Home » इंडिया » Why didn't Yogi Adityanath inform police about Hindutva terrorist Sunil Joshi?
 

योगी आदित्यनाथ ने हिंदूवादी आतंकी सुनील जोशी की सूचना पुलिस को क्यों नहीं दी थी?

चारू कार्तिकेय | Updated on: 27 March 2017, 8:36 IST

 

हिंदुवादी आतंकी सुनील जोशी का ‘गोरखपुर कनेक्शन’ क्या है? क्या वे योगी आदित्यनाथ से मिले थे? हिंदुत्व के आतंक को समझने में पूरा एक दशक लग गया, पर इस भयानक लहर की सच्चाई अजमेर दरगाह में विस्फोट के लिए दो आतंकियों को मिली उम्र कैद से सामने आ गई है. देवेंद्र गुप्ता (41) और भावेश पटेल (39) दोनों राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पूर्व प्रचारक थे. अन्य 11 पर भी आरोप हैं. इनमें से भी कइयों के आरएसएस से संबंध थे. अब समय आ गया है, जब पिछले एक दशक से ऐसे मामलों में जुड़े नामों की सार्वजनिक जांच की जाए. इनमें उत्तरप्रदेश के मौजूदा मंत्री महंत योगी आदित्यनाथ भी शामिल हैं.

 

अजमेर दरगाह में हुए विस्फोट के एक आरोपी असीमानंद ने अपना अपराध स्वीकार करते समय सबसे पहले आदित्यनाथ का नाम लिया था. स्वामी असीमानंद को दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था. उन्होंने कहा कि 2006 में इस केस के दो अन्य आरोपियों-सुनील जोशी और भारत मोहन रतीश्वर को आदित्यनाथ से मिलने गोरखपुर भेजा गया था. उस समय वे पूर्वी यूपी के गोरखपुर से भाजपा सांसद थे.

 

आदित्यनाथ के लिए सवाल


अप्रैल 2006 में दोनों गोरखपुर में आदित्यनाथ के निवास पर उनसे मिले और जैसा कि रतीश्वर ने माना, जोशी की उनके साथ गुप्त बातचीत हुई. स्वीकारोक्ति का यह हिस्सा भी रतीश्वर के बयान से पुष्ट होता है. इस बयान को पहले एनआईए के सामने और फिर जज के सामने रिकार्ड किया गया.

एक रिपोर्ट के मुताबिक आदित्यनाथ ने जोशी के साथ हुई बैठक को स्वीकारा और पुष्टि की कि वे मिले थे. असीमानंद ने तो अपनी स्वीकारोक्ति में यहां तक कहा, ‘जोशी ने लौटकर मुझे बताया कि आदित्यनाथ ज्यादा मदद नहीं कर सकेंगे.’ हो सकता है, यह सच हो, पर एक सवाल फिर भी है, जिसका जवाब यूपी सीएम दे सकते हैं या फिर एनआईए कि आदित्यनाथ ने जोशी की खबर पुलिस को क्यों नहीं दी?

 

एनआईए के लिए सवाल

यह सभी जानते हैं कि बाद में असीमानंद अपने बयान से मुकर गए. उन्होंने एनआईए और सीबीआई पर आरोप लगाया कि अपराध स्वीकारने के लिए उन पर दबाव बनाया. इसके बावजूद समझौता विस्फोट मामले में एनआईए की चार्ज-शीट में गोरखपुर कनेक्शन साफ है. चार्ज-शीट में लिखा है- ‘मई 2006 के करीब’. सुनील जोशी ने असीमानंद से कहा कि वे और रतीश्वर ‘आगरा गए थे, फिर आगे गोरखपुर, पर कहीं से कोई मदद नहीं मिली.’

क्या एनआईए ने गोरखपुर जाकर पता करने की कोशिश की कि कौन वे दो लोग थे, जो वहां मिले? इस मामले में चार्ज-शीट में कुछ नहीं है और ना ही मीडिया की कोई रिपोर्ट है. इसका यही मतलब हुआ कि ये भगवा-आतंक षड़यंत्रकारी आदित्यनाथ से मिले या नहीं, इसकी पूरी तहकीकात अभी बाकी है. भगवा ब्रिगेड की जिम्मेदार शख्यिसत अपना मुंह खोलें. खुद की खाल बचाने के लिए और पार्टी के हित में भी आदित्यनाथ को इस मुद्दे का खुलासा करना चाहिए. एनआईए भी इस मुद्दे पर अपने जांच-परिणामों को खुलकर रखे.

First published: 27 March 2017, 8:36 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

पिछली कहानी
अगली कहानी