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मोदी सरकार के सबसे वरिष्ठ नौकरशाह गर्ग ने अचानक क्यों मांगा रिटायरमेंट ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 July 2019, 11:22 IST

वित्त मंत्रालय से तबादला करने के बाद आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र ने वीआरएस के लिये आवेदन किया है. सुभाष चंद्र गर्ग मोदी सरकार के सबसे वरिष्ठ नौकरशाह हैं. बुधवार को जारी एक आदेश में उन्हें उन्हें बिजली सचिव पद पर नियुक्त किया गया था. बिजली मंत्रालय को वित्त मंत्रालय की तुलना छोटा मंत्रालय माना जाता है. एक रिपोर्ट की माने तो पूर्व वित्त और आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने पूर्व भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर बिमल जालान की अगुवाई वाली समिति द्वारा केंद्रीय बैंक की आर्थिक पूंजी ढांचे (एफएफ) की समीक्षा करते हुए रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया.

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार पैनल ने अब आगे के लिए आरबीआई के विचार मांगे हैं. रिपोर्ट के अनुसार समिति एक अजीब स्थिति का सामना कर रही है. गर्ग समिति के निष्कर्षों से सहमत नहीं थे और उन्होंने इसकी समापन बैठक में रिपोर्ट पर हस्ताक्षर नहीं किए. गर्ग सहित सभी समिति के सदस्यों ने अंतिम रूप से रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के लिए 18 जुलाई को नई दिल्ली में आरबीआई के कार्यालय में मुलाकात की थी.

 

रिपोर्ट के अनुसार एक पैनल के सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर पुष्टि की कि समिति के कुछ सदस्यों ने गुरुवार को बैठक की और आगे के रास्ते पर RBI से परामर्श करने का निर्णय लिया. समिति के सामने दो संभावित विकल्प हैं. रिपोर्ट को गर्ग के हस्ताक्षरों के बिना जमा करें या नए आर्थिक मामलों के सचिव, अतनु चक्रवर्ती को शामिल करें. समिति को अपनी रिपोर्ट आरबीआई गवर्नर (शक्तिकांता दास) को प्रस्तुत करना है.

गर्ग को छोड़कर, समिति चरणबद्ध तरीके से RBI से केंद्र सरकार को ’नाममात्र’ अधिशेष हस्तांतरण के अपने दृष्टिकोण में काफी हद तक एकमत थी. एक रिपोर्ट के अनुसार चालू वित्त वर्ष में आरबीआई अधिशेष पूंजी के अलावा सरकार को 90,000 करोड़ रुपये का लाभांश मिलने की उम्मीद थी. पिछले वित्त वर्ष में सरकार को आरबीआई से 68,000 करोड़ रुपये का लाभांश मिला.

शुरुआत में गर्ग को आरबीआई के रिजर्व फंड्स से लगभग 3 ट्रिलियन रुपये के ट्रांसफर की उम्मीद थी, जो पिछले साल की सरकार और आरबीआई के बीच टकराव की स्थिति में थी. गर्ग के अनुरोध पर ही आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड ने छह सदस्यीय समिति का गठन किया था. जिसकी अगुवाई जालान ने की और इसकी रूपरेखा आरबीआई के पूर्व डिप्टी गवर्नर राकेश मोहन ने तैयार की. 24 जून को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा केंद्रीय बजट पेश किए जाने के कुछ दिन पहले, गर्ग ने पैनल की बैठक को छोड़ दिया, जिसे अंतिम रूप दिया गया था.

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First published: 26 July 2019, 11:07 IST
 
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