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बाजारवादी सलाहकार की नियुक्ति, विजयन की 'अ'वामपंथी सोच

शौर्ज्य भौमिक | Updated on: 27 July 2016, 8:02 IST
(मलिक/कैच न्यूज)

पिन्नराई विजयन को केरल के मुख्यमंत्री का पद संभाले अभी दो माह भी पूरे नहीं हुए हैं और विवादों ने उनके इर्द-गिर्द डेरा डाल दिया है. सीपीएम के केन्द्रीय नेतृत्व ने अपनी केरल इकाई से उन कारणों की बाबत स्पष्टीकरण मांगा है जिसकी वजह से गीता गोपीनाथ को विजयन का आर्थिक सलाहकार नियुक्त किया गया है. गीता गोपीनाथ जानी मानी अर्थशास्त्री और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर हैं. लेकिन उनकी आर्थिक विचार वामपंथ के बिल्कुल खिलाफ जाती है.

इस नियुक्ति को इसलिए भी हैरानी से देखा जा रहा है क्योंकि गोपीनाथ 'नवउदारवादी समर्थक' हैं और उनकी नीति पार्टी के आर्थिक सिद्धांतों से सीधे तौर पर मेल नहीं खाती है. इसके पहले गोपीनाथ ने अपने एक आलेख में लिखा था कि पूरे उद्योगों में 100 फीसदी विदेशी मालिकाना हक दिए जाने का सकारात्मक असर होगा.

उनके मुताबिक मोदी सरकार ने लोक लुभावन नीतियों से ऊपर उठते हुए कई कठिन फैसले लिए हैं जिससे वित्तीय घाटे पर नियंत्रण पाने में मदद मिली है और उनके द्वारा किए गए कठिन काम से उभरती हुई बाजार अर्थव्यवस्थाओं में भारत को अपनी पैठ बनाने में मदद मिली है.

उन्होंने अरुण जेटली के पिछले साल के बजट की भी जमकर तारीफ की थी और इसे विकासवादी एजेंडा करार दिया था औक इसे व्यापार करने के लिए आसान बनाने वाला भी कहा था. सीपीएम की केरल इकाई और विजयन दोनों की ही 'नव-उदारवादी' नीतियों की कट्टर खिलाफत करने वालों के रूप में पहचान है और गोपीनाथ के विचार उनकी आर्थिक नीतियों से मेल नहीं खाते हैं.

वैसे विजयन ने अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए कहा है कि आर्थिक विशेषज्ञों के पास अर्थव्यवस्था से जुड़ी समस्याओं के लिए विभिन्न मत और समाधान होते हैं. विश्व अर्थव्यवस्था के बारे में उनसे राय लेने और उनके विचार जानने में क्या बुराई है? हम जैसा चाहेंगे, उनकी राय का अपनी तरह से इस्तेमाल करेंगे. जब तक हमारी सोच स्प्ष्ट है, पार्टी लाइन से अलग होने का सवाल ही नहीं उठता. हमारे लिए वो दुनिया की सबसे बड़ी अर्थशास्त्रियों में से एक है जिनकी जड़ें केरल से हैं.

गोपीनाथ 'नवउदारवादी समर्थक' हैं और उनकी नीति पार्टी के आर्थिक सिद्धांतों से सीधे तौर पर मेल नहीं खाती है

लाख टके का सवाल तो यह है कि तो क्या उन्होंने मुख्यमंत्री पद जिम्मेदारियों के चलते अपने रुख में बदलाव कर लिया है. इसका जवाब कुछ समय बाद मिलेगा.

1990 के शुरुआती साल में मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था के बाद से भारत में समाजवाद समय के अनुरुप नहीं रह गया है. औद्योगिक क्षय होने से पश्चिम बंगाल की अर्थव्यवस्था असफल होने लगी. कम्युनिस्टों और नीतियों के विरोध में लेख लिखे जाने लगे. केरल दूसरा ऐसा राज्य था जिसकी सत्ता कम्युनिस्टों के हाथ रही. पर्यटन से आय और यहां से नौकरी करने विदेश गए लोगों के द्वारा विदेशों से धन भेजे जाने से यह राज्य बचा रहा.

पिछला दशक उदारवाद, निजीकरण और वैश्विकवाद (एलपीजी) का दशक रहा है जो अर्थव्यवस्था का मूल रहा. हालांकि सीपीएम ने एलपीजी के खिलाफ प्रदर्शन किया है जबकि नई पीढ़ी एप्पल समेत अनेक विदेशी उत्पादों का खुलकर इस्तेमाल कर रही है और करती रहना चाहती है.

वास्तव में –पूंजीवाद ने गिरगिट की तरह अपना रंग बदलकर समाजवाद के रूप में अपने आपको संरक्षित कर लिया है और समाजवाद समय के अनुरूप खुद को पर्याप्त रूप से सुसज्जित नहीं रख सका है. हालांकि उसे अपनी कमजोरियों के बारे में मालुम है.

विजयन संभवतः सोच रहे हैं कि बदलते समय के साथ सीपीएम को अपनी सोच को ढाल लेना चाहिए. हो सकता है कि गोपीनाथ की नियुक्ति के पीछे यही सोच रही हो.

इस व्याख्या से यही अर्थ निकलता है विशेषकर तब जब वो कहते हैं कि आर्थिक विशेषज्ञों के पास समस्या के समाधान के लिए विभिन्न मत और जवाब होते हैं. विश्व अर्थव्यवस्था के बारे में उनसे राय लेने और उनके विचार जानने में क्या बुराई है? हम जैसा चाहेंगे, उनकी राय का अपनी तरह से इस्तेमाल करेंगे.

संयोग से उनका राजनीतिक करियर स्टालिनवाद के मानकों के विरोध से शुरु होता है. जैसे कि क्लास कोआपरेशन में विश्वास न कि क्लास स्ट्रगल के विचार में.

लेकिन इस बात की भी क्या गारंटी है कि गोपीनाथ के सुझाव मान ही लिए जाएंगे?

हमें यह याद रखना चाहिए कि गोपीनाथ केवल सलाहकार हैं. कोई कार्यकारी शक्तियां उनके हाथ में नहीं हैं. और विजयन भी कह चुके हैं कि जब तक हमारी सोच स्प्ष्ट है, चिन्ता करने की कोई जरूरत नहीं, पार्टी लाइन से अलग होने का तो सवाल ही नहीं उठता.

यह सवाल अभी बरकरार है कि–क्या गोपीनाथ का भविष्य भी रघुराम राजन जैसा हो जाएगा? ठीक, कई लोग विजयन और मोदी के काम करने के तरीकों में एक समानता देखते हैं. लेकिन हमें अभी इंतजार करना और देखना होगा.

First published: 27 July 2016, 8:02 IST
 
शौर्ज्य भौमिक @sourjyabhowmick

संवाददाता, कैच न्यूज़, डेटा माइनिंग से प्यार. हिन्दुस्तान टाइम्स और इंडियास्पेंड में काम कर चुके हैं.

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