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क्यों रिटायर होने के एक दिन बाद ही अपने गांव चल दिए जस्टिस चेलमेश्वर ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 June 2018, 11:18 IST

न्यायमूर्ति जस्ती चेलमेश्वर शक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हो गए. उन्होंने कहा कि वह अपने कार्यकाल से खुश हैं और वह अपनी क्षमता से जो कर सकते थे उन्होंने वो किया. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस चेलमेश्वर ने अपने कार्यकाल के दौरान अपनी एक अलग पहचान बनाई. इस दौरान उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था को लेकर भी जमकर सवाल उठाये. वह कोलेजियम प्रणाली के भी आलोचक रहे, चर्चा के दौरान उन्होंने बैठकों में आना भी उचित नहीं समझा.

यही नहीं न्यायपालिका के भ्रष्टाचार को लेकर अपनी आवाज उठाने को लेकर चेलमेश्वर सबसे आगे माने जाते थे. चेलेश्वर मई 2007 में गौहती उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने लेकिन अक्टूबर 2011 तक वह सुप्रीम कोर्ट नहीं पहुंच सके. उन्हें भारत के मुख्य न्यायाधीश बनने का मौका मिला क्योंकि उन्हें शीर्ष अदालत में वरिष्ठता में सीजेआई दीपक मिश्रा के पीछे रखा गया था.

रिटायर होने के बाअद भी चेलमेश्वर यह कहने से नहीं चुके कि ‘जिसके पास सत्ता होती है, वह हमेशा न्यायपालिका को नियंत्रित करने की कोशिश करता है. हर सरकार चाहे मौजूदा हो या कोई और. यहां तक कि अमेरिका में भी ऐसा होता है.’ 

चेलमेश्वर ने सुप्रीम कोर्ट में अपने सात साल के दौरान जो पहचान बनाई उसमे वह हमेशा असंतुष्ट जज के रूप में पहचनाने गए. चेलमेश्वर अपने सिद्धांतों के लिए जाने जाते रहे हैं और रिटायर होने के बाद भी इसकी झलक साफ़ दिखाई दी. वह रिटायर होने के बाद अपने गांव की ओर चल पड़े. चेलमेश्वर ने एक दिन भी दिल्ली के सरकारी आवास में रहना गंवारा नहीं समझा. वह अपने गांव में कुछ वक्त गुजारेंगे और फिर अपनी आगे की योजनाओं पर फैसला करेंगे.

रिटायर होने के एक दिन बाद ही जस्टिस चेमलेश्वर अपने गृह राज्य आंध्र प्रदेश में पुश्तैनी गांव के लिए रवाना हो गए. उनका जन्म कृष्णा जिले में पेड्डा मुतेवी में हुआ था. इस गांव की आबादी वर्तमान में जनसंख्या 3,000 से कम है. अपने गांव से 25 किलोमीटर दूर माचिलिपत्तनम में अपने स्कूल को चेलमेश्वर आज भी श्रेय देते है. तेलुगु साहित्य में जस्टिस चेलमेश्वर गहरी दिलचस्पी थी इसलिए उन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका में चर्चा करने के लिए बुलाया जाता रहा है.

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First published: 23 June 2018, 11:04 IST
 
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