Home » इंडिया » Why did 250 Chinese troops intrude into Arunachal for a few hours?
 

भारत-चीनी सीमा विवाद की तरह ही चीनी सैनिकों का अतिक्रमण भी स्थायी समस्या बन गया है

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST
(कैच न्यूज)

9 जून को चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के करीब 250 सैनिक अवैध रूप से सीमापार कर अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी कामेंग जिले में भारतीय क्षेत्र में घुस गए. रक्षा सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार वे लोग भारतीय क्षेत्र को छोड़ने से पहले कुछ घंटो तक यहीं रुके रहे. घुसपैठ की यह घटना 14000 फिट की ऊंचाई पर स्थित यंगस्ते में हुई जो बुम ला से करीब 25-25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.

हालांकि, यह क्षेत्र पूरी तरह से भारतीय सुरक्षा बलों की कड़ी निगरानी में है. सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस यहां मुस्तैद रहती हैं.

इस ताजा उल्लंघन को भारत और अमेरिका के बीच बढ़ रहे संबंधों की स्वाभाविक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है. एक तरफ जहां अमेेरिका ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता के भारतीय दावे का समर्थन किया है, वहीं दूसरी तरफ चीन इसका विरोध कर रहा है. उसने हाल ही में भारत की राह में अड़ंगा भी लगाया था.

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चीन का कहना है कि चूंकि भारत एनपीटी का सदस्य नहीं है इसलिए ऐसे किसी देश को विशेष छूट देना भविष्य में गलत परंपरा की नींव रखेगा.

वास्तविक नियंत्रण रेखा पर करीब एक दर्जन से भी अधिक ऐसे स्थान हैं जिनपर चीन अपना दावा करता आ रहा है

वास्तव में उनका यह दावा कुछ और नहीं बल्कि पाकिस्तान को भी इस समूह में घुसाने के लिए दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है. परमाणु अप्रसार के क्षेत्र में बेहद बुरे रिकार्ड के बावजूद पाकिस्तान ने भी इस समूह की सदस्यता के लिए दावा पेश किया है.

चीन पर भी आरोप लगते रहे हैं कि पाकिस्तान के अवैध रूप से संवेदनशील परमाणु प्रौद्योगिकी क्षमता हासिल करने के पीछे उसका भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष योगदान रहा है. इसके अलावा दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर भारत के जापान और अमेरिका की तरफ झुकाव भी चीन को पसंद नही आ रहा है.

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हालांकि रक्षा सूत्रों ने दावा किया है कि इस ताजा उल्लंघन की घटना को एनएसजी के नजरिये से देखे जाने की जरूरत नहीं है. चूंकि चीनी समय-समय पर इस क्षेत्र पर अपना दावा करता रहा है इसलिये इस क्षेत्र में ऐसी घुसपैठ होना बेहद आम घटना है.

रिपोर्ट के अनुसार वास्तविक नियंत्रण रेखा पर करीब एक दर्जन से भी अधिक ऐसे स्थान हैं जिनपर चीन अपना दावा करता आ रहा है और इसे ही इस घुसपैठ के कारण के रूप में देखा जा रहा है जिन्हें रक्षा प्रतिष्ठानों की दिनचर्या के रूप में माना जा सकता है.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक खबर में कहा गया है कि इस घटना को चीन द्वारा एनएसजी में भारत के प्रवेश को रोकने के प्रयास के तौर पर देखना ठीक नजरिया नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार इस प्रकार की घटनाएं होना आम बात है और यंगस्ते के इस विशेष बिंदु पर ऐसी घटना प्रतिवर्ष कम से कम दो बार जरूर होती है.

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एक तरफ जहां भारत लगातार एलओसी को चिन्हांकित करने पर जोर देता आया है वहीं चीन भारत के इस प्रस्ताव को ठुकराता आया है क्योंकि बीजिंग का मानना है कि ऐसा करने से उसका सीमावर्ती दावा प्रभावित होगा.

2014 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे और बीते वर्ष प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा के दौरान भी यह मामला उठाया गया था. चीन ने एलएसी पर सहमत होने के बजाय एक आचार संहिता का सुझाव दिया था.

भारत और चीन की हजारों किलोमीटर लंबी सीमा पर भी घुसपैठ की घटनाएं होना एक आम बात है

यहां तक कि भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और उनके चीनी समकक्ष यांग जिएची के बीच हुई 19वीं सीमा वार्ता के दौरान दोनों ही पक्ष एक उचित, निष्पक्ष और परस्पर स्वीकार्य समाधान तक पहुंचने के लिये सहमत हुए थे.2003 में भी जब दोनों देशों ने विशेष प्रतिनिधियों की नियुक्ति की थी तब भी उनका इरादा इन मुद्दों को तीन चरणों में हल करने का था.

रिपोर्ट का कहना है कि वह प्रक्रिया अभी अपने दूसरे चरण में है जहां पर दोनों ही पक्ष एक समाधान की एक रूपरेखा तैयार कर रहे हैं.हालांकि यह पहली घटना नहीं है जब चीनी सैनिक सीमापार करके भारतीय क्षेत्र में अवैध तरीके से घुस आए हैं. इसके अलावा भारत और चीन की हजारों किलोमीटर लंबी सीमा पर भी घुसपैठ की घटनाएं होना एक आम बात है.

सबसे ताजा घटना विवादित रूप से परिभाषित लद्दाख क्षेत्र में हुई थी.मई 2013 में चीनी सैनिकों ने डेपसांग घाटी और दौलत बेग ओल्डी में अपने तंबू ही गाड़ लिये थे. यह घटना चीनी प्रीमियर के भारत दौरे से कुछ दिन पूर्व ही हुई थी. बाद में भारत ने एक रणनीतिक चाल के तहत दौलत बेग आल्डी हवाई पट्टी तक एक हरक्यूलिस सी-810 विमान उतारकर चीन को जवाब दिया था. दोनों ही देश सीमावर्ती क्षेत्रों में अपने बुनियादी ढांचे को विकसित करने में लगे हुए हैं.

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2014 में भी चीनी राष्ट्रपति शी जिंपनिंग की भारत यात्रा के समय ही पीएलए के करीब 1000 सैनिक भारतीय सीमा में तीन किलोमीटर अंदर तक घुस आए और करीब एक सप्ताह तक वहीं टिके रहे. इससे पहले लद्दाख के पागोंग त्ये क्षेत्र में चीनी सेना की कुछ स्पीडबोट भारतीय सीमा में छः किलोमीटर तक घुस आई थीं. इसके अलावा पीएलए सैनिकों को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में भी देखा गया है जो भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठानों के लिये खतरे की एक बड़ी घंटी है.

रिपोर्ट के अनुसार सीमा उल्लंघन के मामलों में 2013 के बाद से करीब 40 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है. वर्ष 2013 में 411 घटनाएं हुई थीं. भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों द्वारा की जा रही आक्रामक गश्त और दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली के उपायों को मजबूत बनाने के प्रयासों को ही इस गिरावट का मुख्य कारण माना जा रहा है.

First published: 18 June 2016, 12:10 IST
 
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