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अभी भी किंग मेकर बनी हुई है कांग्रेस

पाणिनि आनंद | Updated on: 11 February 2017, 6:44 IST
QUICK PILL
  • कांग्रेस की स्थिति कमजोर होने के बावजूद वह गठबंधन को लेकर पहल नहीं कर रही है बल्कि क्षेत्रीय दल उससे संपर्क कर गठबंधन की संभावना तलाश रहे हैं.
  • राहुल गांधी के अकेले अपने दम पर देश भर में पार्टी को मजबूत करने की रणनीति से कांग्रेस ने किनारा कर लिया है. फिलहाल कांग्रेस की रणनीति खुद को प्रासंगिक बनाए रखने की है.

कांग्रेस वापसी की राह पर तो कतई नहीं है. कांग्रेस नेतृत्व को अभी भी नेशनल हेरल्ड मामले में कानूनी खतरा बना हुआ है. लेकिन पार्टी उस तरह से भी अलग-थलग नहीं पड़ी हुई है जैसा सोचा जा रहा था. अभी भी ऐसी पार्टियों की कमी नहीं है जो राज्य स्तर पर कांग्रेस से जुड़ने की इच्छा रखती हैं.

वाम मोर्चा ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल और बीजेपी विरोधी दलों का गठबंधन बनाने के संकेत दिए हैं. बंगाल में 2016 में चुनाव होने हैं. निश्चित तौर पर बंगाल में वाम और कांग्रेस के गठबंधन को कई तरह की मुश्किलों का सामना करना होगा क्योंकि केरल में दोनों पार्टियां एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं. 

केरल में पश्चिम बंगाल के आस पास ही चुनाव होगा. वहीं तमिलनाडु में बिहार की तर्ज पर डीएमके और कांग्रेस का महागठबंधन बन सकता है. दोनों ही दल इस संभावित गठबंधन को लेकर सक्रियता से विचार कर रहे हैं.

तो क्या कांग्रेस के लिए गठबंधन नया फॉर्मूला है?

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कांग्रेस गठबंधन को लेकर पहल नहीं कर रही है बल्कि क्षेत्रीय दल गठबंधन को लेकर कांग्रेस से संपर्क कर रहे हैं. 2016 के पहले छह महीनों में चार राज्यों में चुनाव होने वाले हैं. असम, पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु के साथ केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में विधानसभा के चुनाव होने हैं. कई दलों ने बिहार की तर्ज पर अन्य राज्यों में महागठबंधन की संभावनाओं पर विचार करना शुरू कर दिया है.

जेडीयू और आरजेडी बिहार में कांग्रेस के बड़े सहयोगी दल रहे लेकिन इन राज्यों में उनकी कोई भूमिका नहीं है. बिहार में जूनियर रही कांग्रेस अब अन्य राज्यों में महागठबंधन की रणनीति को लागू करने जा रही है.

बिहार की सफलता के बाद कांग्रेस को इस बात का एहसास हो चुका है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में गठबंधन बेहतर विकल्प है जहां उसकी हालत कमजोर है.

बिहार में कांग्रेस ने 41 सीटों पर चुनाव लड़ा था और वह 27 सीटों पर जीतने में सफल रही

पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के पास महज चार सीटें थीं.

राहुल गांधी की रणनीति खारिज

यूपीए के दौरान राहुल गांधी का साफ कहना था कि पार्टी अकेले अपने दम पर आगे बढ़ते हुए अपनी स्थिति मजबूत करेगी. उन्होंने 2009 की जीत के बाद भी इस रुख का समर्थन किया था जब कांग्रेस उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव के दौरान बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रही थी.

हालांकि अब ऐसा लगता है कि उनकी रणनीति नजरअंदाज की जा चुकी है. पार्टी को लगता है कि उसकी मौजूदा चुनौती अपने आप को प्रासंगिक बनाए रखने की है. दक्षिण भारत के एक कांग्रेसी नेता ने बताया, 'अन्य राज्यों में गठबंधन बनाने में कोई बुराई नहीं है. हम डीएमके और अन्य क्षेत्रीय दलों के साथ समझौता कर सकते हैं जिनकी दलित और ओबीसी वोट बैंक पर पकड़ है. पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में महागठबंधन जैसा प्रयोग किए जाने की संभावना है.'

हालांकि उन्होंने एआईडीएमके साथ गठबंधन की संभावना से इनकार नहीं किया लेकिन डीएमके उनके लिए ज्यादा सहज है. पश्चिम बंगाल को लेकर अभी तक कुछ भी साफ नहीं है. वाम मोर्चा कांग्रेस को गठबंधन के लिए संकेत दे सकता है लेकिन अटकलों की माने तो तृणमूल और कांग्रेस साथ आ सकते हैं.

First published: 30 December 2015, 8:05 IST
 
पाणिनि आनंद @paninianand

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बीबीसी हिन्दी, आउटलुक, राज्य सभा टीवी, सहारा समय इत्यादि संस्थानों में एक दशक से अधिक समय तक काम कर चुके हैं.

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