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मुंजे को हिंदुत्व का नया हीरो बनाने की तैयारी

चारू कार्तिकेय | Updated on: 10 February 2017, 1:46 IST
QUICK PILL
  • 12 दिसंबर को दिल्ली में हिंदू महासभा के अध्यक्ष रहे बालकृष्ण शिवराम\r\nमुंजे केे 143 जयंती पर नई दिल्ली में निकाली जाएगी परेड.
  • भारत में अनिवार्य सैन्य शिक्षा के हिमायती मुंजे इटली के फासीवादी मुसोलिनी से प्रभावित दक्षिणपंथी विचारक थे.

अगर आप 12 दिसंबर को दिल्ली में हैं तो यहां सेना की धुन पर मार्च करते क़रीब 80 किशोरों को देखकर हैरान ना हो. ये छात्र भोंसला मिलिट्री स्कूल से हैं. इस स्कूल को नासिक स्थित सेंट्रल हिंदू मिलिट्री एजुकेशन सोसाइटी (सीएचएमईएस) संचालित करती है.

सीएचएमईएस के संस्थापक बालकृष्ण शिवराम मुंजे केे 143वीं जयंती के मौके पर ये छात्र दिल्ली में परेड करने वाले हैं. मुंजे हिंदू महासभा के अध्यक्ष रहे थे. वो राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार के गुरु सरीखे थे.

सीएचएमईएस की स्थापना मुंजे ने 1935 में की थी. नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास मुंजे की प्रतिमा है जहां 12 दिसंबर को भोंसला स्कूल के छात्र उन्हें याद करेंगे. इस कार्यक्रम में कई जाने माने लोगों के उपस्थित रहने की संभावना है. सीएचएमईएस के कोषाध्यक्ष अतुल पाटनकर ने कैच को बताया कि बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी.

एक और हिंदुत्व नायक को उभारने की कोशिश

संकेत मिल रहे हैं कि यह आरएसएस की योजना का हिस्सा है जिसके तहत उसकी सहयोगी संस्थाएं अपने दिग्गजों की स्मृतियों को पुनर्जीवित कर रही हैं. मई 2014 में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद से आरएसएस से संबद्ध संगठन और उनके फॉलोअर अब अपने मातृ संगठनों से जुड़े पुराने दिग्गजों को राष्ट्रीय स्तर पर याद कर रहे हैं.

मुंजे से पहले हेडगेवार, एमएस गोलवलकर, बाला साहेब देवरस, जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी और दीन दयाल उपाध्याय की जयंती राष्ट्रीय स्तर पर मनाई गई है

मुंजे की इस बात में गहरी आस्था थी कि हिंदुओं का सैन्यकरण होना चाहिए. इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए उन्होंने यूरोप का दौरा किया था. वो इटली में फासीवाद के संस्थापक बेनितो मुसोलिनी से विशेष तौर पर प्रभावित थे. मुसोलिनी से मिलकर लौटने के बाद उन्होंने हेडगेवार के साथ मिलकर स्वंयसेवकों के लिए मिलिट्री ट्रेनिंग अनिवार्य कर दिया था.

ऐसा समझा जाता है कि बीजेपी ने हाल के दशकों में थोड़े समय के लिए मुंजे से खुद को दूर कर लिया था. हालांकि, 21 फरवरी 2012 को भोंसला मिलिट्री स्कूल की प्लेटिनम जुबली के समारोह में भागवत ने कहा था, "हमें भारत को मजबूत बनाने के लिए छात्रों के लिए सैन्य शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए." भागवत का यह कथन आरएसएस में मुंजे के बढ़ते महत्व की ओर संकेत था.

मुंजे ने 1931 में मुसोलिनी से मुलाकात की थी. वह इटली की फासीवादी पार्टी के विचार और स्वरूप से बहुत प्रभावित थे

2008 में महाराष्ट्र आंतकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) ने मालेगांव बम धमाके की जांच के दौरान भोंसला स्कूल से इस घटना के तार जोड़े थे. इसके बाद इस स्कूल की चर्चा हर तरफ होने लगी. एटीएस की चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि स्कूल में धमाके की रणनीति बनाई गई. इसमें दावा है कि धमाके के मुख्य साजिशकर्ता ने इसी स्कूल से पढ़ाई की है. चार्जशीट में इस स्कूल में पढ़ाने वाले लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित को इस ब्लास्ट का साजिशकर्ता माना गया है. पुरोहित फिलहाल नासिक सेंट्रल जेल में बंद है.

फासिज्म के प्रति मुंजे का आकर्षण

इतालवी विद्वान मर्जिया केसोलारी ने फासीवाद की प्रशंसा करने वाले और सैन्य प्रशिक्षण के प्रति लगाव रखने वाले बीएस मुंजे पर शोध किया है. दस्तावेजी सबूतों के हवाले से केसोलारी ने मुंजे के फरवरी-मार्च 1931 में इटली दौरे का व्यापक ब्योरा दिया है.

शोध-पत्र में बताया गया है कि मुंजे यूरोप के दौरे पर कुछ महत्वपूर्ण सैन्य स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में गए थे, लेकिन उनकी इस यात्रा का मुख्य आकर्षण मुसोलिनी के साथ हुई मुलाकात थी.

पढ़ें केसोलारी के शोध-पत्र के कुछ अंश:

1. मुंजे पर फासीवादी संगठन की गहरी छाप की पुष्टि उनकी डायरी करती है. जो इस बात को सजीव ढंग से सामने लाती है कि फासीवाद का विचार (हिंदुओं को) एकजुट करने की परिकल्पना को साकार करता है. मुंजे ने लिखा है, "भारत और विशेष रूप से हिंदू भारत को हिंदुत्व सेना के पुनुरुद्धार के लिए किसी ऐसे संस्थान की जरूरत है. नागपुर स्थित डॉ. हेडगेवार के निर्देशन में चल रहा हमार संस्थान आरएसएस  ऐसा ही है, हालांकि इसे स्वतंत्र रूप से स्थापित किया गया है. मैं अब अपना पूरा जीवन महाराष्ट्र और अन्य प्रांतों में डॉ. हेडगेवार के इस संस्थान के विकास और विस्तार में लगा दूंगा."

2. मुसोलिनी के साथ बैठक में मुंजे ने उन्हें बताया, "प्रत्येक महत्वाकांक्षी और विकासशील राष्ट्र को ऐसे संगठनों की जरूरत है. भारत को उसके सैन्य पुनर्जागरण के लिए इनकी सबसे अधिक जरूरत है. इंग्लैंड या भारत, जहां भी जरूरत पड़ेगी आपके बल्लिला और अन्य फासिस्ट संगठनों के पक्ष में सार्वजनिक मंच से आवाज उठाने में मुझे कोई हिचक नहीं होगी. मैं इनके अच्छे भाग्य और पूर्ण सफलता की कामना करता हूं.''

3. मार्च 1934 में हिंदू सैन्य संगठन पर मुंजे, हेडगेवार और लालू गोखले की इतालवी और जर्मनी के लोगों के साथ चर्चा हुई.

इस बैठक में मुंजे ने कहा कि पूरे भारत में हिंदू धर्म का मानकीकरण करने के लिए मैंने हिंदू धर्म शास्त्र पर आधारित एक योजना के बारे में सोचा है

"लेकिन मुद्दा यह है कि यह आदर्श तब तक लागू नहीं किया जा सकता, जब तक हमारेे पास पूर्ण स्वराज न हो. जिसमें पहले के शिवाजी या मौजूदा दौर में इटली के मुसोलिनी या जर्मनी के हिटलर जैसे हिंदू तानाशाह न हों. लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि जब तक भारत में ऐसा कोई तानाशाह पैदा नहीं होता हमें हाथ पर हाथ धरकर बैठना होगा. हमें इसके लिए एक वैज्ञानिक योजना तैयार करने के बाद इसका प्रचार करना होगा."

4. 1934 में मुंजे ने सेंट्रल हिंदू मिलिट्री एजुकेशन सोसाइटी की शुरुआत की. इसका उद्देश्य मातृभूमि की रक्षा के लिए युवा हिंदुओं को सैन्य प्रशिक्षण देना और उन्हें 'सनातन धर्म' की शिक्षा देना था. साथ ही, निजी और राष्ट्रीय सुरक्षा की कला में युवाओं को माहिर बनाना था.

5. "मुंजे को उम्मीद थी कि विश्व के कुछ प्रभावशाली नेता उनकी मदद करेंगे. उन्होंने ऐसे लोगों से समर्थन की उम्मीद में सभी को एक पत्र भेजा था. उसमें साफ तौर पर फासीवादी इटली और नाजी जर्मनी का जिक्र किया गया था.

इसमें कहा गया है कि इस प्रशिक्षण का मकसद जीत हासिल करने के लिए किसी भी हद तक अपने विरोधियों को खत्म करना है. हालांकि, मुंजे ने 'विरोधी' के बारे में साफ-साफ कुछ भी नहीं कहा है. मसलन वह कोई बाहरी शत्रु के रूप में अंग्रेज थे या 'ऐतिहासिक' आतंरिक शत्रु के तौर पर मुस्लिम.

6. ' मुसोलिनी के फासीवाद के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए मैं पूरी तरह से लगातार चलने वाली शांति प्रक्रिया का विरोध करता हूं जो मानवीय मूल्यों के लिए घातक है. फासीवाद ना तो संभावना और ना ही शांति की उपयोगिता में विश्वास करता है. यह शांतिवाद के सिद्धांत को खारिज करता है जो संघर्ष की समाप्ति पर निकलता है और बलिदान के नाम पर कायराना हरकत है.'

आरएसएस और उसके कई संगठनों पर लंबे समय से फासीवाद की ओर झुकाव रखने का आरोप लगता रहा है. मुंजे द्वारा इटली की फासीवादी ताकतों का अध्ययन और उसे संघ में लागू करने के प्रयास के कारण यह संदेह गहरा जाता है.

लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव में भाग लेने वाली बीजेपी क्यों इस तरह के संगठन से संबंध रखना चाहती है? मिलिट्री स्कूल के साथ आतंकी संबंध होने के आरोप के बाद सीएचएमईएस के कार्यक्रम को समर्थन देना चिंता की बात है.

First published: 24 November 2015, 1:18 IST
 
चारू कार्तिकेय @charukeya

असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़, राजनीतिक पत्रकारिता में एक दशक लंबा अनुभव. इस दौरान छह साल तक लोकसभा टीवी के लिए संसद और सांसदों को कवर किया. दूरदर्शन में तीन साल तक बतौर एंकर काम किया.

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