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क्यों भारत के खिलाफ कार्रवाई के लिए मजबूर हो सकता है पाकिस्तान

भारत भूषण | Updated on: 30 September 2016, 4:03 IST
QUICK PILL
  • पाकिस्तान की तरफ से कोई जवाबी कार्रवाई नहीं किए जाने वाले लोगों का मानना है कि जब तक पाकिस्तान अपने इलाके में भारतीय सेना के ऑपरेशन को मान नहीं लेता तब तक उसके लिए जवाबी कार्रवाई करना मुश्लिक होगा. यह भी कहा जा रहा है कि भारत ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय तौर पर अलग-थलग कर दिया है और दुनिया इस्लामाबाद के साथ खड़ी नहीं है.
  • अगर भारतीय सेना ने वाकई में नियंत्रण रेखा को पार करते हुए अस्थायी शिविरों को ध्वस्त किया है तो फिर पाकिस्तान के पास इस हमले का जवाब देने का हर कारण है. वास्तव में अगले कुछ दिनों के दौरान पाकिस्तान की तरफ से इस हमले का जवाब देने की आशंका है.
  • भारतीय सेना का नियंत्रण रेखा के पार चला जाना पाकिस्तानियों के लिए इस लिहाज से बुरा है क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी सेना अपराजेय है और भारत पाकिस्तान के खिलाफ कुछ करने की हिम्मत नहीं रखता है.  

इस्लामाबाद की तरफ से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भारतीय सेना के किसी ऑपरेशन को खारिज किए जाने का मतलब कुछ लोग इस तरह से निकाल रहे हैं कि पाकिस्तान इसका जवाब नहीं देगा. गुरुवार की सुबह भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सैन्य अभियान चलाकर आतंकियों के कैंप को ध्वस्त कर दिया. 

पाकिस्तान की तरफ से कोई जवाबी कार्रवाई नहीं किए जाने वाले लोगों का मानना है कि जब तक पाकिस्तान अपने इलाके में भारतीय सेना के ऑपरेशन को मान नहीं लेता तब तक उसके लिए जवाबी कार्रवाई करना मुश्लिक होगा. यह भी कहा जा रहा है कि भारत ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय तौर पर अलग-थलग कर दिया है और दुनिया इस्लामाबाद के साथ खड़ी नहीं है.

 अमेरिकी सुरक्षा सलाहकार सुसन राइस और भारतीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के बीच हुई बातचीत बताती है कि अमेरिका पाकिस्तान को समर्थन नहीं देगा. आखिरकार उरी हमले के बाद अमेरिका ने  पाकिस्तान से पहली बार सीमा पार से आतंकी अभियान बंद करने को कहा. 

राइस ने यह भी उम्मीद जताई कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र की तरफ से घोषित किए गए आतंकी संगठनों के खिलाफ मसलन लश्कर ए तैयबा, जैश ए मोहम्मद और अन्य संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करेगा. भारत अमेरिका से ऐसा ही सुनना चाहता था. 

हालांकि इस बारे में स्थिति साफ नहीं हो पाई है कि अमेरिका ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों के खिलाफ भारत की कार्रवाई को मान्यता दी या फिर उसने पाकिस्तान के कब्जे वाली कश्मीर में रणनीतिक हमले को नजरअंदाज करना मुनासिब समझा.

ऐसे हालत में यह मानना ठीक नहीं है कि पाकिस्तान भारत के सैन्य अभियान का जवाब नहीं देगा. जमीनी हकीकतों को ध्यान में रखते हुए ऐसा सोचना मुनासिब नहीं है.

अगर भारतीय सेना ने वाकई में नियंत्रण रेखा को पार करते हुए अस्थायी शिविरों को ध्वस्त किया है तो फिर पाकिस्तान के पास इस हमले का जवाब देने का हर कारण है. वास्तव में अगले कुछ दिनों के दौरान पाकिस्तान की तरफ से इस हमले का जवाब देने की आशंका है.

कुछ वाजिब कारणों से अगले कुछ दिनों के दौरान पाकिस्तान की सेना भारत के सैन्य अभियान का जवाब दे सकती है.

भारतीय सेना का नियंत्रण रेखा के पार चला जाना पाकिस्तानियों के लिए इस लिहाज से बुरा है क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी सेना अपराजेय है और भारत पाकिस्तान के खिलाफ कुछ करने की हिम्मत नहीं रखता है.

पाकिस्तानियों को लगता है भारतीय उनकी सेना से डरते हैं. यह कल्पना भारतीय सेना के नियंत्रण रेखा के पार जाने से टूटी है. पाकिस्तानी सेना अब पाकिस्तानी जनता के साामने अपराजेय नहीं है. यह कुछ ऐसा है जिसे पाकिस्तानी सेना बर्दाश्त नहीं कर सकती.

दूसरा कारण ज्यादा अहम है. इसका सीधा संबंध पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल राहील शरीफ से है. शरीफ का कार्यकाल नवंबर में खत्म हो रहा है. शरीफ बेइज्जती के साथ सेवानिवृत्त नहीं होना चाहेंगे. खासकर वैसे सेना प्रमुख के तौर जो पाकिस्तान की सीमा की हिफाजत नहीं कर सका. उन्हेंं अपनी सेवानिवृत्ति से पहले यह छवि मिटानी होगी.

नवंबर के बाद कुछ और पूरी ताकत रखने के लिए शरीफ को अपननी छवि साबित करनी होगी. जनरल शरीफ तख्तापलट के जरिये कार्यकारी शक्तियों कोे हाथ में ले सकते हैं जैसा कि पूर्व के सैन्य प्रमुखों ने किया है. हालांकि ऐसा करने के लिए उन्हें ऐसे व्यक्ति की छवि बनानी होगी जो भारतीय सेना को जवाब दे सकता है. 

पाकिस्तान सेना जवाब नहीं देती है तो आतंकी संगठनों में भर्ती होने वाले युवाओं के मनोबल में गिरावट आएगी.

जनरल शरीफ को इसके लिए भारत को सैन्य जवाब देना होगा. पाकिस्तान की नागरिका सरकार इस हालत में नहीं है कि वह भारत के सैन्य अभियान का जवाब दे सके. 

तीसरा कारण यह है कि पाकिस्तानी सेना को आंतकियों के सामने अपनी प्रतिष्ठा बनानी होगी. अगर पाकिस्तान सेना जवाब नहीं देती है तो आतंकी संगठनों में होने वाली भर्ती होने वाले युवाओं के मनोबल में गिरावट आएगी. उन्हें यह लग सकता है कि पाकिस्तनी सेना उनका और जेहादी गतिविधियों की हिफाजत नहीं कर सकती है. ऐसी सूरत में जेहादी पाकिस्तानी सेना के खिलाफ ही काम करने लगेंगे.

इसके अलावा इसका असर कश्मीर घाटी में पड़ेगा. पाकिस्तान की तरफ से प्रभावी समर्थन नहीं मिलने की हालत में आतंकियों को कश्मीरी आवाम का समर्थन नहीं मिलेगा. यह कुछ ऐसा है कि पाकिस्तान इसे होते हुए नहीं देखना चाहेगा.

ऐसी सूरतेहाल में पाकिस्तान की तरफ से कार्रवाई को लेकर भारत को तैयार रहना होगा. अब सवाल यह है कि पाकिस्तान की कार्रवाई नियंत्रण रेखा के पार होगी या यह अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार होगा.

पाकिस्तान नियंत्रण रेखा के पार सुनियोजित हमला कर सकता है. चूंकि भारतीय सीमा में कोई आंतकी शिविर नहीं है इसलिए पाकिस्ता भारतीय सेना के ठिकानों को निशाना बना सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान नियंत्रण रेखा के पार मेंधर, उरी और पुंछ सेक्टर को निशाना बना सकता है.

अंतरराष्ट्रीय सीमा पर होने वाली कार्रवाई से स्थिति और बिगड़ेगी और यह युद्ध में तब्दील हो सकता है. पाकिस्तान इन विकल्पों में से क्या चुनती है यह आने वाले दिनों में साफ हो पाएगा. इस बीच नरेंद्र मोदी सकार अपनी पीठ थपथपा सकती है.

First published: 30 September 2016, 4:03 IST
 
भारत भूषण @Bharatitis

Editor of Catch News, Bharat has been a hack for 25 years. He has been the founding Editor of Mail Today, Executive Editor of the Hindustan Times, Editor of The Telegraph in Delhi, Editor of the Express News Service, Washington Correspondent of the Indian Express and an Assistant Editor with The Times of India.

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