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नेशनल हेरल्ड-डीडीसीए विवाद: संसद में छायी रहस्यमयी चुप्पी

पाणिनि आनंद | Updated on: 19 December 2015, 12:09 IST

शीतकालीन सत्र का शुरुआती चार सप्ताह बीत चुका है. कांग्रेस एक के बाद एक मुद्दा बदलकर संसद की कार्रवाई को बाधित कर रही है. पार्टी राज्यसभा में अपनी मजबूत स्थिति का फायदा उठा रही है और कई पास हो सकने वाले विधेयकों को रोक रही है.

अब शीतकालीन सत्र के मात्र तीन दिन बचे हैं, तब अचानक से कांग्रेस सदन की कार्रवाई चलने देने के लिए तैयार हो गई है. लेकिन क्यों? सुगबुगाहट है कि सदन के फ्लोर मैनेजरों ने विपक्षी पार्टी के साथ कोई सहमति बना ली है.

शुक्रवार को सभापति हामिद अंसारी ने सर्वदलीय बैठक बुलाकर पक्ष-विपक्ष के बीच जमी बर्फ को पिघलाने की कोशिश की. इस बैठक में सोमवार से सदन चलाने पर सहमति बनी है. अब कुछ महत्वपूर्ण बिल पास होने की उम्मीद की जा रही है. मौजूदा सत्र 23 दिसंबर को खत्म हो रहा है.

लगातार संसद बाधित कर रही कांग्रेस ने डीडीसीए घोटाले पर जेटली के खिलाफ कुछ नहीं बोला

बैठक के बाद राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाब नबी आजाद ने मीडिया से कहा, ''अरुणाचल प्रदेश का मामला आज खत्म हो गया है. हमें अदालत से न्याय मिल गया है. राज्यसभा में लंबित बिलों को पारित किए जाने की जरूरत है.''

उन्होंने आगे कहा, ''एससी-एसटी प्रिवेंशन ऑफ एट्रोसिटीज बिल और कुछ अन्य जरूरी बिलों को रोका नहीं जाएगा. दो-तीन दिन ही बचे हैं इस सत्र में, और हमने कुछ बिलों को वापस लोकसभा भेज दिया है.''

एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने कैच को बताया, '' कुछ बिलों को मंजूरी देने का समय आ गया है. सदन में नेशनल हेरल्ड केस को लेकर पार्टी ने कुछ ज्यादा ही तीखा रुख अपना लिया. इसका जनता में सही संदेश नहीं गया. इस खुद तक सीमित रखा जाना चाहिए था.''

शीतकालीन सत्र में मात्र तीन दिन बचे हैं. अब कुछ बिल पास होने की उम्मीद की जा रही है

दूसरी ओर पिछले एक महीने से सरकार कांग्रेस पर यह आरोप लगाती आ रही थी कि बिना किसी वैध कारण के विपक्ष संसद की कार्रवाई को हर दिन बाधित कर रहा है. अब बीजेपी ने कांग्रेस के सदन चलने देने के इशारे का स्वागत किया है.

जेडीयू नेता केसी त्यागी ने संसद में गतिरोध खत्म होने का स्वागत किया. उन्होंने कैच से कहा, ''जरूरी बिलों को हर हाल में पास होना चाहिए. एस-एसटी बिल बहुत महत्वपूर्ण है. जीएसटी और व्हिसल ब्लोअर एक्ट को छोड़कर चार-पांच बिलों को पास करने की जरूरत है.''

सीपीआई नेता डी राजा ने कहा, ''राजनीतिक पार्टियां खुद के लिए और लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाती रहती है लेकिन बिलों को भी पास होने देना जरूरी है.'' उन्होंने कहा कि सर्वदलीय बैठक में लिए गए निर्णय पर संदेह जताने की कोई वजह उन्हें नजर नहीं आती.

पिछले कुछ दिनों से चल रहे डीडीसीए विवाद और उसमें वित्त मंत्री अरुण जेटली की भूमिका पर सदन में आजाद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अचानक से चुप्पी साध ली है. कल तक कांग्रेस राज्यसभा को अरुणाचल प्रदेश के मुद्दे पर बाधित कर रही थी.

राजनीतिक पंडित दोनों पार्टियों के रुख में आए इस बदलाव पर आश्चर्यचकित हैं. नेशनल हेरल्ड प्रकरण के बाद उम्मीद थी कि कांग्रेस डीडीसीए घोटाले को लेकर बीजेपी पर दबाव बनाएगी.

दूसरी तरफ टेलिविजन प्राइट टाइम में होने वाली चर्चा भी अब डीडीसीए विवाद और अरुणाचल प्रदेश संकट से हटकर जुवेनाइल जस्टिस जैसे विषयों पर आ गई है. लगातार तीन दिनों से आरोपों के बाढ़ झेल रहे जेटली को लेकर विपक्ष चुप है तो नेशनल हेरल्ड को लेकर भाजपा ने भी चुप्पी साध ली है.

यह सब ठीक उस समय हुआ जब सोनिया गांधी और राहुल गांधी को नेशनल हेरल्ड केस में शनिवार को कोर्ट में पेश होना है. कांग्रेस ने इस मुद्दे पर संसद को रोक दिया था. पार्टी का रोना था कि सरकार गांधी परिवार के प्रति राजनीतिक बदले की भावना से व्यवहार कर रही है. कांग्रेस ने बीते पूरे हफ्ते हर दिन एक नए मुद्दे को उछाल कर राज्यसभा में सदन की कार्यवाही को रोके रखा.

कांग्रेस पार्टी सोनिया-राहुल की नेशनल हेरल्ड मामले में कोर्ट में पेशी के दौरान सड़कों पर शांत रहेगी

कांग्रेस की योजना पहले राहुल-सोनिया की पेशी के दौरान कार्यकर्ताओं और कुछ मुख्यमंत्रियों के साथ पैदल मार्च करने की थी. लेकिन अंतिम क्षण में इस योजना को बदल दिया गया. सोनिया गांधी ने पार्टी और कार्यकर्ताओं को निर्देश जारी किया कि वे शांत रहे. पार्टी के सूत्रों के मुताबिक सड़कों पर किसी भी तरह का प्रदर्शन या हंगामा नहीं करने की ताकीद पार्टी कार्यकर्ताओं को की गई है.

दोनो पार्टियों का बदला सुर और तेवर यह बताता है कि उपराष्ट्रपति द्वारा बुलायी सर्वदलीय मीटिग के साथ ही सत्ताधारी भाजपा और मुख्य विपक्षी कांग्रेस के बीच बैकरूम समझौते पर सहमति बन गई है. क्या बीजेपी व कांग्रेस ने तय कर लिया है कि दोनों डीडीसीए घोटाले और नेशनल हेरल्ड केस में एक-दूसरे के खिलाफ कुछ नहीं बोलेंगे?

क्या डीडीसीए पर आम आदमी पार्टी के आक्रामक रूख से बीजेपी और कांग्रेस दोनों चिंतित हैं? क्या इसी वजह से दोनों पार्टियों के बीच कोई समझौता हुआ है?

आखिरकार, हमेशा कहा जाता है कि राजनीतिक में कुछ भी बिना कारण नहीं होता है. बहुत सी चीजों का हम सिर्फ अनुमान लगा सकते हैं.

First published: 19 December 2015, 12:09 IST
 
पाणिनि आनंद @paninianand

Senior Assistant Editor at Catch, Panini is a poet, singer, cook, painter, commentator, traveller and photographer who has worked as reporter, producer and editor for organizations including BBC, Outlook and Rajya Sabha TV. An IIMC-New Delhi alumni who comes from Rae Bareli of UP, Panini is fond of the Ghats of Varanasi, Hindustani classical music, Awadhi biryani, Bob Marley and Pink Floyd, political talks and heritage walks. He has closely observed the mainstream national political parties, the Hindi belt politics along with many mass movements and campaigns in last two decades. He has experimented with many mass mediums: theatre, street plays and slum-based tabloids, wallpapers to online, TV, radio, photography and print.

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