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जाकिर नाइक ने पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ क्यों की?

आदित्य मेनन | Updated on: 27 July 2016, 12:53 IST

डॉक्टर ज़ाकिर नाइक ने कभी आतंकवाद को बढ़ावा नहीं दिया, इससे मैं सहमत हूं. वो इस्लामविरोधी ब्रिगेड के नए हाई प्रोफाइल आसान टारेगट हैं, ताकि मुस्लिम समुदाय पर हमला किया जा सके. लेकिन ज़ाकिर नाइक जो करते हैं, आतंकवाद को बढ़ावा देने से कम खराब काम नहीं है, वो जालिमों की तारीफ करते हैं.

सोमवार को इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में नाइक ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तारीफों की बौछार कर दी. हालांकि बीजेपी शासन के दौरान भारतीय मुसलमानों को होने वाली समस्याओं से जुड़ा सवाल वो टाल गए.

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नाइक ने इटरव्यू में वो कहा जो शायद पीएम मोदी का सबसे वफादार भक्त भी कहने से शर्माएगा. उन्होंने कहा कि मोदी हिन्दुओं और मुसलमानों के आपसी संबंध बेहतर बनाना चाहते हैं. 

इंटरव्यू में नाइक ने कहा, "जहां तक भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात है, मैं आपसे ईमानदारी से कहना चाहूंगा कि वो पहले भारतीय पीएम हैं जिसने दो साल के अंदर कई मुस्लिम देशों के दौरा किया है... वो भारत और इस्लामी देशों के बीच संबंध बेहतर बनाना चाहते हैं. वो मुसलमानों और हिंदुओं के आपसी संबंध को बेहतर बनाना चाहते हैं, जो दुनिया के दूसरे और तीसरे सबसे बड़े धर्म हैं. वो सांप्रदायिक सौहार्द लाना चाहते हैं.

सरकार से दिक्कत

मोदी सांप्रदायिक सौहार्द लाना चाहते हैं, ये बात नाइक को दादरी में रहने वाले मोहम्मद अखलाक के परिवारवालों को बताना चाहिए, या फिर अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसाइटी और नरोदा पटिया में मारे गए लोगों के परिवारवालों को, या लातेहार के रहने वालों 12 साल के इम्तियाज के माता-पिता को जिसे कथित तौर पर गोरक्षकों ने मार दिया या फिर कश्मीर में पैलेट गन से अंधे हुए बच्चों को?

जाकिर नाइक को उनकी तीक्ष्ण याद्दाश्त के लिए जाना जाता है. इसलिए ये मुमकिन नहीं कि वो ये बातें भूल गए हों. लगता है कि जल्दबाजी में उन्होंने इन बातों को नजरअंदाज कर दिया.

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जब उनसे पूछा गया कि क्या मोदी के कार्यकाल में हिन्दू-मुस्लिम तनाव बढ़ा है? नाइक ने जवाब दिया, "कुछ मामलों में ये घटा है और कुछ मामलों में बढ़ा है. मैं राजनीतिज्ञ नहीं हूं, मैं इस्लाम और तुलनात्मक धर्म का विशेषज्ञ हूं."

उन्होंने आगे कहा, "मुझे इस सरकार में कोई दिक्कत नहीं हुई है." 

ज्यादा बुरी बात ये हुई कि नाइक ने मोदी पर अपने स्टैंड के बचाव में कुरान को उद्धृत किया. लेकिन हम उस आदमी से उम्मीद भी क्या कर सकते हैं जो पैगंबर मोहम्मद के नवासों इमाम हुसैन और उनके साथियों को मारने वाले यजीद के लिए कहे कि 'अल्लाह उनपर मेहरबान हो.'

मोदी प्रेम की वजह

आखिर नाइक के इस मोदी प्रेम की वजह क्या है? क्या वो सरकार की कार्रवाई से डर गए हैं?

नाइक ने इंटरव्यू के दौरान कहा, "...मोदी द्वारा सांप्रदायिक सौहार्द्र के लिए किए जा रहे प्रयासों को स्वीकृति देते हुए, सऊदी अरब का शाह सलमान ने उन्हें अपने देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया."

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जाहिर है जब खुद जाकिर नाइक के संरक्षक मोदी से प्रेम करते हैं तो उनके पास दूसरा कोई रास्ता नहीं बचता. दरअसल, चाहे वो मोदी की तारीफ करें या यजीद की, वो ये केवल जुल्म को न्यायोचित ठहराने के लिए करते हैं ताकि सऊदी अरब के राजशाही को वैधता मिल सके, जो दुनिया का सबसे जालिम शासकों में एक है.

जाकिर नाइक शिया, सुफी और गैर-मुस्लिमों की आलोचना के लिए जिस तकफीरी का इस्तेमाल करते हैं उसकी जड़ें सऊदी के वहाबी इस्लाम में हैं.

जालिम की तरफदारी

मेरी इस्लाम की जानकारी जाकिर नाइक की तुलना में कुछ नहीं है लेकिन मैं जानता हूं कि किसी जालिम की तरफदारी करना इस्लाम की शिक्षाओं के खिलाफ है. 

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बेहतर होगा कि मैं इसे जाकिर नाइक के तरीके से ही पेश करूं-

"जुल्म करने वालों के साथ न दो, वरना तुम आग में जलोगे, और अल्लाह के सिवा तुम्हारी रक्षा कोई नहीं कर सकता. न कोई तुम्हारी मदद कर सकता है." कुरान, अध्याय 11, आयत 113)

"...उन लोगों के साथ मत रहो जो जुल्म करते हैं." (कुरान, अध्याय 6, आयत 68)

"...केवल जालिम ही एक दूसरे की मदद करते हैं." (कुरान, अध्याय 45, आयत 19)

पैगंबर ने कहा, "दरअसल, मेरे बाद जालिम शासक आएंगे और अपने झूठ को थोपेंगे, अपने जुल्म को जायज ठहराएंगे, उनका मुझसे कोई लेना देना नहीं होगा और न ही मेरा उनसे, और वो मेरे साथ जन्नत में होंगे." (काब इब्न उजराह की हदीस)

पुनश्च

10 साल पुराने इस वीडियो में जाकिर नाइक 2002 के गुजरात दंगों के पीड़ितों का हाले-दर्द बयान करते नजर आ रहे हैं. वो मोदी का नाम तो नहीं लेते लेकिन इसके लिए 'नेताओं' को जिम्मेदार बताते हैं.

डॉक्टर जाकिर नाइक और उनके चैनल पीस टीवी पर लगे बैन को सही ठहराना जायज नहीं लेकिन उनके पाखण्ड और जुल्म की तरफदारी को उजागर करने की जरूरत है.

(लेखक प्रैक्टिसिंग मुस्लिम हैं. लेख में प्रस्तुत विचार उनके निजी हैं, संस्थान की इनसे सहमति आवश्यक नहीं है)

First published: 27 July 2016, 12:53 IST
 
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