगता है अंतिम निर्णय पार्टी हाईकमान का ही होगा लेकिन जो भी हो, इसका कुछ न कुछ तो नकारात्मक असर पड़ेगा. 

कांग्रेस जरूर इस उम्मीद मे होगी कि अगर नड्डा को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया जाता है तो उन्हें फिर से सत्ता पर काबिज होने का मौका मिलेगा.

First published: 16 September 2016, 7:53 IST
 
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