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व्यापमः सीबीआई के रवैये से व्हिसिल-ब्लोअर नाराज क्यों हैं?

चारू कार्तिकेय | Updated on: 16 June 2016, 15:16 IST

नौ जुलाई को उच्चतम न्यायालय द्वारा मध्य प्रदेश के सबसे चर्चित व्यापम घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के आदेश को एक वर्ष पूरा हो जाएगा. देश की सबसे भरोसेमंद मानी जाने वाली इस जांच एजेंसी की इस मामले में हुई प्रगति की गवाही देते हुए इस मामले को उच्चतम न्यायालय के दरवाजे तक ले जाने वाले व्हिसिल ब्लोअर में से अधिकतर अबतक हुई जांच और काम से बेहद असंतुष्ट हैं.

उनकी नाराजगी की खबरें मीडिया में आई उन खबरों के कारण हैं जिनके अनुसार सीबीआई को इस घोटाले में किसी भी तरह की ‘‘राजनीतिक साजिश’’ नहीं मिली है.

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उच्चतम न्यायालय के फैसले पर अमल करते हुए सीबीआई ने 13 जुलाई 2015 को मध्य प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स से जांच अपने हाथ में ले ली थी. सीबीआई निदेशक अनिल सिन्हा ने इस मामले की जांच के लिये 40 सदस्यीय टीम का गठन किया था. हालांकि प्रदेश के विभिन्न हिस्सो में रहकर काफी समय से इस मामले की निगरानी कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह जांच बेहद धीमी गति से आगे बढ़ रही है.

लंबित शिकायतों की फेरहिस्त

राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग में पूर्व चिकित्सा अधिकारी और इस घोटाले को उजागर करने वाले इंदौर निवासी डा. आनंद राय तीन बिंदुओं को आधार बनाते हुए सीबीआई को कठघरे में खड़ा करते हैं.

1- राय का कहना है कि जांच एजेंसी के पास 15 ऐसी शिकायतें लंबित पड़ी हैं जिनपर अभी तक प्रारंभिक जांच भी शुरू नहीं की गई है. इनमें से दो शिकायतें तो उनके द्वारा व्यक्तिगत रूप से की गई हैं. 

2- जब उन्होंने सीबीआई से उनकी इन शिकायतों का संज्ञान लेने के लिये कहा तो एजेंसी ने अपने चिर-परिचित अंदाज में ठेठ नौकरशाही वाला रवैया प्रदर्शित करते हुए कहा कि वे सिर्फ उन्हीं एफआईआर पर काम कर रहे हैं जिनके लिये उच्चतम न्यायालय ने उन्हें आदेश दिया है. राय का कहना है कि वास्तव में उच्चतम न्यायालय ने एजेंसी को पूरे घोटाले की जांच करने को कहा था. निःसंदेह उच्चतम न्यायालय द्वारा सीबीआई को ‘‘व्यापम घोटाले से संबंधित तमाम मामलों और कथित रूप से उससे जुड़े लोगों की मौत’’ की जांच को लेकर दिये गए आदेश की अस्पष्ट व्याख्या की गुजांइश न के बराबर है. 

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3- इसके अलावा राय का आरोप है कि इस मामले से किसी न किसी तरह जुड़े हाई प्रोफाइल संदिग्धों को बड़ी संख्या में बेहद असामान्य रूप से या तो बरी कर दिया गया है या फिर उन्हें जमानत दे दी गई है. ऐसे लोगों में राज्य के शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा, डीआईजी पुलिस आरके शिवहरे, मुख्यमंत्री शिवराज चौहान के पूर्व निजी सचिव प्रेम प्रकाश, व्यापम के पूर्व निदेशक योगेश उप्रित, कांग्रेस सक्सेना, श्री अरबिंदो इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिकल साईंसेस (एसएआईएमएस) के चेयरमैन डाॅ. विनोद भंडारी, उनके कनिष्ठ प्रदीप रघुवंशी, पूर्व परिवहन मंत्री जगदीश देवड़ा के निजी सचिव राजेंद्र गुर्जर, आरएसएस के सदस्य डा. अजय शंकर मेहता सहित कई अन्य शामिल हैं.

इसके अलावा राय का आरोप है कि केंद्र सरकार भी सीबीआई पर दबाव डाल रही है.

लो-प्रोफाइल आरोपियों के खिलाफ आरोप-पत्र

ग्वालियर निवासी व्हिसिल ब्लोअर आशीष चतुर्वेदी आरोग लगाते हैं कि सीबीआई जांच को मजाक बनाकर रख दिया गया है. उनका कहना है कि राज्य के शासन और प्रशासन को चलाने वाले इतने सारे लोग इस मामले में आरोपी हैं और इसके बावजूद सीबीआई को यह संगठित भ्रष्टाचार का मामला नहीं लगता. चतुर्वेदी अन्य सभी बातों को पीछे छोड़ते हुए सिर्फ एक ही सवाल पूछते हैं - क्या व्यापम से जुड़ी इतनी सारी मौतों का राज कभी खुल पाएगा?

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वे सीबीआई प्रवक्ता के इस मामले में छह आरोप-पत्र दायर करने वाले बयान का उल्लेख करते हुए कहते हैं कि ध्यान देने वाली बात यह है कि यह सभी बेहद निचले दर्जे के मामले हैं. चतुर्वेदी के अनुसार ऐसा सिर्फ इस घोटाले से फायदा पाने वाले वास्तविक उम्मीदवारों और बिचैलियों के मामलों में किया गया है जबकि कई वर्षों तक इस रैकेट का संचालन करने वाली बड़ी मछलियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है.

स्टेटस-रिपोर्ट में 8 माह की देरी

रतलाम से पूर्व निर्दलीय विधायक पारस सकलेचा सीबीआई पर मुख्यमंत्री चौहान को बचाने का हर संभव प्रयास करने का आरोप लगाते हैं, जिनपर उनके सहित कई अन्य सामाजिक कार्यकर्ता भी इस घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाते आए हैं. उनका कहना है कि उन्होंने स्वयं सीबीआई को 100 पृष्ठों के एक पत्र के साथ 350 पृष्ठों के सबूत सौंपे थे जो विशेषकर मुख्यमंत्री की संलिप्तता को साबित करते थे, लेकिन अबतक उनका संज्ञान भी नहीं लिया गया है.

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इसके अलावा वे आरोप लगाते हैं कि सीबीआई ने एसटीएफ द्वार पंजीकृत किये गए 212 मामलों के अलावा एक भी नया मामला दर्ज नहीं किया है. उसपर सीबीआई का तुर्रा यह है कि उच्चतम न्यायालय ने उसे सिर्फ उन्हीं 185 मामलों की जांच करने का आदेश दिया है जो उसके आदेश की तारीख यानि 9 जुलाई 2015 तक पंजीकृत हुए थे. सीबीआई ने उन्हें स्पष्ट कर दिया है कि वह इनसे इतर किसी अन्य मामले की जांच नहीं करेगी और वे जल्द ही उच्चतम न्यायालय में इसकी शिकायत करने का इरादा बना रहे हैं. इसके अलावा सकलेचा आरोप लगाते हैं कि सीबीआई इस जांच की स्टेटर रिपोर्ट उच्चतम न्यायालय में दाखिल करने में पिछले 8 महीने से हीला-हवाली कर रही है.

First published: 16 June 2016, 15:16 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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