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कांग्रेस: पूरे के चक्कर में कही आधा भी हाथ से निकल न जाय

आकाश बिष्ट | Updated on: 24 July 2016, 8:38 IST
(congress)

उत्तर प्रदेश और पंजाब के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दलों ने म्यान से तलवारें निकाल ली हैं. भारत की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस भी दोनों राज्यों में कमर कस चुकी है. दोनों राज्यों में पार्टी जोरदार चुनाव प्रचार की तैयारी कर रही है. हालांकि पार्टी यूपी पर ज्यादा जोर दे रही है. पार्टी राज्य की सत्ता से दो दशकों से अधिक समय से बाहर है.

कांग्रेस ने जब से चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को यूपी में प्रचार की कमान सौंपी तभी से पार्टी के यूपी में सीएम उम्मीदवार को लेकर अटकलें हवा में तैरनी लगीं थी. इनमें सबसे ज्यादा चर्चा प्रियंका गांधी के नाम को लेकर हुई, लेकिन तीन बार दिल्ली की सीएम रह चुकीं शीला दीक्षित को यूपी का सीएम उम्मीदवार घोषित करके कांग्रेस ने इस चर्चा को विराम दिया.

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शनिवार को शीला ने यूपी में प्रचार अभियान की शुरुआत भी कर दी. शीला राज्य में तीन दिवसीय बस यात्रा निकाल रही हैं. इस यात्रा को हरी झंडी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने दिखायी. हालांकि यात्रा शुरू होने के कुछ घंटे बाद ही शीला दीक्षित की तबियत बिगड़ गई और वो बीच रास्ते में यात्रा छोड़ दिल्ली वापस लौट आई हैं.

कांग्रेस पूरे राज्य में 27 रोडशो आयोजित करेगी. इसके अलावा सोनिया गांधी और राहुल गांधी राज्य में रैलियां करेंगे. राहुल गांधी लखनऊ में पार्टी के 50 हजार कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करेंगे. वहीं सोनिया दो अगस्त को वाराणसी में रैली करेंगी.

छोटे राज्यों की शिकायतें

पंजाब में पार्टी राज्य के पूर्व सीएम और राज्य इकाई के अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही है. जब से अमरिंदर अध्यक्ष बने हैं तब से ही पार्टी चर्चा में बनी हुई है. ज्यादातर राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में कांग्रेस राज्य में लड़ाई में बनी हुई है. हालांकि आम आदमी पार्टी ने राज्य में आक्रामक रुख अपनाकर सत्ता संघर्ष को त्रिकोणीय बना दिया है.

इन दो बड़े राज्यों के साथ ही मणिपुर, गोवा और उत्तराखंड में विधान सभा हो सकते हैं. लेकिन पार्टी की इन राज्यों में क्या रणनीति होगी ये अब तक साफ नहीं हुआ है. इन प्रदेशों को लेकर कांग्रेस की चुप्पी बताती है कि ये छोटे राज्य कांग्रेस की हाथों से कैसे फिसल गए. 

ज्यादातर छोटे कांग्रेसी राज्यों की कांग्रेस इकाइयां केंद्रीय नेतृत्व द्वारा अनदेखी की शिकायत करती हैं. कुछ राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो कांग्रेस आलाकमान ने अपने रुखे रवैये के कारण ऐसे राज्यों को विपक्षियों को तस्तरी में रखकर पेश कर दिया.

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शायद यही वजह है कि बीजेपी और आम आदमी पार्टी इन राज्यों में अपनी पैठ बनाने में लगे हैं. गोवा में आम आदमी पार्टी को शुरुआती सफलता मिलती भी दिख रही है. स्थानीय मीडिया की मानें तो आम आदमी पार्टी कांग्रेस के जनाधार में सेंध मारने में सफल हो रही है. उसकी रैलियों से भी राज्य में पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता का पता चलता है.

कांग्रेस ने यूपी और पंजाब के उलट इन राज्यों में अभी तक ये स्पष्ट नहीं किया है कि वो अकेले चुनाव लड़ेगी या स्थानीय दलों से गठबंधन करेगी. 

पूर्वोत्तर का संकट

मणिपुर में बीजेपी ने काफी मजबूत पैठ बना ली है. बीजेपी राज्य की कांग्रेस सरकार को बेदखल करने में लगभग सफल रही थी. कांग्रेस राज्य में किसी तरह अपनी सत्ता बचा पाई. लेकिन अगली बार वो सत्ता बचा पाएगी या नहीं, ये कहना मुश्किल है.

अगर मणिपुर और उत्तराखंड कांग्रेस के हाथ से निकल गए तो उसके पास केवल पांच राज्य रह जाएंगे

पूर्वोत्तर भारत के एक कांग्रेसी नेता ने कैच को बताया, "चुनाव प्रचार तो भूल जाइए, हमें तो यही नहीं पता कि हमारे कौन से विधायकों हमारे साथ रहने वाले हैं."

अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस विधायकों ने बगावत कर दी. कई नाटकीय उतार-चढ़ाव और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य में दोबारा पार्टी की सरकार बन पाई. असम में भी कांग्रेस अंदरूनी फूट का शिकार हो चुकी है. ऐसे में मणिपुर की कांग्रेसी सरकार के भविष्य को लेकर आशंकित होना स्वाभाविक है.

उत्तराखंड में भी कांग्रेस को बड़ा झटका लग चुका है. राज्य की हरीश रावत सरकार बगावत के बाद किसी तरह अपने आप को बचा पाई. बीजेपी राज्य में कांग्रेसी नेताओं की अंदरूनी कलह और सत्ताधारी दल के खिलाफ आक्रोश  को भुनाने की कोशिश में लगी है.

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उत्तराखंड के एक कांग्रेसी नेता कहते हैं, "हम सितंबर के बाद राहुल गांधी समेत दूसरे वरिष्ठ नेताओं से मिलना शुरू करेंगे. अभी हम अपने दम पर काम कर रहे हैं, हम कंस्टिट्यूटिंग कमिटी गठन करने की प्रक्रिया में हैं, जो चुनाव प्रचार को आगे  बढ़ाएगी."

कांग्रेस के रणनीतिकारों द्वारा छोटे राज्यों की उपेक्षा का परिणाम तो आने वाले वक्त में पता चलेगा लेकिन इतना तय है कि अगर मणिपुर और उत्तराखंड कांग्रेस के हाथों से निकल गए तो, देश के केवल पांच राज्यों में उसकी सरकार बचेगी. और ये पार्टी के भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं होगा.  

First published: 24 July 2016, 8:38 IST
 
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