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ईडी ने हसन अली के ठिकानों पर फिर क्यों की छापेमारी?

सादिक़ नक़वी | Updated on: 10 February 2017, 1:51 IST
QUICK PILL
  • ईडी के पास वैसे कई सबूत हैं जिससे यह साबित होता है कि अली ने बड़ी रकम की लॉन्ड्रिंग की. सूत्रों के मुताबिक 8 अरब डॉलर की लॉन्ड्रिंग की बात सही नहीं है लेकिन मनी लॉन्ड्रिंग की बात से इनकार नहीं किया जा सकता.
  • वित्त मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि एजेंसी के पास नए सबूत हैं. एजेंसी को यह सबूत अली के फोन रिकॉर्ड को खंगालने के बाद मिला है.

हसन अली खान एक बार फिर से ईडी (सतर्कता विभाग) के रडार पर हैं. ईडी ने छह शहरों में अली और उनके सहयोगियों के ठिकानों पर छापे मारे थे. इसमें काशीनाथ तपूरिया के ठिकानों  पर भी छापा मारा गया था. ईडी का कहना है कि उन्हें इस मामले में नया सुराग मिला है.

उच्च पदस्थ सूत्रों ने कहा कि एजेंसी को लगता है कि इस मामले की जांच को 'दबाया गया.' दावे के मुताबिक 8 अरब डॉलर की मनी लॉन्ड्रिंग के मामले को आगे बढ़ाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए जो कि सही नहीं है. ईडी के पास वैसे कई सबूत हैं जिससे यह साबित होता है कि अली ने बड़ी रकम की लॉन्ड्रिंग की. 

सूत्र ने कहा, 'मैं यह नहीं कह रहा हूं कि यह 8 अरब डॉलर का मामला है लेकिन जिस रकम की हेरा फेरी की गई वह बेहद बड़ी है.'

एजेंसी को मिले नए सबूत

वित्त मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि एजेंसी के पास नए सबूत हैं. एजेंसी को यह सबूत अली के फोन रिकॉर्ड को खंगालने के बाद मिला है. तब यह मामला सामने भी नहीं आया था. अधिकारी ने कहा, 'फोन रिकॉर्ड्स इस मामले में पड़े पहले छापे से पहले का है. इससे हमें मामले के बारे में नई जानकारी मिली है.' उन्होंने कहा कि इस मामले में दो बड़े राजनीतिक दल भी चपेट में आ सकते हैं.

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फरवरी में पड़ा छापा चौंकाने वाला था. कुछ लोगों का मानना था कि एजेंसी पिछले आठ सालों में अली के खिलाफ आरोपों को साबित नहीं कर पाई है. सच्चाई यह है कि काले धन पर बनी विशेष जांच टीम भी इस मामले की जांच कर रही है. अली एकमात्र वैसे व्यक्ति हैं जिनका नाम एसआईटी की सूची में आया है.

अधिकारी ने बताया, 'ईडी बेवकूफ एजेंसी नहीं है जो बेकार मामले की तहकीकात करेगी.' ईडी के डायरेक्टर करनैल सिंह पिछले तीन महीनों में मुंबई का दो बार दौरा कर चुके हैं. हसन अली के केस की जांच ईडी के मुंबई ऑफिस में की जा रही है. 

पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि एजेंसी मामले को फिर से देख रही है क्योंकि वह ट्रायल शुरू कर मामले को निष्कर्ष तक पहुंचाना चाहती है. ताजा छापेमारी करीब दो सालों की सुस्ती के बाद हुई है.

कौन है हसन अली

अली फिलहाल जमानत पर बाहर हैं और माना जा रहा है कि वह देश के इतिहास में वैसे व्यक्ति हैं जिन पर सबसे ज्यादा कर बकाया है. हसन अली उस वक्त सुर्खियों में आए जब 2007 में यह खबर आई कि अली ने स्विस बैंक में 8 अरब डॉलर जमा करा रखा है.

आय कर विभाग के अधिकारियों का दावा है कि अली पर 1.65 लाख करोड़ रुपये का कर बकाया है. हालांकि आय कर विभाग की जांच को उस वक्त झटका लगा जब स्विस अधिकारियों ने उनके दावे को स्वीकार नहीं किया. 

दिल्ली की एक मैग्जीन ने पहली बार 2008 में रिपोर्ट प्रकाशित कर बताया था कि कैसे अधिकारियों ने फर्जी कागजात के आधार पर दावा किया था. तब इस रिपोर्ट को लेकर सरकार की मंशा पर भी सवाल उठे थे. 

आय कर विभाग और ईडी दोनों ही अभी तक अली के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में पर्याप्त आधार पेश करने में विफल रहे हैं.

2012 में वित्त मंत्रालय ने संसद की स्थायी समिति को बताया था कि अली से कर की वसूली करना लगभग असंभव है.

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First published: 22 March 2016, 11:19 IST
 
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