Home » इंडिया » Why chose on Saturday 9 November to hear Ayodhya verdict in Supreme Court?
 

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या फैसले की सुनवाई के लिए शनिवार 9 नवंबर को ही क्यों चुना ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 November 2019, 9:34 IST

सुप्रीम कोर्ट अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में शनिवार को सुबह 10.30 बजे फैसला सुनाने जा रहा है. अचानक शुक्रवार रात यह घोषणा की गई कि अयोध्या मामले पर फैसला शनिवार सुबह 10.30 बजे सुनाया जाएगा. मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद शीर्ष अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और तब से यह अनुमान लगाया जा रहा था कि मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के सेवानिवृत्त होने से पहले यह फैसला सुनाया जायेगा.

न्यायमूर्ति गोगोई को 17 नवंबर को सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं. 17 नवंबर रविवार है और आमतौर पर एक महत्वपूर्ण मामले में फैसले की घोषणा अवकाश के दिन नहीं की जाती है. न्यायाधीशों के सेवानिवृत्त होने के दिन अदालत के फैसलों की भी घोषणा नहीं की जाती है. इसके अलावा 16 नवंबर एक शनिवार है. जस्टिस गोगोई का अंतिम कार्य दिवस 15 नवंबर है. यह अटकलें लगाई जा रही थी कि अयोध्या मामले के फैसले को 14 नवंबर या 15 नवंबर को जस्टिस गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच द्वारा सुना जा सकता है.

 

हालांकि न तो अदालत और न ही सरकार ने पहले संकेत दिया था कि अयोध्या मामले में फैसला 14-15 नवंबर से पहले आ सकता है. माना जा रहा है कि अचानक की गई घोषणा एक रणनीति का एक हिस्सा है, ताकि उन्हें इस संवेदनशील, भावनात्मक और विश्वास पर घोषणा से आगे किसी भी तरह की साजिश के लिए तैयार होने का कोई अवसर न मिले.

इस बीच पूरे देश और उत्तर प्रदेश में शांति सुनिश्चित करने के लिए सभी तैयारियां की गई हैं. मुख्य न्यायाधीश गोगोई ने उत्तर प्रदेश के कार्यवाहक मुख्य सचिव, राजेंद्र तिवारी और पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह से भी मुलाकात कर अयोध्या के फैसले की घोषणा से पहले राज्य में सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा की थी.

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First published: 9 November 2019, 9:22 IST
 
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