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हरियाणा विधानसभा में जैन मुनि: खूब जमेगा रंग जब मिल बैठेंगे सियासत और धर्म

राजीव खन्ना | Updated on: 28 August 2016, 8:36 IST
QUICK PILL
  • हिंदुत्व के एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए मनोहर लाल खट्टर ने हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत में जैन मुनि का भाषण कराया.
  • सबसे अधिक चौंकाने वाली बात यह रही कि उनके 45 मिनट के भाषण के दौरान किसी भी दल के सदस्य ने आपत्ति नहीं की.
  • विश्लेषकों की माने तो हरियाणा विधानसभा में जैन मुनि का भाषण यह बताता है कि वहां मौजूद सदस्यों को या तो संविधान की जानकारी नहीं है या फिर उन्होंने संविधान को जानबूझकर नजरअंदाज किया.

जैन मुनि के हाथों हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत कराके मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने नई परंपरा की शुरुआत की है. खट्टर जब से मुख्यमंत्री बने हैं, पूरी गंभीरता से हिंदुत्व के एजेंडे को लागू करने की कोशिश करते रहे हैं. 

इस दौरान सबसे अधिक चौंकाने वाली बात यह रही कि जैन मुनि के 45 मिनट लंबे भाषण को सभी दलों के नेता ने तल्लीनता से सुना. इस दौरान राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी और मुख्यमंत्री खट्टर भी मौजूद थे. जैन धर्म के गुरु तरुण सागर ने कई कड़वे वचन कहे और उन्होंने अपने भाषण के दौरान पाकिस्तान, महिला भ्रूण हत्या, पत्नी के दायित्व और अन्य सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय दी.

उन्हें राज्य के शिक्षाा मंत्री राम बिलास शर्मा ने प्रवचन देने के लिए आमंत्रित किया था. विश्लेषकों ने बताया कि उन्होंने अपने भाषण के दौरान आपत्तिजनक बातें कहीं. उन्होंने कहा, 'राजनीति पर धर्म का अंकुश जरूरी है.'

विश्लेषकों का मानना है कि जैनमुनि के इस बयान को भारत की मौजूदा राजनीति के संदर्भ में देखा जाना चाहिए. मुनि ने कहा, 'धर्म पति है और राजनीति पत्नी. हर पति का यह कर्तव्य होता है कि वह अपनी पत्नी को संरक्षण दे. हर पत्नी का धर्म होता है कि वह पति के अनुशासन को स्वीकार करे. अगर राजनीति पर धर्म का अंकुश न हो तो वह मगन मस्त हाथी की तरह हो जाती है.'

खट्टर पर राजनीति के भगवाकरण के आरोप को लेकर उन्होंने कहा कि यह राजनीति का शुद्घिकरण है न कि उसका भगवाकरण.

सत्र से पहले इंडियन नेशनल लोकदल के नेता अभय चौटाला ने कहा कि संत का आना अच्छी बात है क्योंकि कई बार लोगों को उनका प्रवचन सुनने के लिए दूर जाना होता है. अभय चौटाला हरियाणा विधानसभा में विपक्ष के नेेता हैं.

मशहूर पत्रकार वीरेंद्र कुमार बताते हैं, 'राज्य विधानसभा में जो कुछ भी हुआ उसके लिए एक ही शब्द शेष बचता है, आपत्तिजनक. विधानसभा सबसे बड़ी संवैधानिक संस्था है. इस पूरे कार्यक्रम को संविधान का उल्लंघन माना जा सकता है.'

उन्होंने कहा कोई धार्मिक व्यक्ति कैसे राज्यपाल की जगह ले सकता है. किस हैसियत से उन्होंने राज्य विधानसभा में भाषण दिया. उन्होंने कहा, 'या तो विधानसभा में मौजूद लोगों ने संविधान नहीं पढ़ा या फिर उन्होंने जान बूझकर इसे नजरअंदाज किया है.'

उन्होंने कहा कि इस वजह से कल कोई सिक्ख जत्थेदार और मौलाना की भी मांग उठेगी.

हरियाणा विधानसभा में जैन मुनि के भाषण को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों ने गंभीर सवाल उठाए हैं.

इंस्टीटयूट ऑफ डेवलपमेंट एंड कम्युनिकेशन के प्रमोद कुमार इस घटना के बृहत्तर प्रभावों की तरफ इशारा करते हैं. उन्होंने कहा, 'यह राज्य के मामलों में धर्म विशेष की सभ्यता की मिलावट है. यह तब भी दिखता है जब प्रधानमंत्री मोदी विदेश से आने वाले नेताओं को गीता की कॉपी भेंट करते हैं या फिर उनके विभिन्न मंदिरोंं के दौरों के भी यही निहितार्थ हैं.' 

कुमार कहते हैं कि ऐसा ही कुछ यमुना किनारे श्री श्री रविशंकर के कार्यक्रम में दिखा जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और प्रधानमंत्री ने उस कार्यक्रम में शिरकत की.

कुरुक्षेत्र में काम करने रहे वामपंथी रुझान वाले सामाजिक कार्यकर्ता श्याम सुंदर ने कहा कि विधानसभा में दिया गया भाषण देश की धर्मनिरपेक्षता के कमजोर होने की निशानी है. उन्होंने इसके लिए कांग्रेस और तथाकथित वामपंथी दलों को जिम्मेदार ठहराया.

लोग जवाहर लाल नेहरू की वैज्ञानिक सोच को याद कर रहे हैं जब उन्होंने अपने ऐतिहासिक भाषण से लोगों में वैज्ञानिक नजरिया जगाने की कोशिश की थी. नेहरू ने तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद द्वारा सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन किए जाने पर भी आपत्ति जताई थी.

कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोक दल को इसके लिए बराबर का जिम्मेदार बताते हुए उन्होंने कहा, 'यह बताता है कि समय के साथ वह किस कदर खत्म हो चुके हैं और वह समय भी आएगा जब इन दलों में कोई भेद नहीं रह जाएगा.'

First published: 28 August 2016, 8:36 IST
 
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