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छगन भुजबल के भतीजे के बाद बेटे की बारी हैः किरीट सोमैया

अश्विन अघोर | Updated on: 2 February 2016, 22:28 IST
QUICK PILL
  • महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और एनसीपी नेता छगन भुजबल के भतीजे समीर भुजबल को ईडी ने वित्तीय हेराफेरी के आरोप में गिरफ्तार किया है. छगन भुजबल और उनके बेटे पंकज भी मामले में अभियुक्त हैं.
  • कांग्रेस-एनसीपी शासन के दौरान भाजपा नेता किरीट सोमैया ने दर्ज करायी थी शिकायत. सोमैया का दावा की पंकज भुजबल भी होंगे गिरफ्तार.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता छगन भुजबल के भतीजे समीर भुजबल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को वित्तीय हेरोफेरी के आरोप में गिरफ्तार किया. समीर एनसीपी के पूर्व लोकसभा सांसद हैं.

ईडी ने महाराष्ट्र स्थित भुजबल परिवार के नौ परिसंपत्तियों पर छापा मारा. छगन भुजबल कांग्रेस-एनसीपी की गठबंधन सरकार में उप-मुख्यमंत्री रहे थे.

एनसीपी ने कहा है कि ये छापे राजनीतिक बदले की भावना से मारे गए हैं. हालांकि पार्टी प्रमुख शरद पवार खुलकर उनके साथ खड़े नहीं नजर आ रहे.

छगन भुजबल को एनसीपी का अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का प्रमुख नेता माना जाता था. लेकिन मौजूदा मामले में पार्टी उनसे किनारा करती नजर आ रही है. पवार महाराष्ट्र विधान परिषद सदस्य जितेंद्र आह्वाड को ओबीसी नेता के रूप में बढ़ावा देते नजर आ रहे हैं.

ईडी छगन और उनके बेटे पंकज के खिलाफ भी वित्तीय हेराफेरी की जांच कर रहा है. एक वरिष्ठ ईडी अधिकारी ने कैच को बताया, 'जब हमें समीर भुजबल के खिलाफ बहुत ठोस सबूत मिले तब हमने उन्हें समन भेजा. नौ घंटे तक चली पूछताछ के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया.'

छगन भुजबल, उनके बेटे पंकज और भतीजे समीर खिलाफ ईडी वित्तीय हेराफेरी की जांच कर रहा है

मंगलवार को समीर को अदालत में पेश किया गया. अदालत ने उनकी हिरासत की अवधि आठ फ़रवरी तक बढ़ा दी है. ईडी अधिकारी के अनुसार समीर जांच एजेंसी के साथ सहयोग नहीं कर रहे हैं.

एनसीपी के प्रवक्ता नवाब मलिक ने राज्य सरकार पर राजनीतिक बदले के तहत कार्रवाई करने का आरोप लगाया है. वहीं बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने इसे सच की जीत बताते हुए कहा कि पंकज भुजबल की जल्द गिरफ्तारी होनी चाहिए.

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सोमैया ने कहा, "ये झूठ के ऊपर सच की जीत है. हमने कांग्रेस-एनसीपी शासन के दौरान ही महाराष्ट्र की जनता से वादा किया था कि जो लोग महाराष्ट्र सदन और उसके जैसे दूसरे घोटालों में शामिल हैं उनपर कानून कार्रवाई की जाएगी. हमने अपना वादा पूरा किया है."

महाराष्ट्र के वर्तमान सीएम देवेंद्र फडणवीस और सोमैया ने कांग्रेस-एनसीपी शासन के दौरान एक याचिका डाली थी जिसकी जांच ईडी कर रहा था. ईडी ने समीर और पंकज दोनों को समन भेजा था लेकिन सोमवार को केवल समीर ईडी दफ्तर पहुंचे.

इससे पहले ईडी ने छगन भुजबल और उनके परिवार से जुड़ी 280 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है.

ईडी बॉम्बे हाईकोर्ट कि निगरानी में जांच कर रहा है. हाईकोर्ट ने 28 जनवरी को ईडी से चार हफ्ते के अंदर इस मामले में प्रोग्रेस रिपोर्ट मांगी थी.

ईडी ने छगन भुजबल के बेटे पंकज को भी समन भेजा था लेकिन वो पूछताछ के लिए हाजिर नहीं हुए

ईडी ने इस मामले में सभी अभियुक्तों के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत दो एफआईआर दर्ज करायी है. महाराष्ट्र पुलिस की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) भी मामले की जांच कर रही है.

ईडी ने एसीबी की अभियुक्तों के खिलाफ दर्ज मामले के आधार पर ही एफआईआर करायी है. ईडी नई दिल्ली में बने महाराष्ट्र सदन और मुंबई के कलीना इलाके में भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामले में हेराफेरी की जांच कर रहा है.

सोमैया ने आरोप लगाया है कि जांच से पता चला है कि भुजबल परिवार ने नकली कागजी कंपनियों के माध्यम से पैसे की हेराफेरी की.

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केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने एक लिखित प्रश्न के जवाब में 18 दिसंबर को कहा था कि ईडी ने छगन भुजबल, पंकज भुजबल और समीर भुजबल के साथ ही मेसर्स केएस चमनकर एंटरप्राइजेज के खिलाफ मामला दर्ज किया है.

छगन भुजबन ने महाराष्ट्र के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री के तौर महाराष्ट्र सदन के निर्माण का ठेका मुंबई स्थित बिल्डर केएस चमनकर को दिया था. उन्होंने ये ठेका कथित तौर पर बगैर किसी निविदा के दिया गया था.

सोमैया का आरोप है कि प्रारंभिक 50 करोड़ की अनुमानित लागत की जगह इस निर्माण में 150 करोड़ लगे थे. उन्होंने ये भी आरोप लगाया है कि चमनकर ने ये ठेका बाद में ओरिजिन इंफ्रास्ट्रक्चर नामक कंपनी को दे दिया जो भुजबल के रिश्तेदारों की कंपनी है.

भाजपा नेता किरीट सोमैया के अनुसार छगन भुजबल ने नकली कागजी कंपनी के सहारे की वित्तीय हेराफेरी

ये भी आरोप है कि महाराष्ट्र सदन में फर्नीचर लगवाने का ठेका जिस कंपनी को दिया गया उसकी मालिक विशाखा पंकज भुजबल और शेफाली समीर भुजबल हैं. छगन भुजबल पर आरोप है कि इसके बदले उन्होंने चमनकर को अंधेरी के झुग्गी इलाके की जमीन के भूविकास का ठेका दिया. इस जमीन की अनुमानित कीमत एक हजार करोड़ बतायी जा रही है.

छगन पर मुंबई के कलीना इलाके में बेशकीमती जमीन को गैर-कानूनी रूप से एक निजी बिल्डर को देने का आरोप है. एसीबी ने छगन के अलावा पांच अन्य लोगों पर मामला दर्ज किया है.

सोमैया ने जुलाई, 2012 में एसीबी में छगन और उनके परिजनों के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी थी. प्राथमिक जांच के बाद तत्कालीन उप-मुख्यमंत्री और गृह मंत्री आरआर पाटिल ने जांच के आदेश दिए थे.

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सोमैया की दिसंबर, 2014 में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने एसीबी को जांच का निर्देश दिया था. सोमैया के अनुसार उन्होंने जांच में सुस्ती और किसी तरह की गड़बड़ी की आशंका के चलते जनहित याचिका दायर की थी.

एसीबी ने नौ जून, 2015 को छगन समेत कुछ छह लोगों पर एफआईआर दर्ज की. अभियुक्तों में पीडब्ल्यूडी के तीन इंजीनियरों गजानन सावंत, हरीश पाटिल, अनिल कुमार गायकवाड़ और विभाग के सचिव संजय सोलंकी और एमएच शाह शामिल हैं.

हाईकोर्ट ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसीबी और ईडी के अधिकारियों की एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनायी है.

First published: 2 February 2016, 22:28 IST
 
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