Home » इंडिया » Who will lead the Congress into UP2017? Uncertainty grips party
 

उत्तर प्रदेश में छोटी समस्याओं में उलझी कांग्रेस

आकाश बिष्ट | Updated on: 24 June 2016, 7:33 IST
QUICK PILL
  • उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी में पार्टी के पदाधिकारियों को लेकर जारी अनिश्चितता की वजह से राज्य में पार्टी के प्रचार अभियान को नुकसान हो रहा है.
  • कांग्रेस के वाइस प्रेसिडेंट राहुल गांधी फिर से 23 दिनों की छुट्टी पर देश से बाहर जा चुके हैं. ऐसे में राज्य कांग्रेस के नेताओं के सामने पार्टी में होने वाले बदलाव को लेकर आशंकाएं पैदा हो गई हैं.
  • साथ ही कांग्रेस ने प्रशांत किशोर को उत्तर प्रदेश के चुनावी अभियान की कमान सौंपी है. खबरों की माने तो किशोर के काम के तरीकों को लेकर उत्तर प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व अधिक सहज नहीं है.

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी में पार्टी के पदाधिकारियों को लेकर जारी अनिश्चितता की वजह से राज्य में पार्टी के प्रचार अभियान को नुकसान हो रहा है. 

कांग्रेस के वाइस प्रेसिडेंट राहुल गांधी फिर से 23 दिनों की छुट्टी पर देश से बाहर जा चुके हैं. ऐसे में राज्य कांग्रेस के नेताओं के सामने पार्टी में होने वाले बदलाव को लेकर आशंकाएं पैदा हो गई हैं. इस पूरी अनिश्चितता से पार्टी के चुनाव अभियान को धक्का लग रहा है.

इस बीच खबरों के मुताबिक उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रमुख निर्मल खत्री ने अपना इस्तीफा पार्टी आलाकमान को सौंप दिया है. हालांकि पार्टी आलाकमान ने इस बारे में कोई फैसला नहीं लिया है. खत्री ने सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की थी और सूत्रों की माने तो उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपना इस्तीफा सौंपा है.

गुलाम नबी आजाद की तरफ से लखनऊ में बुलाई गई बैठक में भी खत्री मौजूद नहीं थे. पार्टी ने हाल ही मेंं आजाद को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया है. हालांकि आजाद ने यह कह कर सभी अटकलों को विराम देने की कोशिश की कि खत्री की सेहत खराब है.

आजाद ने मधुसूदन मिस्त्री की जगह ली है. कांग्रेस के आंतरिक सूत्रों की माने तो खत्री भी चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की वजह से इस्तीफा दे रहे हैं. वास्तव में किशोर राज्य में किसी ब्राह्मण को कांग्रेस के प्रचार अभियान का प्रमुख बनाने पर तुले हुए हैं. राज्य में 2017 में विधानसभा के चुनाव होने हैं.

साल की शुरुआत में कांग्रेस ने प्रशांत किशोर को उत्तर प्रदेश में पार्टी का संगठन मजबूत करने की जिम्मेदारी थी. पार्टी उत्तर प्रदेश में ढाई दशकों से सत्ता से बाहर है. 

लखनऊ में यह बात सब जानते हैं कि किशोर खत्री को हटाए जाने के बारे में खबरें मीडिया में प्लांट करते रहे हैं. उनकी योजना ब्राह्मण नेता को आगे बढ़ाने की है ताकि कांग्रेस के कभी परंपरागत वोट बैंक रहे इस जाति को फिर से वापस पार्टी के पाले में लाया जा सके.

कांग्रेस की खराब हालत की एक वजह यह भी रही कि ब्राह्णों ने पार्टी का साथ छोड़ दिया

कांग्रेस की खराब हालत की एक वजह यह भी रही कि ब्राह्मणों ने पार्टी का साथ छोड़ दिया और अब किशोर उन्हें 2017 के चुनाव के पहले कांग्रेस से जोड़ना चाहते हैं. ब्राह्मणों की राज्य में 10 फीसदी आबादी है और हर दल की इस वोट बैंक पर नजर होती है.

ब्राह्मण चेहरा में पार्टी के सामने केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद, राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी और पूर्व बनारस सांसद राजेश मिश्रा शामिल हैं. 

जब से किशोर को पार्टी का चुनावी अभियान संभालने की जिम्मेदारी मिली हैं, तब से उन्हें मिस्त्री समेत उत्तर प्रदेश कांग्रेस के नेताओं के विरोध का सामना करना पड़ रहा है. मिस्त्री किशोर के कामकाज से खुश नहीं थे क्योंकि किशोर, खत्री या किसी अन्य से पूछे बगैर एकतरफा फैसला लिया करते हैं.

कांग्रेस के एक बड़े पदाधिकारी ने बताया, 'खत्री को लगा कि उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है. जैसा कि मिस्त्री के साथ किया गया. उन्होंने कई मौकों पर राहुल गांधी से इसकी शिकायत भी की, जो किशोर को समर्थन दे रहे हैं. सब को पता था कि खत्री को मिस्त्री से पहले हटाया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ. पार्टी में जारी अनिश्चितता से चुनावी अभियान को नुकसान हो रहा है.'

नेता ने कहा कि अन्य दल इस तरह की छोटी समस्याओं को सुलझा चुके हैं लेकिन कांग्रेस अभी भी यह तय नहीं कर पाई है कि राज्य कांग्रेस का प्रमुख कौन होगा. खत्री को हटाना इस मौके पर इसलिए भी भारी पड़ सकता है क्योंकि उनकी जगह लेने वालों के सामने रणनीति तैयार करनेे के लिए बेहद कम वक्त होगा.

आजाद ने भी खुद को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाए जाने को लेकर शंका व्यक्त की थी. उन्होंने कहा था, 'मुझे आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में काफी समय दिया गया था लेकिन उत्तर प्रदेश के मामले में मेरे पास कुछ ही महीने बचे हैं. यह कठिन चुनौती है लेकिन हम काम करेंगे और कांग्रेस के आलोचकों को शांत कर देंगे.'

हलांकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इस तरह की आशंकाओं को खारिज करते हुए खत्री को कांग्रेसी नेता मानते हैं. उन्होंने कहा कि खत्री की जगह कोई नहीं ले सकता. हालांकि उन्होंने प्रचार समिति की जिम्मेदारी किसी नए चेहरे को दिए जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया.

उन्होंने कहा, 'केवल ब्राह्मण को नियुक्त कर देने से वह आपको वोट नहीं देगा. जो भी मसला है, उसे तत्काल सुलझाना चाहिए. चुनाव करीब है और हम इन छोटे मुद्दों पर समय नहीं बर्बाद कर सकते.'

पार्टी को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवारी के मामले में भी इसी तरह की समस्या का सामना करना पड़ रहा है. आजाद ने कहा कि कांग्रेस चुनाव से पहले मुख्यमंत्री के उम्मीदवार की घोषणा कर देगी.

ब्राह्मण उम्मीदवार के मामले में पार्टी दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने की अटकलें भी चल रही थीं. हालांकि उनकी उम्मीदवारी को लेकर पार्टी में किसी को ज्यादा भरोसा नहीं है. उन्हें शायद ही कोई ब्राह्मण की तरह देखता है. पार्टी अगर ऐसा करती है तो उसे फायदे की बजाए नुकसान ही होगा.

First published: 24 June 2016, 7:33 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी